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भाजपा का लेखा जोखाः घर लौटे बाबूलाल, केंद्रीय टीम में बढ़ी प्रदेश भाजपा की धमक

  • विधानसभा के उपचुनावों में दो सीटों पर पार्टी को मिली हार

Ranchi: साल 2020 प्रदेश भाजपा के लिहाज से बहुत सुकून भरा नहीं रहा. सिवाय इसके कि राज्य के पहले सीएम औऱ दिग्गज नेता बाबूलाल मरांडी पार्टी में वापस लौटे. दीपक प्रकाश राज्यसभा सांसद बने. भाजपा की केंद्रीय टीम में झारखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ा. पूर्व सीएम रघुवर दास को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया.

पिछले साल दिसंबर में सत्ता से बाहर होने के साथ ही प्रदेश भाजपा के सामने चुनौतियों का दौर शुरू हो गया. इसका असर इस साल दो सीटों के लिये हुए उपचुनाव तक दिखा जहां पार्टी को एक भी सीट हाथ नहीं लगी.

बाबूलाल की घर वापसी

पूर्व सीएम और झारखंड विकास मोर्चा के प्रमुख रहे बाबूलाल मरांडी अंततः भाजपा में 14 वर्षों बाद वापस लौट आये. पार्टी का विलय भी भाजपा में कर लिया. रांची में गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में 17 फरवरी को मिलन समारोह में घर वापसी की.

बीजेपी में शामिल होने के बाद मरांडी ने कहा कि उन्हें पद की लालसा नहीं है. वे पार्टी के लिए झाड़ू लगाने को भी तैयार हैं. अमित शाह ने कहा कि 2014 में जब वे बीजेपी के अध्यक्ष थे, तभी से चाहते थे कि बाबूलाल मरांडी बीजेपी में आएं.

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दीपक प्रकाश बने राज्यसभा सांसद

दीपक प्रकाश को प्रदेश भाजपा की कमान दी गयी. इसके अलावे पार्टी ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में भी कैंडिडेट बनाया. चुनाव में पार्टी को अपने पुराने सहयोगी आजसू पार्टी का भी साथ मिला.  विधानसभा चुनाव के समय दोनों दल एक दूसरे से मुंह फुलाये बैठे रहे थे और इसका खामियाजा उठाना पड़ा था. पर राज्यसभा चुनाव में एक दूसरे के संग खड़े होने का लाभ मिला.

दीपक राज्यसभा में पहुंचने में कामयाब हुए. भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी टीम में झारखंड का कोटा और बढ़ाया. पूर्व सीएम रघुवर दास औऱ सांसद अन्नपूर्णा देवी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बिठाया. राज्यसभा सांसद समीर उरांव को पार्टी के राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रमुख बनाया गया.

विधानसभा उपचुनाव ने किया बेरंग

हेमंस सोरेन ने विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत के बाद दुमका सीट खाली कर दी थी. बेरमो के विधायक राजेंद्र सिंह का असामयिक निधन हो गया था. चुनाव आयोग ने दोनों सीटों के लिये उपचुनाव कराये. दुमका में पूर्व मंत्री लुईस मरांडी को और बेरमो में पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बाटुल को चुनावी मैदान में खड़ा किया.

आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश महतो के साथ पूरी भाजपा टीम ने मैदान संभाली. बाबूलाल मरांडी, रघुवर दास जैसे दिग्गज भी मोर्चा पर लगे पर एक भी सीट हाथ नहीं लगी. इस तरह से विधानसभा चुनाव में हार का जख्म औऱ टीस उपचुनाव में भी बनी रही.

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महफिल में नहीं जमे सुखदेव भगत

विधानसभा चुनाव से ऐन पहले पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत भाजपा में आये. पार्टी ने उन पर भरोसा जमाया औऱ लोहरदगा की सीट पर लड़ने का मौका दिया.

पर हार के बाद भगत पार्टी की बैठकों से दूर ही नजर आये. पार्टी ने उन्हें किसी पद के लिये कोई जवाबदेही भी नहीं दी थी. इसके बाद पार्टी ने सुखदेव मामले में एक्शन लेते हुए उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया.

वर्चुअल से रियल तक विरोध

कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन के दौरान दिल्ली से झारखंड लौटे पार्टी के दो सांसदों के मामले पर विपक्षी दलों ने हो हंगामा किया. सांसद संजय सेठ और पी.एन सिंह के मामले को लेकर गहमागहमी रही. वैसे पार्टी के मुताबिक दोनों ने इस मामले में समुचित प्रावधानों का पालन किया था.

कोरोना काल में पार्टी ने लगभग 5 लाख मोदी आहार और 70 हजार मोदी किट बांटने में मेहनत की. अपने स्तर से श्रमिकों को लाने का भी प्रयास किया. बाकी हेमंत सोरेन सरकार पर वादाखिलाफी को लेकर वर्चुअल से लेकर पंचायतों तक में पार्टी की ओर से विरोध कार्यक्रम जारी है.

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