
Raj kishor
Jamshedpur : शहर के बागबेड़ा और आसपास के क्षेत्रों के साथ गोविंदपुर क्षेत्र की जलसंकट दूर करने के लिए शुरू की गयी बागबेड़ा-गोविंदपुर वृहत जलापूर्ति परियोजना का काम वर्ष 2019 में ही समाप्त होना था. इस बीच परियोजना को पूरा करने में कई तरह की बाधाएं आती गईं. नतीजन अप्रैल 2020 तक भी यह परियोजना धरातल पर नहीं उतरकर अधर में लटकी हुई है. परियोजना के अधर में लटकने वजह तो कई है, लेकिन इसकी सजा इस भीषण गर्मी में बागबेड़ा आवासीय कॉलोनी के अलावा कीताडीह, सोमाय झोपड़ी, घाघीडीह, हरहरगुट्टू एवं रेल की जमीन पर बसी करीब दर्जनभर बस्तियों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है. बस्तीवासी इस प्रचंड गर्मी में पानी के लिए त्राहिमाम है. वे बेसब्री से परियोजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, फिर भी उनका इंतजार जल्द खत्म होते नहीं दिखता.
यह मौजूदा हालात
बता दें कि वर्ल्ड बैंक की मदद से 235 करोड़ की लागत से इस वृहत जलापूर्ति परियोजना को पूरा किया जाना था. इस परियोजना के पूरा होने पर बागबेड़ा परिक्षेत्र बागबेड़ा परिक्षेत्र में लगभग 23 पंचायत के लोग लाभान्वित होने वाले थे. परियोजना को लेकर बिरसानगर के मोहरदा और सोनारी के दोमुहानी में एक-एक इंटकवेल बनाना था. मौजूदा हालात यह है कि मोहरदा इंटकवेल से गोविंदपुर के साथ परसुडीह क्षेत्र में पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन दोमुहानी इंटकवेल का काम अभी ठप्प पड़ा हुआ है. इस कारण बागबेड़ा क्षेत्र में फिलहाल पाइप लाइन से पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. यही क्षेत्र के लोगों की परेशानियों का सबब बना हुआ है.
बागबेड़ा-कीताडीह में 500 से 700 फीट नीचे गिरा पानी का लेयर
इस बीच प्रचंड गर्मी में बागबेड़ा और कीताडीह क्षेत्र में लगातार पानी का लेयर नीचे गिरता जा रहा है. स्थानीय लोगों की मानें तो फिलहाल इस क्षेत्र में पानी का लेयर 500 से 700 फीट तक नीचे चला गया है, जबकि आज से 15 साल पहले क्षेत्र में मात्र 200 से 300 फीट की बोरिंग में ही पानी बोरिंग से निकलना शुरू हो जाता था. यह भी लोगों की बड़ी समस्या है. क्योंकि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से क्षेत्र में की जानेवाली जलापूर्ति बार-बार ठप्प होते रहता है. इससे बीच-बीच में ऐसा भी दौर आता है कि लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाते हैं.
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता भी परेशानी की बड़ी वजह
इधर,परियोजना को लेकर क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियों का उदासीनता भी लोगों की परेशानी की वजह मानी जा रही है. एक तो परियोजना का काम करनेवाले दो से तीन ठेकेदार अब तक डिफाल्टर हो चुके हैं, वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अलावा समाजसेवक होने का दंभ भरने वाले कुछ लोग बार-बार परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए जन आंदोलन की चेतावनी देने के बाद उसकी शुरुआत भी कर डालते हैं, लेकिन इस तरह का आंदोलन भी जमीन पर कम ही दिखता है. फिर कुछ दिनों बाद चुप्पी साध ली जाती है.
वर्ल्ड बैंक ने भी खींचे हाथ, अब ठेकेदार भी काम करने को तैयार नहीं
इस बीच खबर यह भी है कि वर्ल्ड बैंक ने भी इस परियोजना से अपने हाथ खींच लिये हैं. इसकी वजह परियोजना का सही समय पर पूरा नहीं होने से इसकी लागत में लगातार बढ़ोत्तरी है. दूसरी ओर स्थिति यह बन गई है कि ठेकेदार भी परियोजना के शुरुआती रेट पर काम करने के लिए अब तैयार नहीं हो रहे हैं. क्योंकि समय बीतने के साथ मंहगाई बढ़ने के साथ जीएसटी में भी अत्यधिक बढ़ोत्तरी हो चुकी है. इस कारण यह परियोजन और अधर में लटकता जा रहा है और इस भीषण गर्मी में क्षेत्र की जनता पानी के लिए त्राहिमाम है.
ये भी पढ़ें-ये है ‘डिस्को डांसर चोर’, दुकान में चोरी करते हुए लगाए ठुमके; CCTV में कैद वारदात का देखें VIDEO




