
Sanktodia : कोल इंडिया में मेडिकल अटेंड रुल 40 वर्ष पुराना है, जिसमें कर्मचारी अब बदलाव चाहते हैं. लेकिन इसके लिए कर्मचारियों को लंबे समय से सिर्फ इंतजार ही करना पड़ रहा है.
कोयलाकर्मियों को कहना है कि अगर पुराने मेडिकल अटेंडेंट मेडिकल रुल में बदलाव होता है तो इसका कई स्तर पर लाभ मिलेगा. 25 साल के बजाय 30 साल तक के बच्चों को डिपेंडेंट (आश्रित) मानकर इलाज की सुविधा मिलेगी. दिव्यांग बच्चों को भी ताउम्र उपचार की सुविधा मिल सकेगी. इसमें उपचार के लिए कर्मियों को स्मार्टकार्ड उपलब्ध कराने की योजना है.
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63 हजार कर्मियों को मिलेगा लाभ
यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर नया मेडिकल अटेंडेंट रुल लागू किया जाता है तो इसका लाभ इसीएल के 63 हजार कोयला कर्मियों को भी मिलेगा.
बीते दिनों कोल इंडिया मुख्यालय में मेडिकल अटेंडेंट रुल में बदलाव को भी लेकर चर्चा हुई थी, जिसमें कहा गया है कि इसका ड्रॉफ्ट तैयार करके सभी कंपनियों को भेजा जायेगा. अगली बैठक में इस पर निर्णय की संभावना है.
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पहले भी बदलाव पर बनी है सहमति
इससे पहले भी मेडिकल अटेंडेंट रूल में बदलाव को लेकर सहमति बन चुकी थी. लेकिन इसे अमल में नहीं लाया सका है. बैठक में सहमति बनी है कि अस्पतालों में दवा की उपलब्धता पर जोर दिया जायेगा ताकि री-इंबर्स कम हो सके. सभी कंपनियां में ऑनलाइन सिस्टम लागू करने तथा सेम डे पर मजदूरों का रेफर कैशलेस करने पर भी सहमति है.
कोल इंडिया में वेलफेयर बोर्ड, अपेक्स जेसीसी की मीटिंग के बाद अब जेबीसीसीआई स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की बैठक 26 जुलाई को होगी. जिसके लिए एजेंडा भी तय कर दिया गया है.
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