
Akshay Kumar Jha
Ranchi: 81 विधानसभा सीटों वाली झारखंड में बीजेपी ने 52 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. हालांकि घोषणा के बाद जहां कुछ सीटों पर उम्मीदवार पर सस्पेंस खत्म हुआ है, तो वहीं कुछ सीटों पर सस्पेंस बढ़ गया है. उनमें में सबसे चर्चित सीट बोकारो और पश्चिमी जमशेदपुर है. ऐसा कहा जा रहा है कि बोकारो के मौजूदा विधायक बिरंची नारायण का एक वीडियो वायरल होने के बाद इस सीट पर उम्मीदवार का नाम बीजेपी ने घोषणा नहीं की.
वहीं पश्चिमी जमशेदपुर के बारे किसी तरह के कयास लगा पाना मुश्किल हो रहा है. आजसू से गठबंधन क्लियर नहीं होने से भी कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के नाम रोके गए हैं. जिन 52 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा हुई है. उनमें से 10 ऐसे उम्मीदवार थे. जो मौजूदा विधायक हैं. हालांकि झरिया के विधायक संजीव सिंह का नाम काट कर उन्हीं की पत्नी रागिनी सिंह को बीजेपी ने टिकट दिया है.
उनके अलावा बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष ताला मरांडी, लक्ष्मण टुडू और विमला प्रधान जो हाईकोर भाजपायी हैं और साथ में सीटिंग एमएलए भी. उनका नाम लिस्ट में नहीं है.
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जानें वैसे सभी सीटिंग एमएलए का प्रोफाइल, जिन्हें 2019 के विधानसभा में टिकट नहीं दिया गया है
ताला मरांडीः ताला मरांडी को हार्डकोर भाजपायी की श्रेणी में रखा जाता है. हालांकि वो कांग्रेस से बीजेपी में आए हैं. साल 2000 में संयुक्त बिहार के समय में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बोरियो से चुनाव लड़ा था और 6679 वोट से जेएमएम के उम्मीदवार लोबिन हेम्ब्रम से हार गए थे. लेकिन इसके बाद उन्होंने लगातार 2005, 2009, 2014 में तीन बार बीजेपी से चुनाव लड़ा.
2015 में उन्हें प्रदेश बीजेपी की तरफ से अध्यक्ष भी बनाया गया. 2005 में उन्होंने जेएमएम के लोबिन हेम्ब्रम को 6319 वोट से हराया. लेकिन 2009 में वो उन्हीं से 9040 वोट से हार गए. लेकिन 2014 में 712 के कम अंतर से ही सही, लेकिन जीत दर्ज की. आखिर में 2019 में उन्हें टिकट ही नहीं दिया गया.
विमला प्रधानः सिमडेगा की मौजूदा विधायक विमला प्रधान को भी हार्डकोर भाजपायी की गिनती में रखा जाता है. उन्होंने दो बार चुनाव लड़ा. दोनों बार बीजेपी के टिकट पर लड़ते हुए उन्होंने जीत दर्ज की. 2014-2019 के विधानसभा सत्र में उन्हें एक बार अत्कृष्ट विधायक की उपाधी से नवाजा गया. 2009 में उन्होंने जेएमएम पार्टी के निलय तिर्की को 1113 से हराया, वहीं 2014 में उन्होंने झारखंड पार्टी के मेनन एक्का को 3194 वोट से हराया.
लक्ष्मण टुडूः तीसरे नंबर के हार्डकोर भाजपायी कहलाने वाले नेताओं में से एक हैं लक्ष्मण टुडू. उन्होंने अपनी चुनावी पारी घाटशिला और सरायकेला दोनों विधानसभा सीटों से खेला. सीट कोई भी हो उन्होंने बीजेपी के टिकट पर ही चुनाव लड़ा.
2005 में घाटशिला से चुनाव लड़ते मात्र 882 वोटों से जेएमएम के उम्मीदवार चंपई सोरेन से हार गए. लेकिन दूसरी बार 2009 में उन्होंने जेएमएम के उम्मीदवार रामदास सोरेन को 6403 वोटों से हराया. फिर से घाटशिला से उन्होंने जेएमएम के उम्मीदवार रामदास सोरेन को 6403. दो बार लगातार जीत के बावजूद इस बार पार्टी ने उनपर भरोसा नहीं जताया.
गणेश गंझूः गणेश गंझू चुनावी मौसम को देखते हुए पार्टियां बदल लेने वाले नेताओं में से एक है. सिमरिया विधानसभा सीट से अपनी दो बार की चुनावी पारी में एक बार जीत दर्ज की. 2009 में वो जेएमएम से लड़ते हुए जेवीएम के उम्मीदवार जय प्रकाश भोक्ता से 8025 वोटों से चुनाव हारे तो दूसरी बार 2014 में उन्होंने जेवीएम से चुनाव लड़ते हुए बीजेपी के सुजीत कुमार भारती को 15640 वोटों से हाराया.
लेकिन सरकार बनने की प्रक्रिया में वो अपने पांच जेवीएम के विधायक साथियों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए. एक तरह से देखा जाए तो ऐसा करने की वजह से उन्हें कोई खास फायदा नहीं हुआ. सरकार में उन्हें किसी महत्वपूर्ण पद पर नहीं रखा गया. और भरोसे के बाद भी उन्हें पार्टी की तरफ से टिकट नहीं मिला.
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जयप्रकाश भोक्ताः सिमरिया से जय प्रकाश भोक्ता 2009 में जेवीएम से चुनाव लड़े और विधायक बने. उन्होंने जेएमएम से लड़ रहे गणेश गंझू को 8025 वोटों से हराया था. लेकिन 2014 में उन्होंने पार्टी बदली और बीजेपी में शामिल हो गए. उन्होंने जेवीएम के सत्यानंद भोक्ता को 20576 वोटों से हराया. लेकिन 2019 में बीजेपी ने टिकट नहीं दिया. वो किसी दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं.
फूलचंद मंडलः फूलचंद मंडल जेवीएम और बीजेपी से चुनावी पारी खेलते रहे हैं. लेकिन पार्टी में किसी खास पद पर नहीं रहे. सिंदरी से दो बार चुनाव लड़ा और जीता. 2009 में पहली बार जेवीएम से चुनाव लड़ते हुए और 2014 में बीजेपी से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने वाम दल के आनंद महतो को हराया. लेकिन इस बार वो क्या करेंगे क्लियर नहीं है. बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया है.
शिव शंकर उरांवः गुमला विधानसभा सीट से शिव शंकर उरांव ने 2014 में एक ही बार चुनाव लड़ा. बीजेपी ने उनपर भरोसा जताया. उन्होंने जेएमएम के भूषण तिर्की को 4032 वोट से हराया. लेकिन इस बार पार्टी को समझाने में कामयाब नहीं हो पाए. बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया.
राधा कृष्ण किशोरः बीजेपी सरकार में मंत्री पद ना मिलने का मलाल इन्हें पहले से ही था. लेकिन इनका टिकट कट जाएगा ऐसा किसी ने सोचा नहीं था. कांग्रेस से जदयू. फिर जदयू से कांग्रेस और फिर बीजेपी में आए राधा कृष्ण किशोर छतरपुर विधानसभा की राजनीति करते हैं. इन्होंने 2000 में संयुक्त बिहार के वक्त कांग्रेस से चुनाव लड़ा.
तीसरे नंबर पर थे. लेकिन जदयू से 2005 में लड़ते हुए इन्होंने राजद की पुष्पा देवी को 16433 वोटों से हराया. इसे राजनीति की तकदीर ही कहेंगे, इसी पुष्पा देवी को 2019 के चुनाव में बीजेपी ने छतरपुर से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया है. 2009 में श्री किशोर कांग्रेस से चुनाव लड़े और तीसरे नंबर पर रहे. लेकिन 2014 में बीजेपी से चुनाव लड़ते हुए इन्होंने राजद के मनोज कुमार को 5881 वोटों से हराया.
हरेकृष्ण सिंहः मनिका से इन्होंने दो बार चुनाव लड़ा. दोनों बार बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ते हुए इन्होंने जीत दर्ज की. 2009 में कांग्रेस के रामेश्वर उरांव को 1769 वोट से हराया तो 2014 में राजद के रामचंद्र सिंह को 1083 वोटों से हराया. लेकिन फिर भी बीजेपी ने इनका टिकट काट कर एक नए चेहरे रघुपाल सिंह को टिकट दिया है.
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