
Jamshedpur: पंचायत चुनाव में बागबेड़ा जिला परिषद क्षेत्र के चुनावी पंडितों को चौंकाते हुए डॉक्टर कविता परमार ने बाजी मार ली है. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी लक्ष्मी देवी को 1759 मतों से पराजित कर दिया. जीत के बाद कविता को समर्थकों ने फूल-माला से लाद दिया और जमकर अबीर-गुलाल उड़े. जीत के लिए डॉक्टर कविता परमार ने मतदाताओं का आभार जताया और कहा कि वे अपने वादों पर उतरने का ईमानदार प्रयास करेंगी. उनकी पूरी कोशिश होगी कि क्षेत्र में बदलाव की सुखद तस्वीर दिखे.
इसी के साथ पत्नी को आगे कर बागबेड़ा जिला परिषद सीट पर लगातार तीसरी बार कब्जा जमाने का किशोर यादव का दांव फेल हो गया. उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी लगातार पीछे चलती रहीं, जबकि कविता परमार लगातार एक नंबर बनी रहीं. अंतिम दौर की मतगणना तक जो दृश्य उभरकर सामने आये थे उसमें कविता परमार की जीत तय मानी जा रही थी. वही हुआ भी. मतगणना केन्द्र पर किशोर यादव खेमे में धुकधुकी शुरू से ही बढ़ी रही, वहीं कविता परमार के खेमे में मतगणना के शुरुआती दौर से ही जश्न का माहौल रहा. कविता समर्थकों का उत्साह हर राउंड की गिनती के साथ बढ़ता रहा. वे मान बैठे कि विजयमाल कविता परमार के गले में ही पड़ेगी. दूसरी ओर किशोर यादव खेमा धीरे-धीरे सिकुड़ता जा रहा था और मतगणना केन्द्र के आस-पास उनके समर्थकों की तदाद भी घटती जा रही थी. यह खेमा अपनी हार कबूल करता दिख रहा थी. इसकी सीधी वजह मतों की गिनती बढ़ने के साथ-साथ कविता परमार का लगातार अपने निकटतम प्रत्याशी से लीड लेते जाना था. यह बढ़त अंत तक कायम रही और वह 1759 मतों से जीत गईं.
विकास बनाम परिवारवाद की टक्कर में पसंद बनीं कविता परमार
पूर्वी सिंहभूम जिले का जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र संख्या- 8 बहुचर्चित चुनावी अखाड़ा बन गया था. यहां चुनावी अखाड़े में तीन महिलाएं जोर आजमा रही थीं. इनमें मुख्य मुकाबला शिक्षाविद और समाजसेवी डॉ कविता परमार तथा निवर्तमान जिला परिषद सदस्य किशोर यादव की पत्नी लक्ष्मी देवी के बीच रहा. किशोर यादव का पिछले दो टर्म से जिला परिषद संख्या 8 पर कब्जा था. लेकिन साफ-सुथरी छवि और उच्च शिक्षा प्राप्त डॉ कविता परमार आम मतदाताओं की पहली पसंद बनी रहीं. कविता परमार का कहना भी था कि इस बार खेला भी होगा और गोल भी वही सर्वाधिक करेंगी.
बदलाव के पक्ष में रहा मतदाताओं का मिजाज
जिला परिषद क्षेत्र संख्या 8 के साइलेंट मतदाता इस बार बदलाव के मूड में दिख रहे थे. इस बार उनकी प्राथमिकता यह रही कि कौन सामने आकर उनका नेतृत्व करेगा और उन्हें पानी की पर्याप्त आपूर्ति, बिजली, स्वास्थ्य आदि बुनियादी सुविधाएं प्रदान करेगा. इस बार तटस्थ मतदाता तीन बातों पर गौर कर रहे थे. इनमें पहला और सबसे महत्वपूर्व बात यह सामने आ रही थी कि वर्तमान जिला परिषद सदस्य ने पिछले 12 वर्षों में बागबेड़ा पंचायत क्षेत्र में कोई विकास का काम नहीं किया. दूसरा मुद्दा यह कि क्षेत्र में भयावह जल संकट है और अपशिष्ट प्रबंधन की हालत दयनीय है. लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं. तीसरा मुद्दा यह है कि इस बार पढ़ी-लिखी और बेबाक जिला परिषद चाहिए, जो लोगों की बात को उचित मंच पर तार्किक और मुखर तरीके से रख सके. लोगों का कहना था कि डॉ कविता पढ़ी-लिखी हैं, वह कुछ जरूर करेंगी.




