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आठवीं क्लास के आधे से अधिक बच्चे सामान्य गणित नहीं जानते, झारखंड की स्थिति खराब : रिपोर्ट

 NewDelhi : देश में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. देश में शिक्षा का अधिकार लागू होने से भले ही इस बात के लिए हम आश्वस्त हो जायें कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल में पढ़ेंगे और कम ही स्कूल छोड़ने पर विवश होंगे. लेकिन सच्चाई यह है कि आठवीं क्लास से पासआउट होने वाले आधे से अधिक बच्चे सामान्य गणित तक नहीं कर सकते; वहीं एक चौथाई बच्चे तो पढ़ तक नहीं सकते है.  प्रथम नामक एनजीओ की वर्ष 2018 की ऐनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (एएसईआर) के अनुसार आठवीं क्लास में पढ़ने वाले 56 फीसदी स्टूडेंट्स 3 अंकों की संख्या को एक अंक के नंबर से भाग नहीं दे सकते हैं.

 

वहीं पांचवीं क्लास के 72 फीसदी बच्चे भाग ही नहीं दे सकते हैं, जबकि तीसरी क्लास के 70 प्रतिशत बच्चे घटाना नहीं जानते. यह स्थिति एक दशक पहले से काफी बदतर है. 2008 में पांचवीं क्लास के 37 फीसदी बच्चे सामान्य गणित कर लेते थे, जबकि आज के समय यह संख्या 28 प्रतिशत से कम है.  2016 में तो यह आंकड़ा महज 26 प्रतिशत रह गया था.  बच्चों के अंदर पढ़ सकने की भी समस्या आ रही है.

 

देश भर में हर चार में से एक बच्चा आठवीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दे रहा है

देश भर में हर चार में से एक बच्चा पढ़ने की सामान्य स्किल की कमी की वजह से आठवीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दे रहा है. मैथ की बेसिक जानकारी में लड़कियां, लड़कों से काफी पीछे हैं.  केवल 44 फीसदी लड़कियां ही भाग कर सकती हैं, जबकि लड़कों में यह संख्या 50 फीसदी है;  हालांकि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में आंकड़ा उलटा है, जहां लड़कियां काफी बेहतर कर रही हैं.  हालांकि, इस रिपोर्ट में राज्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सुधार दर्शाया गया है. बीते चार साल में इन दो राज्य में 7.3 प्रतिशत और 3.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ;  हालांकि, बिहार के छात्र गुणा भाग के मामले में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के छात्रों से बेहतर हैं;  बिहार में आठवीं कक्षा के 56.9 प्रतिशत बच्चे गुणा भाग कर सकते है. यूपी और उत्तराखंड के 44.4 फीसदी और 48.6 फीसदी बच्चे ही गुणा भाग कर सकते हैं. गुणा भाग की जानकारी रखने वाले सबसे ज्यादा बच्चे मणिपुर राज्य में हैं;  राज्य में आठवीं के 72.5 फीसदी गुणा भाग आसानी से कर सकते हैं.

वहीं, झारखंड में पिछले चार साल में स़्थिति नहीं सुधरी. झारखंड में पांचवीं के केवल 34.4 फीसदी बच्चे ही दूसरी का पाठ पढ़ सकते हैं;  यहीं हालात चार साल पहले भी थी. यह सभी आंकड़े देश के 28 राज्यों के 596 जिलों से जमा किये गये हैं. इसमें 3 से 16 साल के आयु वर्ग में 3.5 लाख परिवार और 5.5 लाख बच्चे शामिल हैं.

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