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सीजेआई रंजन गोगोई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई

देश के नये सीजेआई रंजन गोगोई को आज बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई. वे देश के 46 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे. 

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NewDelhi : देश के नये सीजेआई रंजन गोगोई को आज बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई. वे देश के 46 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे.  बता दें कि न्यायाधीश गोगोई इस पद पर पहुंचने वाले पूर्वोत्तर भारत के पहले मुख्य न्यायधीश हैं. उनका कार्यकाल 17 नंवबर, 2019 तक रहेगा. रिटायर हुए सीजेआई दीपक मिश्रा 21 साल तक जज रहे, जिसमें 14 साल वह उच्च न्यायालयों में जज रहे. वहीं न्यायाधीश गोगोई  भी लगभग 18 सालों से जज के पद पर आसीन रहे हैं. उन्होंने 2001 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में जज के रूप में पदभार संभाला था और 2012 से वह सुप्रीम कोर्ट के जज हैं. न्यायाधीश रंजन गोगोई को भी पदभार संभालते ही कई चुनौतियां उनके सामने होंगी.

सीजेआई रंजन गोगोई के सामने  कामकाज की लंबी फेहरिस्त होगी. अयोध्या मंदिर विवाद इनमें सबसे ऊपर है. यह उनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती होगी. बता दें कि अयोध्या मामले में  28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच सुनवाई शुरू करने जा रही है. सीजेआई गोगोई तीन बेंच के लिए जजों की घोषणा करेंगे. यह मामला पिछले आठ वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित चल रहा है.

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 लगभग 3.30 करोड़ मामले कोर्ट में लंबित पड़े हैं

मौजूदा समय में लगभग 3.30 करोड़ मामले कोर्ट में लंबित पड़े हैं. लगभग एक दशक से न्यायपालिका में जजों के पद खाली हैं जिसकी वजह से मामले लंबित पड़े हैं. कॉलेजियम में सुधार और पारदर्शिता के लिए मेमोरेन्डम ऑफ प्रोसिजर (एमओपी) में बदलाव पर पिछले तीन वर्षों से सरकार और सुप्रीम कोर्ट में विवाद रहा है. एमओपी में विरोध के कारण ही देश भर के उच्च न्यायालयों में जजों के 40 फीसदी और सुप्रीम कोर्ट में 20 फीसदी पदों पर नियुक्ति नहीं हो पा रही है. मुख्य न्यायाधीश गोगोई इस संबंध में सरकार के साथ सहमति  बनानी होगी.  जान लें कि 2017-18 में न्यायायिक व्यवस्था के लिए सिर्फ 0.4 फीसदी का बजट मिला था.  यह भी मुख्य न्यायाधीश के समक्ष चुनौती होगी.

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दोनों जजों के पास वरिष्ठ वकीलों से भी कम संपत्ति

पिछले दिनों अटॉर्नी जनरल केके वेनुगोपाल ने जजों की सैलरी को तीन गुना करने की बात की थी,  तब उनके  दिमाग में सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा घोषित संपत्तियां रही होंगी.  विशेषकर पूर्व सीजेआइ्र दीपक मिश्रा और आज शपथ लेनेवाले मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की संपत्ति रही होगी. बता दें कि लंबे समय से उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट के जज रहने के बाद भी इन दोनों जजों के पास जो संपत्ति है वह वरिष्ठ वकीलों से कम है. अगर इन दोनों जजों की संपत्ति का आकलन करें तो वरिष्ठ वकीलों द्वारा हर दिन की जा रही कमाई से भी कम है. न्यायाधीश गोगोई के पास तो सोने के गहने के नाम पर एक अंगूठी भी नहीं है. उनकी पत्नी के पास वही गहने हैं जो उन्हें शादी के दौरान उनके मायके से मिले थे.  दीपक मिश्रा के पास दो सोने की अंगूठियां हैं जो वे अपनी उंगलियों में पहने रखते हैं. उनके पास एक चेन भी है.

दोनों जजों के पास आज तक अपनी कोई कार नहीं है.  दोनोंजजों के पास पिछले 20 सालों से आधिकारिक गाड़ियां हैं. वहीं दूसरी तरह कई उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के जजों के पास अपनी-अपनी गाड़ियां है. दोनों ही जज दूसरे जजों की तरह शेयर बाजार में भी पैसे नहीं लगाते हैं.

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दोनों जजों ने अपनी संपत्ति की घोषणा 2012 में की थी

न्यायाधीश गोगोई पर कोई कर्ज नहीं है.न ही कोई बिल बकाया है. जबकि दीपक मिश्रा पर 22.5 लाख के एक घर का कर्ज है.  उन्होंने मयूर विहार की कॉलोनी में खरीदे गये घर के एवज में कर्ज लिया है. उनका दूसरा घर कटक में है. वह उन्होंने जज बनने से काफी पहले ही ले लिया है. दोनों जजों ने अपनी संपत्तियों की घोषणा  2012 में की थी.  जीवन बीमा पॉलिसी की बात करें तो न्यायाधीश गोगोई और उनकी पत्नी के पास 30 लाख की जीवन बीमा पॉलिसी है. गुवाहाटी में  उन्होंने 1999 में घर खरीदा था. उसे जून में 65 लाख में बेचा जिसकी जानकारी भी उन्होंने संपत्ति की घोषणा करते हुए कर दी है.

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