
- जिन्होंने पांच साल काम किया और करवाया, उसी से तैयार कराया रिपोर्ट, कोई अपनी गलती नहीं बताता
Ranchi: हेमंत सोरेन की सरकार बनते ही लगातार झामुमो और कांग्रेस ने वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल खड़ा किया गया था. इसको देखते हुए सरयू राय ने सलाह दी थी कि, अगर वाकई वित्तीय स्थिति खराब है तो श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए.
सरकार ने सलाह मानते हुए श्वेत पत्र जारी करने की बात कही थी. सोमवार को विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने श्वेत पत्र जारी किया है. पर, श्वेत पत्र जारी होते ही सुझाव देने वाले सरयू राय ने इसपर सवाल खड़ा कर दिया है.
सरयू राय ने कहा कि जिन अधिकारियों ने पांच साल काम किया और जिनके द्वारा काम कराया गया. उन्हीं के जिम्मे अगर श्वेत पत्र जारी करने की जिम्मेवारी हो तो कोई अपनी गलती कभी नहीं बताता. इसके लिए तटस्थ लोगों की एक समिति बनायी जानी चाहिए थी. समिति विश्लेषण कर रिपोर्ट सरकार के पास रखती, उसी के आधार पर श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए था.
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श्वेत पत्र में कई चीजों का उल्लेख नहीं – सरयू राय
सरयू राय ने कहा कि श्वेत पत्र में कई चीजों का उल्लेख नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने कितना ऋण लिया, कैसे खर्च किया यह बताना चाहिए था. पिछली सरकार का कितना बजट था उसको कैसे खर्च किया. सरयू राय ने कहा कि अगर सही से किया जाता, तो वित्तीय और भौतिक दोनों तरह की चीजें सामने आतीं.
श्वेत पत्र में सिर्फ वित्तीय स्थिति को रखा है, भौतिक स्थिति क्या है यह बताया नहीं गया. वित्तीय निधि की योजनाओं का प्रतिफल क्या हुआ यह बताना चाहिए था. अभी भी देर नहीं हुआ है, सरकार को समीक्षा कराकर राज्य की वित्तीय स्थिति कैसे सही होगी. विकास की अवधारणा क्या होगी, इसके आलोक में सुझाव भी आएंगे और पहले के कारनामे भी सामने आएंगे.
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बजट पेश होने के बाद ही कुछ बोल पायेंगे – सरयू
सरयू राय ने कहा कि नई सरकार का बजट पहले की बजट से कैसे भिन्न होता है, यह तो देखने से ही पता चलेगा. पिछले पांच सालों में जो बजट पेश किये गये वो अपने संसाधानों से बहुत ज्यादा बताकर पेश किये गये. इसका नतीजा है कि साल में पैसा खर्च नहीं हो पाता है कटौती होती है योजनाओं में.
अगर यह वास्तविक बजट होगा तो बताना होगा कि राज्य की संसाधन क्षमता वास्तव में कितनी है, हम कैसे इसका उपयोग करेंगे और कैसे बढ़ाएंगे. ऐसा होगा तो बजट सही होगा. सिर्फ दिखाने के लिए हमने पहले जैसा 10 प्रतिशत बड़ा बजट बना दिया, तो अपने साथ तो धोखा होगा साथ ही राज्य की जनता के साथ भी धोखा होगा.
जिससे जनता को फर्क नहीं पड़ता उन योजनाओं को बंद करना चाहिए- सरयू
रघुवर दास की सरकार की कुछ ऐसी योजनाओं को बंद किये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिनको समाप्त करने से राज्य की जनता पर कुछ प्रतिकुल प्रभाव नहीं पड़ता है. और आर्थिक स्थिति सुधरता है, उसके बारे में सरकार को जरुर को निर्णय लेना चाहिए. राज्य की प्राथमिकताओं को बदलना सरकार पर ही होता है.
उन्होंने कहा कि सरकार तो बताती है कि हम ऋण ले रहे हैं और जरुरत क्या है इसकी. बहुत तरह के ऋण होते हैं. ऋण भी अपनी औकात के भीतर लेना चाहिए. सरकार को यह तय करना होगा कि अभी हमारी जो स्थिति है. हम अगले साल कितना विकास करना चाहते हैं. अगर हम ऋण लेकर इस विधानसभा जैसे बड़े-बड़े भवन बना देते हैं, तो जनता का हित तो सधता नहीं है. इस ऋण का उपयोग क्या होगा, यह सरकार को बताना चाहिए.
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