
Ranchi. हजारीबाग में एनटीपीसी के पकरी-बरवाडीहद्ध कोल परियोजना के तहत चल रहे खनन कार्य के विरोध के बीच एनटीपीसी चेयरमैन ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. बताया जा रहा है कि मुलाकात खनन कार्य को लेकर सरकार और एनटीपीसी के बीच तालमेल को लेकर हुई है.
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मुलाकात के दौरान एनटीपीसी चेयरमैन ने सरकार से अनुरोध किया है कि परियोजना अंतर्गत जिस क्षेत्र में खनन कार्य हो रहा है और जिन जगहों पर खनन कर कोयला डंप रखा गया है. वहां, खनन और ट्रांसपोर्टेशन को न रोका जाए. इस पर सीएम ने कहा कि परियोजना से जुड़े मुद्दे पर राज्य सरकार और एनटीपीसी के बीच तालमेल जरूरी है. हेमंत ने यह स्वीकार किया कि डंप किये कोयले अधिक दिनों तक हवा के संपर्क में रखा जाए, तो उसमें कभी भी आग लग सकती है. या कोई अनहोनी घटना घट सकती है.
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मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा न हो कि झरिया का इतिहास दोबारा हजारीबाग के खनन वाले इलाके में घटे. ऐसे में उन्होंने एनटीपीसी चेयरमेन ने डंप किये गये कोयले को जल्द से जल्द खाली करने के प्रस्ताव पर सहमति दी है. साथ ही इस विषय पर उन्होंने पदाधिकारियों को जल्द ही ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, ताकि डंप कोयले को सही जगहों तक पहुंचाया सके.
रोजगार का मुद्दा गंभीर
सीएम सोरेन ने कहा है कि खनन कार्य के दौरान ग्रामीणों के मुआवजा और रोजगार का मुद्दा काफी गंभीर है. चेयरमैन ने भी इसपर काफी सार्थक जवाब दिया है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि एनटीपीसी जल्द ही सरकार को अपना मंतव्य देगा. हेमंत ने कहा कि यह सर्वविदित है कि राज्य में माइनिंग को लेकर जितनी भी समस्याएं सामने आती हैं, वह स्थानीय स्तर की होती है. ऐसे में जरूरी है कि सरकार और एनटीपीसी के बीच तालमेल बने रहे.
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हेमंत सोरेन ने कहा कि ग्रामीणों के जीवन सुरक्षित रहने के साथ पावर प्लांट का काम नहीं रूके, यह सरकार की जिम्मेवारी बनती है. सीएम ने कहा कि पूरे मामले में एनटीपीसी चेयरमेन से अपना पक्ष रखने को कहा गया है. जबतक उनका पक्ष सरकार के समक्ष नहीं आता है, तब तक परियोजना के लिए नये जमीन अधिग्रहण का काम रूका रहेगा.
लोकतांत्रिक तरीके से अपने मांगों को रखें सहायक पुलिसकर्मी
सहायक पुलिसकर्मियों की मांगों के सवाल पर हेमंत सोरेन ने कहा कि इसपर सरकार की सोच पूरी तरह से सकारात्मक है. हालांकि लाठीचार्ज क्यों हुआ, किसलिए हुआ, यह जानने का विषय है. सीएम ने आंदोलनरतकर्मियों से यह अनुरोध भी किया कि वे अपने मांगों को सरकार के समक्ष रख सकते हैं. लोकतंत्र में सभी को अपनी बातों को रखने का हक है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति या समूह गैर-कानूनी कदम उठाए. सीएम ने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है, तो सरकार भी उचित कदम उठाने से समझौता नहीं करेगी.




