
Ranchi: झारखंड में चुनाव के बीच राजस्व विभाग में सीआइ के प्रमोशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. आरोप लग रहे है कि जूनियर को हैंडपिक कर प्रमोशन देकर सीनियर बना दिया गया है. जिन जूनियर को प्रमोशन देकर सीनियर बनाया है वो तो खुश हैं.
लेकिन जिन सीनियर को प्रमोशन ना देकर जूनियर बना दिया गया है वो अब कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. नाम ना छापने की सूरत पर कुछ सीआइ ने कहा है कि ऐसा विभाग की मर्जी से हुआ है.
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प्रमोशन करने से पहले कार्मिक की तरफ से एक वरीयता सूची बनायी गयी थी. उसी सूची के मुताबिक प्रमोशन दिया जाना था. लेकिन ऐसा नहीं किया गया. वरीयता सूची को दरकिनार कर विभाग की तरफ से प्रमोशन देने का काम किया गया. जो कि सरासर गलत है. जबकि ऐसे मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट के कई आदेश है. जिसमें साफ कहा गया है कि कोई भी विभाग जूनियर को प्रमोशन देकर सीनियर नहीं बना सकता.
क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
ऐसे ही मामले की सुनवाई करते हुए 17 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश आया था. आदेश में साफ कहा गया कि किसी भी हाल में जूनियर को प्रमोशन देकर सीनियर नहीं बनाया जा सकता. ऐसा करने से सीनियर को जूनियर के अंदर काम करना पड़ सकता है. जो कि गलत है.
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ऐसा ही एक आदेश पांच दिसंबर 2013 को भी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आया था. लेकिन झारखंड में राजस्व विभाग में प्रमोशन देने के मामले ऐसा ही हुआ है. 40 सीआइ को प्रमोशन दिया गया है. जिसमें से कई जूनिय़र सीआइ को प्रमोट करते हुए सीनियर बना दिया गया है.
पथ निर्माण विभाग में भी हुआ ऐसा तो जेई गए हाइकोर्ट
इससे पहले पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों पर प्रमोशन में गड़बड़ी और अनियमितता के आरोप लगे थे. आरोप यह था कि अधिकारियों ने प्रमोशन देने में वरीयता को प्राथमिकता न देते हुए अपने मनचाहे इंजीनियर्स को हैंडपिक किया है.
इससे करीब 100 से ज्यादा इंजीनियर्स प्रभावित हुए. जिनके साथ ऐसा हुआ है, वो धीरे-धीरे विरोध का सुर अख्तियार कर रहे हैं. सचिव समेत चीफ इंजीनियर को आवेदन देकर इस गलती को सुधारने को कहा. लेकिन विभाग की तरफ से इस मामले में किसी तरह की कोई सकारात्मक कार्रवाई होती नहीं देखी गयी. बाद में काफी इंतजार करने के बाद इंजीनियर्स हाईकोर्ट की शरण में गए. कोर्ट ने विभाग को मामले में जवाब देने को कहा है.
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