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बादल पत्रलेख ने दिया गौशालाओं को मजबूत करने का भरोसा, कहा- अनुदान के लिए नियमों का हो रहा सरलीकरण

Ranchi : कृषि, पशुपालन मंत्री बादल पत्रलेख ने राज्य की सभी निबंधित गौशालाओं को भरपूर मदद दिये जाने का भरोसा दिलाया है. होटल बीएनआर चाणक्य, रांची में सोमवार को झारखंड प्रादेशिक गौशाला संघ की बैठक में उन्होंने कहा कि गौवंश की सेवा बड़ा पुण्य का कार्य है. जिस तरह से हम अपने माता-पिता की सेवा करते हैं, उसी तरह गो-माताओं की भी की जानी चाहिए. गौशालाओं को मजबूत करने पर सरकार की नजर है. इसे देखते हुए राज्य सरकार की ओर से गायों के लिए प्रतिदिन की खुराकी 50 रुपये से बढ़ा कर 100 रुपये तक कर दी गयी है.

कई गौशालाओं को अनुदान का मसला अटका है. नियमों का सरलीकरण करके गौशालाओं को जल्द से जल्द भुगतान किये जाने का प्रयास है.

जहां गौशालाएं नहीं हैं, उस दिशा में भी पहल होगी. मौके पर पशुपालन निदेशक शशि प्रकाश झा, गौ सेवा आयोग की रजिस्ट्रार अर्चना पांडेय, गौशाला संघ के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल, सचिव अनिल मोदी, उपाध्यक्ष ताराचंद जैन, संयुक्त सचिव प्रमोद सारस्वत सहित विभिन्न जिलों के गौशाला संघ के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे.

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मिलेगी सरकारी डॉक्टरों की सुविधा

शशि प्रकाश झा ने मौके पर कहा कि गौशालाओं को वेटनरी डॉक्टरों की कमी महसूस होती रही है. राज्य में 498 सरकारी वेटनरी डॉक्टर हैं. 198 राजधानी रांची में सेवारत हैं तो फिल्ड में 300. अब राज्य के सभी जिलों में कम से कम एक गौशाला से एक डॉक्टर को जोड़ा जायेगा. ऑन क़ॉल वे अपनी सेवाएं देंगे.

हो सके तो सप्ताह में एक दिन वे दिन भर गौशाला में अपनी सेवा देंगे. एक पशु धन सहायक को भी गौशाला से नियमित तौर पर जोड़ा जायेगा. 10 एंबुलेंस की व्यवस्था हो रही है. 1 एंबुलेंस रांची को दिये जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है.

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बाकी 9 की खरीद की प्रक्रिया जल्द ही पूरी होगी. आने वाले समय में विभाग के पास केंद्र की मदद से 300 से अधिक एंबुलेंस होंगे. राज्य में एक टोल फ्री नंबर 18003097711 निदेशालय के स्तर से जारी हो चुका है जिस पर गौशाला के प्रतिनिधि या अन्य गौ वंश की समस्या, मदद के संबंध में बात कर सकते हैं. वैल्यू एडिशन के जरिये गौशालाओं के गोबर, खाद और अन्य पदार्थों की बिक्री करके गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद हो, ऐसी कोशिश है.

ड्रोन के जरिये गौमूत्र का छिड़काव, कीटनाशकों की बजाये गौमूत्र का प्रयोग और दूसरे ऐसे ही प्रयास होने हैं. देवघर गौशाला को पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है जहां बड़ी संख्या में रहने वाली गायों, साफ सफाई, हरियाली को देखने पर्यटक आ सकते हैं.

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आत्मनिर्भर बने गौशाला

राजकुमार अग्रवाल ने बादल पत्रलेख से अनुरोध करते हुए कहा कि गौशालाओं को अगर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास हो तो इसका दूरगामी असर होगा. अभी कई गौशालाओं का दो-तीन सालों से लाखों रुपया सरकार के पास बकाया है. गौशालाओं से जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट, गौमूत्र की खरीद और ऐसे ही अन्य प्रयास हों तो इसका लाभ होगा. गौशालाओं की भूमि पर होने वाले अतिक्रमण को भी रोकना जरूरी होगा.

गोबर गैस प्लांट की स्थापना में गौशालाओं की मदद भी उपयोगी होगा. गौ सेवा आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति से भी राहत होगी. मौके पर संघ की ओर से मंत्री को 11 सूत्री मांगों से संबंधित एक पत्र भी सौंपा गया.

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