
Ranchi: झारखंड सरकार ने छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर योजनाओं के रख-रखाव करने के लिए कॉन्ट्रैक्टर्स को ही जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है. पेयजल और स्वच्छता विभाग की जलापूर्ति योजनाओं में अब कॉन्ट्रैक्टर्स की यह जवाबदेही होगी कि वे पांच वर्ष तक ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस (ओएनएम) का कामकाज भी देखें.
इसे भी पढ़ेंःमध्यस्थता के जरिये सुलझेगा अयोध्या विवाद, SC ने बनायी तीन सदस्यीय मध्यस्थता कमेटी
इसके लिए कॉन्ट्रैक्टर्स को निविदा की शर्तों में ही 25 फीसदी की राशि से संबंधित बैंक गारंटी विभाग में जमा करनी होगी. पहले यह नियम सिर्फ पथ निर्माण विभाग और ग्राम्य अभियंत्रण संगठन में था.
तय होगी कॉन्ट्रैक्टर्स की जवाबदेही
पेयजल और स्वच्छता विभाग में दो वर्ष तक अधिकतम योजनाओं के ऑपरेशन और मेंटेनेंस का जिम्मा कुछ चयनित योजनाओं में कॉन्ट्रैक्टर्स को सौंपा जाता था. इसमें थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की जवाबदेही भी सरकार तीसरी एजेंसी को सौंपती थी. अब दूसरे राज्यों की तर्ज पर यहां पर शुरू होनेवाली मिनी वाटर सप्लाई स्कीम, ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम, सौर ऊर्जा पर आधारित योजनाओं को लेकर की जा रही है, ताकि सभी योजनाओं में एक समरूपता रह सके.
इसे भी पढ़ेंःअंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : जिंदगी का सफर मुश्किल था, मगर कभी हार नहीं मानी रजिया बेगम ने
जानकारी के अनुसार, विभाग में 500 करोड़ से अधिक की योजनाओं का क्रियान्यवन होना है. इसको लेकर दूसरे राज्यों की तरह ही झारखंड सरकार भी अपनी नियमावली तैयार कर रही है. ताकि योजनाओं के फेल होने पर सिर्फ सरकार पर ही जिम्मेवारी तय न हो, बल्कि कॉन्ट्रैक्टर्स को भी जवाबदेह बनाया जा सके. फिलहाल किसी भी योजना में 10 प्रतिशत की बैंक गारंटी सरकार की तरफ से ली जाती है. यह राशि छह महीने के बाद कांट्रैक्टर अपना काम पूरा करने के बाद सरकार से वापस ले लेते हैं.
इसे भी पढ़ेंःसम्मेलन में उठी आवाज- आदिवासी हिंदू नहीं, अलग धर्म कोड न देकर आदिवासियों की पहचान मिटाना चाहती है…
विभागीय सचिव को लेना है निर्णय
विभागीय सचिव अराधना पटनायक को इस संबंध में जल्द निर्णय लेना है, ताकि इसे इसी वित्तीय वर्ष से लागू किया जा सके. अभियंता प्रमुख और मुख्य अभियंता मुख्यालय की तरफ से इस संबंध में सरकार को अपनी सिफारिश भेज दी गयी है.
इसे भी पढ़ेंःहेमंत सोरेन दिल्ली में, नहीं हो सकी सीट शेयरिंग पर कोई बात




