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माकपा के अखबार दैनिक देशार कथा को बंद करने का आदेश, माकपा भाजपा पर हुई हमलावर

त्रिपुरा में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का 40 वर्ष पुराना अखबार दैनिक देशार कथा बंद कर दिये जाने से राजनीतिक घमासान मचा हुआ है.

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 NewDelhi : त्रिपुरा में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का 40 वर्ष पुराना अखबार दैनिक देशार कथा बंद कर दिये जाने से राजनीतिक घमासान मचा हुआ है. बता दें कि जिलाधिकारी और आयुक्त संदीप महात्मे ने 12 सितम्बर से एक अक्टूबर के बीच चार सुनवाई के बाद सोमवार रात अखबार का प्रकाशन बंद करने का आदेश जारी कर दिया. अखबार का प्रकाशन 1978 से हो रहा था. खबरों के अनुसार तकनीकी आधार पर अखबार को बंद करने का आदेश दिया गया है. अखबार  बंद किये जाने से मार्क्‍सवादी आगबबूला हो रहे हैं. माकपा ने  मंगलवार को राज्य की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट ने प्रबंधन के बदलाव में विसंगति का आरोप लगाते हुए बांग्ला दैनिक को बंद करने का आदेश दिया है.

अखबार पर की गयी कार्रवाई को भारतीय मीडिया के लिए काला दिवस बताते हुए दास ने कहा कि 1975-77 में आपातकाल के दौरान भी किसी भी अखबार को जबरदस्ती बंद नहीं किया गया था.  कहा कि भाजपा के आदेश पर, डीएम ने  अलोकतांत्रिक व अवैध कार्य किया है. डीएम ने न्यायिक प्रक्रिया का भी उल्लंघन किया.

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 अखबार का प्रबंधन उचित मंच पर न्याय की मांग करेगा

उन्होंने कहा कि अखबार का प्रबंधन जल्द ही उचित मंच पर न्याय की मांग करेगा. उन्होंने कहा कि अब 200 पत्रकार व गैर-पत्रकार बेरोजगार हो जायेंगे.  इस संबंध में माकपा नेता व अखबार के संस्थापक गौतम दास ने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने ‘जिलाधिकारी पर अवैध कार्य करने के लंए दबाव डाला. कहा कि अखबार राज्य सरकार के कुशासन और अलोकतांत्रिक रुख की आलोचना करता रहा था.  दास के अनुसार मार्च में भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन सरकार सत्ता में आयी. उसके बाद से वाम नेताओं व कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं.   कहा कि दैनिक देशार कथा का प्रसार 45,000 प्रतिदिन है. अखबार बंद होने से 1000 वेंडर व हॉकर बेरोजगार हो जायेंगे.  पूर्व में अखबार का वास्तविक मालिकाना हक माकपा के पास था. 2012 में, इसका मालिकाना हक एक पंजीकृत सोसाइटी को मिल गया. बता दें कि पिछले माह इसे नवगठित ट्रस्ट को स्थानांतरित कर दिया गया था. दास ने आरोप लगाया कि सभी जरूरी प्रक्रियाओं को अपनाया गया. जिला मजिस्ट्रेट के जरिए रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स को इसकी सूचना दी गयी.

जिलाधिकारी की कार्रवाई में कोई हाथ नहीं : भाजपा प्रवक्ता मृणाल कांति देब ने सफाई देते हुए कहा कि जिलाधिकारी की कार्रवाई में भाजपा का कोई हाथ नहीं है. देब ने पत्रकारों से कहा कि माकपा ने प्रबंधन के बारे में तथ्य छिपाया उन्होंने लोगों को धोखा दिया है. जिलाधिकारी ने अखबार के प्रबंधन के अवैध कार्यो को रोक दिया है. दिल्ली में जारी माकपा के बयान के अनुसार, यह प्रेस की स्वतंत्रता पर खुलेआम हमला है. यह काफी दुखद दिन है.   देशार कथा ने दो अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन से अपना प्रकाशन बंद कर दिया है.

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