
Ranchi: झारखंड फाइनेंशियल क्राइसेस से गुजर रहा है. सरकारी खजाने में पैसे किल्लत हो गई है. वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, पैसे की किल्लत या फिर तकनीकी पेंच भी बताया जा रहा है. कई देनदारी और नई जीएसटी का भी असर भी कहीं न कहीं सरकारी खजाने पर पड़ा है. अगर पेंशन की बात हो तो 15 नवंबर 2011 से अब तक पेंशन में 36 अरब रुपये का भुगतान हो चुका है. फैमिली पेंशन के रूप में एक अरब 50 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है.
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300 गजेटेड अफसरों का रिटायरमेंट बेनीफिट लंबित
वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 300 गजेटेड अफसरों का रिटायरमेंट बेनीफिट लंबित है. इसमें चार आईएफएस और एक आईपीएस भी शामिल हैं. अधिकांश अफसर राज्य प्रशासनिक सेवा और सचिवालय सेवा के हैं. ये सभी विभाग का चक्कर काट रहे हैं. विभाग में इन्हें तकनीकी पेंच के कारण विलंब बताया जा रहा है. लेकिन हकीकत कुछ और ही है.
पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के कार्यकाल में भी बनी थी यही स्थिति
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में भी यही स्थिति बनी थी. इस समय भी सरकारी खजाने खाली हो गये थे. यहां तक की मुख्यमंत्री राहत कोष में एक फूटी कौड़ी भी नहीं थी. फिर इसके बाद मुख्यमंत्री राहत कोष में येन-केन-प्रकारेण राशि जमा की गई. फिलहाल मुख्यमंत्री राहत कोष में राशि तो है, लेकिन सरकारी खजाने में देनदारी के कारण राशि की किल्लत हो गई है. इस कारण कहीं न कहीं ट्रेजरी भी रोक लगा रही है.
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क्या कहता है नियम
जो भी अफसर या कर्मचारी रिटायर होने वाले होते हैं, उन्हें रिटायरमेंट से छह माह पहले रिटायरमेंट बेनीफिट से संबंधित सभी कागजात जमा करना होता है. नियमत: रिटायरमेंट से पहले सभी प्रक्रिया पूरी कर ली जानी है. रिटायरमेंट के दिन ही पेंशन सहित अन्य लाभ दिया जाना अनिवार्य है. पेंशन रोकने के लिये यह बहाना नहीं बनाया जा सकता कि पैसा नहीं है. सरकार का दावा है कि सभी को समय पर पेंशन व अन्य लाभ मिल जाता है.




