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रांची आउटर रिंग रोड: जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे 1015 करोड़, अब तक एलाइनमेंट फाइनल नहीं

Nikhil Kumar

Ranchi: रांची आउटर रिंग रोड के लिए सिर्फ जमीन अधिग्रहण पर 1015 करोड़ रुपये लागत आने का आकलन किया गया है. 172 किमी सड़क में कई जगह जमीन अधिग्रहण करना होगा इसके लिए चयनित कंसलटेँट ने डिटेल रिपोर्ट सरकार को दिया है. हालांकि, अभी तक इस महत्वपूर्ण आउटर रिंग रोड के निर्माण के लिए एलाइनमेंट पूरी तरह से फाइनल नहीं हो सका है, जिस वजह से प्रोजेक्ट की मंजूरी नहीं मिल पा रही है.

दो साल पहले ही केंद्रीय सड़क, राजमार्ग मंत्रालय के मंत्री नितिन गडकरी ने रांची आउटर रिंग रोड निर्माण कराने की घोषणा की थी और राज्य सरकार से इसके लिए प्रस्ताव मांगा था. केंद्र के इस निर्देश पर पथ निर्माण विभाग झारखंड एनएच विंग ने इसके लिए डिजाइन तैयार करना शुरू किया और रांची से सटे जिलों की सीमा से सड़क निर्माण की योजना तैयार की. मेसर्स एमएसवी इंटरनेशनल व एनवी प्रोजेक्ट की संयुक्त् कंपनी को डीपीआर तैयार कराने का जिम्मा दिया. मिली जानकारी के अनुसार कंपनी ने फोरलेन-छह लेन रोड के निर्माण के लिए करीब 6000-7000 करोड़ रुपये की लागत का आकलन किया है, लेकिन एलाइनमेंट फाइनल नहीं होने की वजह से इसे फाइलन नहीं किया जा सका है.

बता दें कि, बढ़ती जनसंख्या और इंडस्ट्रियल विस्तार के कारण झारखंड सरकार ने राजधानी की कनेक्टिविटी को सुधारने पर काफी जोर दिया है. फ्लाईओवर ब्रिज और इनर रिंग रोड के बाद नयी आउटर रिंग रोड को 7000 करोड़ की अनुमानित लागत से बनाने का प्रस्ताव है.

रांची आउटर रिंग रोड मैप

आउटर रिंग रोड में छ: लेन होंगे, जो बताता है कि यह नया बाईपास नेशनल हाईवे (एनएच) 33 पर ओरमांझी ब्लॉक आफिस के पास से जुड़ा हो सकता है. यह रांची-कुडू रोड पर है, ब्रांबे जाने वाले रास्ते पर.

वर्तमान में तीन नेशनल हाईवे, एनएच-75, एनएच-23 और एनएच-33 इनर रिंग रोड से जुड़े हुए हैं. विभागीय अधिकारियों के अनुसार पहले फेज में आउटर रिंग रोड की लंबाई 48 किलोमीटर होगी, जबकि रास्ते की कुल लंबाई 195 किलोमीटर होगी. हालाँकि, प्रोजक्ट रिपोर्ट में निर्णय लिए गए रास्ते के अनुसार लंबाई अलग-अलग हो सकती है. वर्तमान में, रूट एनएच-33, मतलब रांची-रामगढ़ रोड को एनएच-75 रांची-कुडू रोड से जोड़ता है. इससे रांची एनएच आसपास के शहरों तक जाने में आसानी होगी.

हाईवे कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों के अनुसार एनएच-75 के आसपास डेवलप करने के लिए उर्किड में एनएच 20 शुरू होगा. यह बायपास फिर रांची रामगढ़ रोड के एक तरफ एनएच-43, एनएच-75, E चाईबासा रोड और एनएच 33 से और रामपुर के आगे रांची-जमशेदपुर रोड के दूसरी तरफ से जुड़ जाएगा. इस सड़क पर सात मीटर चौड़ी एक्सेस रोड भी बनाई जाएगी.

आउटर रिंग रोड के फायदे

रांची में आउटर रिंग रोड का एक सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शहर में ट्रैफिक की भीड़ कम हो जाएगी, क्योंकि बाहर से आने वाले ट्रक शहर के मुख्य क्षेत्रों को बायपास कर देंगे. खासतौर से पलामू, गुमला, हजारीबाग और मध्य प्रदेश के भारी मोटर वाहन आउटर रिंग रोड का इस्तेमाल करेंगे.

रांची की वर्तमान जनसंख्या 28 लाख है और यदि बाहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को शामिल किया जाए तो यह संख्या 36 लाख से ज्यादा है. जैसे-जैसे शहर बढ़ता है, वैसे-वैसे आने वाले एरियों को सपोर्ट करने के लिए मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता भी बढ़ेगी. यहीं पर आउटर रिंग रोड की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

रियल इस्टेट पर प्रभाव

वर्तमान में रिंग रोड के आसपास डेवलपमेंट का काम तेजी से चल रहा है. यह उम्मीद की जा रही है कि आउटर रिंग रोड के कंस्ट्रक्शन से जो पांच मुख्य हाईवे से जुड़ेंगे, इसके आसपास रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और घर की बढ़ती मांग के कारण जमीन ज्यादा महंगी हो जाएगी.

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