
Ranchi : ऱाष्ट्रीय आदिवासी धर्म समन्वय समिति ने राज्य सरकार के उस निर्णय का स्वागत किया है जिसमें आदिवासी/सरना धर्मकोड के संबंध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजने की बात कही गयी है.
समिति के समन्वयक देवकुमार धान, गीताश्री उरांव और प्रेमशाही मुंडा ने 11 नवंबर को राज्य के आदिवासी प्रत्येक पंचायत, प्रखंड और जिला मुख्यालय में जुलूस निकाल कर जश्न मनाने की अपील की.
शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान समिति के नेताओं ने कहा कि धर्मकोड के मुद्दे पर दूसरे संगठनों को भी अपनी जिद छोड़कर एक मंच पर आना चाहिए. देवकुमार धान ने कहा कि आजादी से पहले अंग्रेजों के समय से ही जनगणना में आदिवासियों को पृथक पहचान मिलती रही है.
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आजादी के बाद जनगणना कॉलम से आदिवासियों को हटा दिया गया. देखा जाये तो हम कोई नयी मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि पहले हमें जो अधिकार मिला था हम उसी को वापस मांग रहे हैं.
पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि लंबे समय से आदिवासी समुदाय अपना अधिकार मांग रहा है. कुछ समय पहले तक अन्य क़ॉलम में आदिवासी अपना धर्म को दर्ज करते थे.
अब वह कॉलम भी हटा लिया गया है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार के पास अलग धर्मकोड के लिए सौ से अधिक आवेदन केंद्र सरकार के पास पहुंचे हैं और हर किसी को अलग धर्मकोड नहीं दिया जा सकता.
सरना धर्मकोड की मांग को पहले भी खारिज किया जा चुका है. जबकि आदिवासी धर्मकोड के बैनर तले पूरे देश के आदिवासी समुदाय समाहित हो सकते हैं.
प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि हम सरना धर्मकोड की वकालत करनेवाले डॉ करमा उरांव और धर्मगुरू बंध तिग्गा से अपील करते हैं कि हम सभी एकजुट हों. धर्मकोड देश के आदिवासियों का बड़ा सपना है, जो साकार होनेवाला है.
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