
Gyan Ranjan
Ranchi: रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव को लेकर चुनावी तपिश परवान चढ़ने लगी है. कुर्मी बहुल इस विधानसभा सीट को लेकर राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है. आंकड़ों पर गौर करें तो रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कुर्मी मतदाताओं की संख्या 90 हजार के करीब है. इसके बाद वैश्य मतदाता जिनकी संख्या तक़रीबन 40 हजार है. मुस्लिम मतदाता की संख्या 35 हजार के करीब है तो 20 हजार के करीब आदिवासी, 15 हजार अनुसूचित जाति और लगभग 20 हजार के करीब सवर्ण मतदाता हैं.
झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से इस सीट पर महतो प्रत्याशी का दबदबा रहा है. इस बार भी इस सीट पर मुख्य मुकाबला महतो प्रत्याशी के बीच ही होना तय माना जा रहा है. आजसू ने आज अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है. पूर्व मंत्री और रामगढ़ से 3 टर्म विधायक रहे चंद्रप्रकाश चौधरी की पत्नी सुनीता चौधरी को आजसू ने मैदान में उतारा है. महागठबंधन की तरफ से काँग्रेस का प्रत्याशी होगा यह तय है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रजरप्पा दौरे पर यह घोषणा कर दी है कि रामगढ़ उपचुनाव मे महागठबंधन से काँग्रेस का प्रत्याशी होगा. साथ ही उन्होनें चार दिनों तक कैंप करने की बात भी कही थी. हालांकि काँग्रेस ने अबतक प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि ममता देवी के पति बजरंग महतो को पार्टी प्रत्याशी बनाए. आजसू का दावा है कि भाजपा का उनके प्रत्याशी को समर्थन रहेगा. यदि यह होता है तो रामगढ़ का मुकाबला दिलचस्प होने जा रहा है. पिछले चुनाव मे आजसू के गढ़ को भेदते हुए काँग्रेस ने वर्षों बाद यहाँ परचम लहराया था. काँग्रेस प्रत्याशी ममता देवी ने आजसू के सुनीता देवी को 28 हजार 718 मतों से हराया था. ममता देवी को 99 हजार 944 वोट मिल था जबकि सुनीता देवी को 71 हजार 220 मत मिले थे. तीसरे स्थान पर भाजपा के रणंजय कुमार को 31 हजार 874 वोट मिल था. इस बार आजसू और भाजपा साथ होती है तो मुकाबला जोरदार होना तय है.
बड़ा सवाल क्या आजसू भाजपा होगी साथ या..
आजसू भले ही यह कह रहा है कि रामगढ़ उपचुनाव मे उसे भाजपा का साथ मिल रहा है लेकिन अबतक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. भाजपा ने खुलकर कुछ नहीं कहा है. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा, अभी यह तय करने में वक्त लगेगा कि कौन उम्मीदवार होगा. क्या आजसू के साथ मिलकर भाजपा साझा उम्मीदवार निकालेगी इस पर दीपक प्रकाश ने कहा, हमने अभी इस पर कुछ भी तय नहीं किया, जब सुदेश महतो के बयान का जिक्र करते हुए सवाल किया गया कि सुदेश महतो का दावा है कि पार्टी की स्थिति वहां मजबूत है हमारे पास वहां चेहरे हैं, इस पर दीपक प्रकाश ने कहा, हमारी पार्टी ही हमारा चेहरा है.
बजरंग को पूरा विश्वास, पार्टी देगी मौका
ममता देवी के पति बजरंग महतो को पूरा विश्वास है कि पार्टी उन्हें मौका देगी. काँग्रेस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी भी बजरंग महतो को प्रत्याशी बनाएगी. अभी तक काँग्रेस ने ऐलान नहीं किया है. कहा यह जा रहा है कि काँग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर भी इस सीट पर दावा कर रहे हैं.
अब तक क्या रहा है गणित
साल 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में यूपीए गठबंधन की उम्मीदवार ममता देवी ने 99,944 वोट मिले थे. दूसरे स्थान पर आजसू पार्टी की उम्मीदवार सुनीता चौधरी 71,226 मत प्राप्त की थी. तीसरे स्थान पर भाजपा के प्रत्याशी रणंजय कुमार उर्फ कुंटू बाबू ने 31,874 मत प्राप्त किये थे. साल 2019 के विधानसभा चुनाव में आजसू और भाजपा का गठबंधन नहीं था. इस बार संभावना जतायी जा रही है को दोनों पार्टियां साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी.
21 साल बाद रामगढ़ में उपचुनाव
रामगढ़ विधानसभा सीट में 21 साल के बाद उपचुनाव होगा. साल 2000 में सीपीआई के शब्बीर अहमद कुरैशी उर्फ भेड़ा सिंह के निधन के बाद उप चुनाव हुआ था. साल 2000 में सीपीआई के शब्बीर अहमद कुरैशी उर्फ भेड़ा सिंह ने रामगढ़ विधानसभा में भाजपा के शंकर चौधरी को हराकर जीत हासिल की थी, लेकिन कुछ ही माह के अंतराल में शब्बीर अहमद कुरैशी उर्फ भेड़ा सिंह की आकस्मिक मौत हो गयी थी.
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के किसी भी विधानसभा से जीत हासिल नहीं किये थे, लेकिन शब्बीर अहमद कुरैशी उर्फ भेड़ा सिंह के निधन के बाद रामगढ़ विधानसभा का सीट खाली हुआ था. इसके बाद फरवरी, 2001 में यहां झारखंड का पहला उपचुनाव हुआ था. जिसमें बाबूलाल मरांडी ने स्वर्गीय भेड़ा सिंह की पत्नी नादरा बेगम को हराकर जीत हासिल की थी.
रामगढ़ के 4 प्रखंडों का सबसे बड़ा मुद्दा
1.रामगढ़ : शहर का बड़ा हिस्सा छावनी परिषद क्षेत्र में है. यहां जी+1 मकान ही बना सकते हैं. लोग परिषद के अधिकार कम करने की मांग वर्षों से करते रहे हैं.
2.चितरपुर : विकास के कई काम हुए, लेकिन यहां युवाओं का रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है. नौकरी के लिए युवाओं को दूसरे शहरों में पलायनल करना पड़ता है.
3.दुलमी : भैरवा जलाशय में ग्रामीणों की जमीन गई. उन्हें पुरानी दर पर मुआवजा मिला. इससे नाराजगी कायम है. बेरोजगारी और क्षेत्र से पलायन भी बड़ा मुद्दा है.
4.गोला : खेती के लिए प्रसिद्ध. भैरवा जलाशय योजना से नहर बननी थी, पर काम शुरू नहीं हुआ. यहां किसानों की सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की है.
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