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कृषि विधेयक: JMM ने कहा- NDA का साथ छोड़ रहे सहयोगी दल, बिहार में अब क्या करेंगे नीतीश कुमार

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Ranchi. विपक्षी दलों के विरोध के बीच किसानों से जुड़े दो अध्यादेश गुरुवार को लोकसभा से पारित हो गए. इसे लेकर सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ( जेएमएम ) ने इसे देश के लिए एक काला अध्याय बताया है. पार्टी महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टचार्य ने कहा है कि अमूमन अपने जन्मदिन के दौरान कोई भी राजनेता लोक कल्याणकारी कार्यक्रम का आयोजित करता है. दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितंबर को अपने जन्मदिन पर दो ऐसे अध्यादेश को पास करवा दिया, जिससे आज देश के किसान सड़क पर उतर गये हैं.

इसे भी पढ़ें- पूर्व कांग्रेस नेता ने कहा- 2019 में कांग्रेस के घोषणा पत्र में थे ये कृषि विधेयक, मोदी ने बस इसे पूरा किया

किसानों को अब यह स्पष्ट आभास हो गया है कि मोदी सरकार में उनको लूटने, बर्बाद करने और उनके आर्थिक स्थिति को कमजोर करने की जो कोशिश पिछले कई सालों से हो रही थी, उसे मोदी सरकार अब कानून का शक्ल देने की तैयारी में है.

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मोदी सरकार पर अपने कॉर्पोरेट मित्रों को मदद पहुंचाने की बात करते हुए जेएमएम नेता ने कहा कि यह सभी जानते हैं कि 2019 के शुरुआत से ही मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट मित्रों के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह से खोल दिये हैं. सभी जानते हैं कि 2020-21 के पहले तिमाही में देश का जीडीपी का -29 पर चला गया. दूसरी तरफ एनडीए के दो मित्रों मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी का जीडीपी ग्रोथ क्रमशः 29 प्रतिशत और 26 प्रतिशत बढ़ गया.

क्या करेंगे नीतीश कुमार

सुप्रियो ने कहा कि 2015 के चुनाव के ठीक पहले पीएम ने कहा था कि नीतीश कुमार के डीएनए में ही खोट है. मुख्यमंत्री के पद को लालच समझ बैठे नीतीश कुमार ने इसे खुद से नहीं जोड़कर पूरा बिहार से जोड़ दिया. उन्होंने कहा कि यह बिहार की अस्मिता पर हमला है. वहीं, नीतीश कुमार जब दोबारा भाजपा में शामिल हुए, तो उनका डीएनए में बदल गया. कभी भाजपा तो कभी लालू यादव के साथ जुड़ने वाले नीतीश कुमार को बताना चाहिए कि लोकसभा से पारित किसान विरोधी अध्यादेश का प्रभाव जब बिहार के किसान पड़ेगा, तो वे क्या करेंगे.

नाराज सहयोगी एनडीए का छोड़ रहे हैं साथ

सुप्रियो ने कहा कि जब एनडीए का गठन हुआ था, उस दौरान से दो प्रमुख सहयोगी पार्टी शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल का इनके साथ रहे हैं. 2014 को जब एनडीए को दोबारा सत्ता मिली, तो उसके बाद से दोनों पार्टियां खुद को असहज महसूस करने लगीं. क्योंकि जिस वादे के साथ एनडीए अपने सहयोगी दलों को साथ लेकर चलते थे, उस पर सीधा हमला 2019 में करना शुरू हुआ. आज जिस तरह से किसान विरोधी अध्यादेश को लोकसभा से पारित किया गया, तो उससे नाराज उनके सहयोगी शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने इस्तीफा तक दे दिया.

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अध्यादेश से किसानों के खेत तक कॉर्पोरेट घरानों की हुई पहुंच

जेएमएम नेता ने कहा कि भारत की रीढ़ की हड्डी देश के किसान और असंगठित क्षेत्र हैं. 17 सितंबर को जब लोकसभा से किसान विरोधी अध्यादेश पारित किया गया, उसके बाद से ही देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सीधे कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में चली गयी. सरकार द्वारा किसानों के हित में तय किये जाने वाली न्यूनतम समर्थन मूल्य को अब खत्म करने की तैयारी हो गयी है. किसानों के खेत से में उत्पन्न अनाजों तक कॉर्पोरेट घराने पहुंच गई है.

पीएम पूरा नहीं कर पाए वादा

इस दौरान जेएमएम नेता ने बिहार चुनाव में किये जा रहे चुनावी घोषणा पर भी प्रधानमंत्री को घेरा. उन्होंने कहा कि 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी पीएम ने बिहारवासियों को सवा लाख करोड़ आर्थिक पैकेज देने का वादा किया था. लेकिन यह वादा आज तक पूरा नहीं किया गया. एक बार फिर चुनावी मौसम देखते हुए पीएम ने चुनावी वादे तो किये, लेकिन इस बार यह वादा अभी तक केवल 1200 करोड़ रुपये की रही.

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