
सौ प्रतिशत टीकाकरण पर अधिक बल दिया जाता है.
नवजात शिशुओं के जन्म और मृत्यु के लिये अलग से आंकड़ा तैयार होता है पंचायत में.
ड्रॉप आउटरेट जीरो, पहले भी पंचायत को मिल चुके हैं कई सम्मान.
Ranchi: पचांयत, मुखिया अगर चाहे तो अपने क्षेत्र को कई मायनों में संपन्न बना सकते है. वो भी बिना किसी सत्ता और प्रशासन के दबाव के. कुछ ऐसा ही काम हुआ है बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड के बुंडू पंचायत में.
राज्य में लगभग चार हजार पंचायत है. इनमें से मात्र बुंडू पंचायत ने पंचायती राज्य मंत्रालय भारत सरकार की ओर से जारी पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कारों में नौवां स्थान प्राप्त किया. यह पंचायत राज्य का एकमात्र पंचायत है जो पिछले कुछ सालों से लगातार राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार जीत चुका है.
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पंचायती राज्य मंत्रालय की ओर से बुंडू पंचायत को इस बार चाइल्ड फ्रेंडली पंचायत का दर्जा दिया गया है. इसके पहले साल 2017 में इस पंचायत को पंडित दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से सम्मानित किया गया.
पंचायत को राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री स्मार्ट विलेज योजना प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया. जिससे पंचायत को एक करोड़ रूपये की राशि मिली थी. मुखिया अजय सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि साल 2015 से ही वे पंचायत में समग्र विकास के लिये काम कर रहे है. पंचायत की रैंकिंग राष्ट्रीय स्तर पर और भी ऊपर होती अगर यहां आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय की व्यवस्था होती.
कौन सी बातों ने पंचायत को दिलाया यह सम्मान
अजय सिंह ने बताया कि ऐसे तो वो समग्र विकास पर काम करते हैं. और यह उनके और गांव वालों के प्रयास से संभव है. यूनिसेफ की ओर से इस पंचायत में सिर्फ स्वच्छता पर काम किया जाता है. अजय ने बताया की चाइल्ड फ्रेंडली सम्मान मिलना बड़ी बात है.

काम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पंचायत में संस्थागत प्रसव पर काफी बल दिया जाता है. इसके लिये आंगनबाड़ी बहनों से लेकर एएनएम तक की मॉनिटरिंग मुखिया खुद करते हैं. पंचायत में जन्म लेने वाले बच्चों का अलग से जन्म और मृत्यु के आंकड़े तैयार किये जाते हैं.
किस आंगनबाड़ी केंद्र में कितने गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीकाकरण दिया जाता है, इसकी सूची सुबह ही केंद्र की ओर से मुखिया को दी जाती है. टीकाकरण होने के बाद केंद्रों की ओर से फिर से सूची मुखिया को दी जाती. जिसमें जिन महिलाओं और बच्चों ने टीकाकरण न लिया हो, उनकी जानकारी एकत्र कर फिर से टीका देने की तैयारी की जाती है. इन्होंने बताया कि इनके पंचायत में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के सौ प्रतिशत टीकाकरण पर जोर दिया जाता है. बुंडू पंचायत में कुल सात पंचायत हैं.
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ड्रॉप आउट रेट जीरो
उन्होंने बताया की सिर्फ टीकाकरण ही नहीं. बच्चों को शत प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में भेजने पर भी बल दिया जाता है. इस पंचायत में कोई भी बच्चे ड्रॉप आउट नहीं करते. पंचायत में बाल विवाह, बाल तस्करी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी लेागों को जागरूक किया जाता है.
बच्चे शत प्रतिशत स्कूल जाये इसके लिये आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता है. जो संसाधन उपलब्ध है उसमें ही कैसे बच्चों को शिक्षित किया जाये ये जरूरी है.

अजय ने कहा कि बेहतर ग्रामसभा और बेहतर ग्रामीणों की उपस्थिति, स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक एवं उनकी उपस्थिति नियमित हो इस पर बल दिया जाता है. बात करते हुए अजय ने कहा की ट्रैफिकिंग के प्रति लोगों में जागरूकता इस हद तक है कि पिछले दिनों एक व्यक्ति को जेल भी भेजा गया.
सभी कैटेगरी में सफल होने पर मिला सम्मान
अजय ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से हर साल 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस मनाया जाता है. जिसमें देश भर में बेहतर काम करने वाले पंचायतों को सम्मानित किया जाता है. मंत्रालय की ओर से तय सभी कैटेगरी में बेहतर काम करने पर ही पंचायत का चयन हुआ.
कुछ और सुविधाएं होती तो पंचायत इससे भी बेहतर करता. बता दें चाइल्ड फ्रेंडली पंचायत का राष्ट्रीय पुरस्कार 2020 की कैटेगरी में इस साल पंचायती राज मंत्रालय की ओर से देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक-एक कर सम्मानित किया गया है. वही नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार से प्रदेश के गिरिडिह जिले के बिरनी प्रखंड के कपिलो पंचायत को सम्मानित किया गया है.
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