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CM ने कहा- केंद्र की तरह हम भी ताकत लगा दें तो मचेगा हाहाकार, रघुवर बोले- जिम्मेदारी से भाग रहे हेमंत

  • उपचुनाव: वर्तमान और पूर्व सीएम के बीच चले बयानों के तीर

Dumka/Ranchi : दुमका उपचुनाव को लेकर क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर दोहराया है कि राज्य में गठबंधन की सरकार झारखंडी जनता की सरकार है. यह सरकार राज्यवासियों के हक के लिए लड़ रही है.  अपने छोटे भाई और जेएमएम प्रत्याशी बसंत सोरेन के लिए चुनावी अभियान को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि झारखंडी ने भी कभी अपने हक-अधिकार से समझौता नहीं किया है, न कभी करेगा. पूर्ववर्ती बीजेपी सरकारों ने अपने मतलब के लिए झारखंड की अस्मिता को तार-तार किया. ऐसे में इस बार दुमका की जनता फिर से तीर-कमान पर एक-एक वोट युवा बसंत सोरेन को दे ताकि झारखंडी सरकार राज्य की मजबूती के लिए काम कर सके.

चुनावी अभियान में जेएमएम नेता ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि हमारे संवैधानिक अधिकार का हनन करते मोदी सरकार ने बिना अनुमति राज्य का 1400 करोड़ का फंड काट लिया. यह शायद आजाद भारत के इतिहास में पहला केस होगा. हेमंत सोरेन ने दो टूक में कहा कि इस मामले में राज्य सरकार राजनीतिक लड़ाई के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी लड़ने को तैयार है. हेमंत ने सियासी निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने जिस ताकत का इस्तेमाल किया है, अगर वही ताकत का उपयोग हमलोग करेंगे तो पूरे देश में हाहाकार मच जायेगा.

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इरफान ने कहा- झारखंड के लोगों ने चूड़ी नहीं पहन रखी है

मौके पर उपस्थित कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी को आड़े हाथों लिया. उन्होंने केंद्र को चुनौती देते हुए कहा कि 9 नवंबर के बाद प्रदेश में आर्थिक नाकेबंदी होगी. झारखंड के लोगों ने हाथों में चूड़ी नहीं पहनी है. जरूरत पड़ी तो पानी पर नाकेबंदी करने में हम परहेज नहीं करेंगे.

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रघुवर का पलटवार

मुख्यमंत्री और कांग्रेसी विधायक के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा कि हेमंत सोरेन अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं. 2014 में हेमंत सोरेन से जब सत्ता मिली तो डीवीसी का 6000 करोड़ का बकाया था जिसे हमारी सरकार ने पिछले 5 साल में चुकाने का काम किया. गठबंधन सरकार राज्य की जनता को सिर्फ गुमराह करने का काम कर रही है. जनता सब समझ चुकी है.

आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने भी इस मुद्दे पर हेमंत सोरेन को घेरा. उन्होंने सवाल उठाया कि संघीय ढांचे में संवाद के साथ समन्वय भी जरूरी है, जिसे करने में राज्य सरकार चूक रही है. उन्होंने कहा कि सवाल तो यह बनता है कि जेएमएम-कांग्रेस के सांसदों ने इस मुद्दों पर कितने सवाल संसद में पूछे हैं.

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