
Naveen Sharma
Ranchi : आमिर खान (Aamir Khan) ‘कयामत से कयामत तक’ फिल्म करने से पहले ही रीना दत्ता के प्यार में गिरफ्त थे. आमिर की दीवानगी इस हद तक बढ़ गई थी कि एक बार तो उन्होंने रीना को अपने खून से चिट्ठी तक लिख दी थी. आमिर के इस कदम के बाद रीना ने उन्हें दोबारा ऐसा न करने के लिए भी कहा था. आमिर और रीना का धर्म अलग था जिसकी वजह से शादी में काफी दिक्कतें आई थीं. इन सभी दिक्कतों का सामना करते हुए आमिर और रीना ने साल 1986 में शादी कर ली थी.
ऐसा कहा जाता है प्रीति जिंटा के चलते रीना आमिर से अलग भी रहने लगीं थीं. बाद में प्रीति ने आमिर के साथ अपने अफेयर को नकार दिया. इसके बाद आमिर और रीना के बीच सब ठीक तो हो गया लेकिन इसके कुछ वक्त बाद ही आमिर का नाम किरण राव के साथ जोड़ा जाने लगा.
किरण के साथ आमिर ने अपने रिश्ते को छुपाया नहीं और उनसे शादी करने का फैसला भी कर लिया. आमिर ने किरण राव के लिए रीना को तलाक दे दिया. इस तलाक के लिए उन्हें रीना को तकरीबन 50 करोड़ देने पड़े.
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LAGAAN में काम करने से पहले कर दिया था इन्कार

बॉलीवुड में मिस्टर परफेक्सनिस्ट के नाम से मशहूर आमिर खान को यह पहचान जिस फिल्म की वजह से मिली वो फिल्म थी लगान (LAGAAN), लेकिन मजेदार बात यह है कि आमिर ने पहले ना दिया था. फिल्म निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने पहली बार लगान की स्क्रिप्ट आमिर को सुनाई तो उन्हें ये पसंद नहीं आयी थी. इसके बाद पांच महीने बाद उन्होंने फिर आमिर को स्क्रिप्ट सुनाई तो वे ना नहीं कह पाये. इसके बाद लगान जैसी बड़ी फिल्म के लिए बजट जुटाना सबसे बड़ी समस्या थी. ऐसे में आमिर खान ने खुद की कंपनी बना कर फिल्म को प्रोड्यूस किया .
इस फिल्म का सेट गुजरात के भुज शहर में लगाया गया और लोकेशन को रियलस्टिक दिखाने की कोशिश की गई. 2001 में रिलीज हुई लगान साधारण सी लगने वाली कहानी पर बनी असाधारण फिल्म थी. इसे हिंदी सिनेमा की श्रेष्ठ फिल्मों में शामिल किया जाता है. लगान माफी के लिए अंग्रेजों से निपट देहाती लोग क्रिकेट मैच खेलते हैं और अविश्वसनीय ढंग से हौसले और मेहनत के बल पर जीत भी जाते हैं. इस फिल्म का संगीत, कास्टिंग व ट्रिटमेंट लाजवाब था. यह फिल्म आस्कर पुरस्कार समारोह में भी भारत की तरफ से भेजी गई थी.
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पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा

आमिर खान का नाम लेते ही फिल्म कयामत से कयामत तक का गाना पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा बेटा हमारा ऐसा काम करेगा याद आता है. इस गीत को फिल्म निर्माता ताहिर हुसैन के बेटे आमिर खान ने सार्थक कर दिखाया है. फिल्म इंडस्ट्री के तीन खान शाहरुख, आमिर और सलमान में भले ही शाहरुख खान ने ज्यादा नाम और पैसा कमाया हो. सलमान की फैन फोलोइंग भले ज्यादा रही हो पर अभिनय के मामले में तो आमिर ही नंबर वन हैं.
लगभग चार वर्ष तक मायानगरी मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1988 में अपने चाचा नासिर हुसैन के बैनर तले बनी फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ में आमिर खान और जूही चावला की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को एक नया मोड़ दिया. 80 के दशक में बकवास मसाला फिल्मों का दौर चल रहा था. कयामत से कयामत तक ने अपनी प्यारी सी लव स्टोरी के जादू से उस दौर के युवा को मदहोश कर दिया था. इसके बेहतरीन गीतों पापा कहते हैं, ऐ मेरे हमसफर और ने हिंदी सिनेमा में मधुर संगीत से सजी फिल्मों के दौर का फिर से आगाज किया.
इस फिल्म की सफलता से आमिर बतौर अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये. फिल्म में दमदार अभिनय के लिये उन्हें उस वर्ष नवोदित अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ.
फिल्मों से जुड़े परिवार में हुआ जन्म
आमिर का जन्म 14 मार्च, 1965 मुंबई में हुआ था. उनके पिता ताहिर हुसैन और चाचा नासिर हुसैन जाने माने फिल्म निमार्ता थे. घर में फिल्मी माहौल के कारण आमिर की रूचि भी फिल्मों में हो गयी और वह अभिनेता बनने का सपना देखने लगे. आमिर ने अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1973 में बतौर बाल कलाकार नासिर हुसैन के बैनर तले बनी फिल्म ‘यादों की बारात’ से की. बाद में उन्होंने वर्ष 1974 में प्रदर्शित फिल्म ‘मदहोश’ में भी बतौर बाल कलाकार काम किया. इसके बाद लगभग 11 वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री से किनारा कर लिया.
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पहली फिल्म होली रही बेरंग
1984 में प्रदर्शित फिल्म ‘होली’से आमिर खान ने बतौर अभिनेता सिने करियर की शुरूआत की, लेकिन वह दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने में असफल रहे.
अंदाज अपना अपना ‘ में आमिर का नया अंदाज
1994 में राजकुमार संतोषी निर्देशित फिल्म ‘अंदाज अपना अपना ‘ में आमिर खान के अभिनय का नया रंग देखने को मिला. इस फिल्म के पहले उनके बारे में यह बात की जाती थी कि वह केवल रूमानी भूमिका ही निभा सकते हैं लेकिन आमिर खान ने अभिनेता सलमान खान के साथ अपने हास्य अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. फिल्म में अपने बेहतरीन अभिनय के लिये वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिये नामांकित भी किये गये.
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‘राजा हिंदुस्तानी’ रही सुपर हिट
1994 में ही प्रदर्शित फिल्म ‘बाजी’ में उनके अभिनय का नया रूप देखने को मिला. रोचक बात है कि इस फिल्म के एक गाने में आमिर ने एक लड़की की भूमिका निभाई और इसके लिये उन्होंने अपने पूरे शरीर पर वैक्सिन का इस्तेमाल किया. वर्ष 1996 में आमिर खान के सिने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ प्रदर्शित हुई. यह फिल्म काफी सफल रही थी. इसमें करिश्मा और आमिर की जोड़ी को लोगों ने पसंद किया था. इस फिल्म में शशि कपूर की फिल्म जब जब फूल खिले का प्रभाव दिखाई देता है. फिल्म का गाना परदेशी परदेशी जाना नहीं खूब चला था.
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मिस्टर क्यूट से मिस्टर परफेक्शनिस्ट तक आमिर

1998 में आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘गुलाम’ प्रदर्शित हुई. इस फिल्म से ही उनका अलग अंदाज दिखाई देना शुरू हुआ था. वर्ष 2001 के बाद आमिर ने लगभग चार वर्ष तक फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बनायी रखी.
हर फिल्म में लुक पर विशेष ध्यान

वर्ष 2005 में आमिर ने मंगल पांडे से एक बार फिर से फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा. इसमें मंगल पांडे की भूमिका निभाने के लिए बाल बड़े किए. इसके साथ ही पात्र के अनुरूप बोली और चाल ढाल पर भी काम किया. आमिर ने हरियाणा की महिला पहलवानों फोगाट की कहानी पर बनी फिल्म दंगल में भी जबरदस्त अभिनय किया था. ये फिल्म काफी सफल रही थी. इसके लिए आमिर ने अपना वजन भी बढ़ा कर पहलवानों जैसा डीलडौल बनाया था.
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निर्देशन में भी हाथ आजमाया
वर्ष 2007 में आमिर ने फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और ‘तारे जमीन पर’ का निर्माण और निर्देशन किया. इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला.
वर्ष 2008 में आमिर के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म ‘गजनी’ प्रदर्शित हुई . इस फिल्म में आमिर खान के अभिनय के नये आयाम देखने को मिले. फिल्म से जुड़ा रोचक तथ्य है कि इस फिल्म के किरदार को निभाने के लिये आमिर ने अपने शरीर पर कड़ी मेहनत की और सिक्स पैक ऐब बनाया जो सिने दर्शकों को काफी पसंद भी आया.
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थ्री इडियट्स 200 करोड़ कमानेवाली पहली फिल्म
वर्ष 2009 में आमिर खान के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म ‘थ्री इडियटस’ प्रदर्शित हुई. इंजनीयरिंग कॉलेज के छात्रों के जीवन पर बनी फिल्म युवाओं में जबरदस्त लोकप्रिय हुई थी. टिकट खिड़की पर 202 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की. थ्री इडियट 200 करोड़ कमाने वाली पहली फिल्म थी. इसके बाद राजकुमार हिरानी ने आमिर को लेकर पीके फिल्म बनाई. इसमें धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड पर चोट की गई थी. इस फिल्म का कुछ कट्टर पंथियों ने विरोध किया था लेकिन उसका फायदा भी फिल्म को ही हुआ और पीके सुपर हिट रही.
लाजवाब सीरियल सत्यमेव जयते

आमिर ने सत्यमेव जयते नाम से एक लाजवाब सीरियल बनाया था. इसमें वे हर सप्ताह किसी एक महत्वपूर्ण मुद्दे को बड़ी शिद्दत से उठाते थे. इसके सारे एपिसोड देखने लायक थे. आमिर की एंकरिंग भी बहू बढ़िया थी.
गायकी में भी हाथ आजमाया
आमिर खान ने कई फिल्मों मे अपने पार्श्वगायन से भी श्रोताओं को अपना दीवाना बनाया है. वे इस मामले में अमिताभ को फोल करते नजर आते हैं. उन्होंने सबसे पहले वर्ष 1998 मे प्रदर्शित फिल्म गुलाम मे ‘आती क्या खंडाला’ गीत गाया था. इसके बाद आमिर खान ने ‘देखो 2000 जमाना आ गया,’होली रे’,’चंदा चमके चमचम’, ‘रंग दे बम बम बोले’ जैसे सुपरहिट गाने गाये हैं.
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असहिष्णुता पर बयान पर बवाल
2015 में आमिर ने एक कार्यक्रम में कहा था कि देश में पिछले छह-सात माह से डर का माहौल है. यहां तक कि उनकी पत्नी किरण ने बच्चे की भविष्य की चिंता जताते हुए देश छोड़कर जाने की भी बात कही.इस बयान को लेकर सोशल मी़डिया और मीडिया में बवाल मचा . कोई उनकी फिल्में ना देखने आह्वान कर रहा था तो कोई देश छोड़कर जाने की सलाह दे रहा था. कोई कहता है नहीं जाने देंगे, कोई उन प्रो़डक्ट के बहिष्कार की मुहिम चलाए हुए था जिनके आमिर ब्रांड एंबेस्डर हैं. यह ओवर रिएक्शन ही कहा जाएगा.
मेरी राय में मां के लिहाज से किरण का यह डर कुछ हद तक वाजिब भी हो सकता है,लेकिन आमिर सचमुच इस मुल्क से प्यार करते हैं तो उनको उसके डर को कम करने के लिए यह बात जरूर रखनी चाहिए थी कि ये दंगे फसाद होते रहते हैं इसके बावजूद हम इस देश को नहीं छोड़ सकते क्योंकि यह हमारी मातृभूमि है. आमिर को कहना चाहिए था इसी देश ने मुझे इतना मान-सम्मान,पैसे, शोहरत और करोड़ों दिवाने फैंस की नायाब दौलत से नवाजा है. लिहाजा यह मुल्क छोड़ने की बात किसी भी कीमत पर नहीं सोच सकता.
सात बार फिल्मफेयर पुरस्कार
आमिर अपने सिने कैरियर में सात बार फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं. आमिर को पद्मश्री और पद्मभूषण से भी अलंकृत किया जा चुका है.
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