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धनबाद में बेखौफ चल रहे हैं काले शीशे लगे वाहन, प्रशासन नहीं कर रहा कोई कार्रवाई

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Dhanbad : धनबाद में काले शीशे लगे वाहनों का प्रयोग धड़ल्ले से जारी है. विधानसभा चुनाव से पहले जिले में शांतिपूर्ण मतदान कराने को लेकर जिला प्रशासन तैयरियों में जुट गया है.

लेकिन इन दिनों धनबाद में कई पार्टियों के नेता अपना रौब दिखाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा रहे हैं. नियम-कानून को ठेंगा दिखाकर अपने वाहनों के शीशे पर ब्लैक फिल्म या स्टीकर लगाना फैशन और स्टेटस सिंबल समझते हैं.

समाहरणालय से लेकर सड़कों तक इसकी बानगी देखी जा सकती है. बावजूद ऐसे वाहनों की धर-पकड़ या कार्रवाई धनबाद में नहीं की जा रही है.

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क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश

जिन वाहनों पर संबंधित निर्माता कंपनी के तय मानक के अनुसार काले शीशे लगे हैं, वही वैध हैं. अगर कोई व्यक्ति गाड़ी के शीशे पर अलग से ब्लैक फिल्म चढ़ाता है तो उसे किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी, बल्कि कार्रवाई होगी.

भले ही उसने तय लिमिट के अनुसार ही क्यों न ब्लैक फिल्म लगा रखी हो. जांच के दौरान किसी वाहन के शीशे पर अवैध काली फिल्म पकड़े जाने पर 100 रुपये जुर्माने के साथ वाहन जब्त कर फिल्म उतारने का प्रावधान है.

हमेशा संदेह के घेरे में रहती हैं काले शीशे वाली गाड़ियां  

वैसे तो काले शीशे के अंदर कई काले खेल होते हैं. और धनबाद जैसे संवेदनशील जगह पर गाड़ियों के शीशे पर काली फिल्म लगाना सवालों के घेरे में रहता है. फिर भी यातायात निरीक्षक द्वारा ऐसे वाहनों के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है.

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जबकि धनबाद के बरवाअड्डा और गोबिंदपुर थाना क्षेत्र में लगातार पुलिस ने शराब के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया था. इस मामले में अब तक जो बातें सामने आयी हैं, उसमें अवैध शराब को बिहार तक ठिकाने लगाने के लिए कारोबारी लक्जरी वाहनों का इस्तेमाल करते रहे हैं.

ऐसे वाहनों पर काली फिल्म लगी होती है. अपराधी व तस्कर पुलिस व खुफिया तंत्र को चकमा देने के उद्देश्य से अपने वाहनों पर काली फिल्मों का इस्तेमाल करते हैं.

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बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती है काली फिल्म

धनबाद के बैंक मोड़, पुराना बजार, मटकुरिया रोड में वाहनों के शीशे पर लगने वाली ब्लैक फिल्म या स्टिकर लगाने वाली दर्जनों दुकानें हैं. कार के शीशे पर फिल्म लगाने वाले दुकानदार बताते हैं कि एक कार के शीशे पर फिल्म चढ़ाने पर कम से कम 1500 से 2000 हजार रुपये तक का खर्च आता है.

हालांकि बाजार में तीन हजार या उससे अधिक कीमत वाली फिल्में भी बिकती हैं. लोगों की जरूरत के हिसाब से फिल्में लगायी जाती हैं. गाड़ियों में काला शीशा लगाने के जो मानक तय किये गये हैं उसके अनुसार गाड़ियों में ऐसे शीशे लगे होने चाहिए कि उसमें बैठे लोगों को आसानी से देखा जा सके. लेकिन यहां इन नियमों को ताक पर रखकर लोग अपने वाहनों पर धड़ल्ले से काली फिल्मों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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नहीं मिला है कार्रवाई का आदेश: ट्रैफिक इंस्पेक्टर

इस संबंध में ट्रैफिक इंस्पेक्टर से बात करने पर उन्होंने कहा कि वाहनों में काला शीशा लगाने वालों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है. लेकिन फिलहाल इस संबंध में अब तक वरीय अधिकारियों की ओर से कोई आदेश नहीं आया है. आदेश मिलते ही कार्रवाई शुरू की जायेगी.

जब कानून बन गया है तो आदेश की क्या जरूरत: डीटीओ 

इस बारे में जब डीटीओ ओमप्रकाश यादव से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वाहनों में काला शीशा लगाना गैर कानूनी है. इसके लिए कानून बना हुआ है, ऐसे में अलग से आदेश की क्या जरूरत है. अधिकारी कानून के हिसाब से काम करें.

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