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रानी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में बच्ची का नहीं बनाया आयुष्मान कार्ड, कहा, 1,43,750 चुकाने के बाद ही करेंगे डिस्चार्ज

गोमिया के रहने वाले बिनोद रविदास ने 5 सितंबर को बच्ची को कराया था एडमिट

Ranchi : राजधानी के रेडियम रोड स्थित रानी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता है. कभी मरीजों को भारी भरकम बिल तो कभी गलत इलाज को लेकर हॉस्पिटल चर्चा में रहता है. अब एक और ताजा मामला सामने आया है. इसमें मरीज को इलाज के नाम पर 1,43,750 रुपये का बिल थमाया गया है. वहीं 37 हजार रुपये चुकाने के बाद ही बच्ची को हॉस्पिटल से छोड़ने की बात कही गई है.

परिजनों का कहना है कि कागजात उपलब्ध कराने के बाद भी बच्ची का आयुष्मान कार्ड नहीं बनाया गया. आयुष्मान कार्ड बन जाने से बच्ची का मुफ्त में इलाज हो सकता था. अब उनके पास हॉस्पिटल का बिल देने के लिए एक रूपया भी नहीं है तो 37 हजार बकाया कहां से लाएंगे?

क्या कहते हैं मैनेजर

वहीं मैनेजर टुनटुन का कहना है कि इलाज में जो खर्च आया है, वहीं बिल दिया गया है. जहां तक आयुष्मान कार्ड की बात है तो कुछ टेक्निकल कारणों से परेशानी हुई है. इसलिए बिल चुकाने को कहा गया है, बिल चुकाने के बाद ही बच्ची को डिस्चार्ज करेंगे.

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क्या है पूरा मामला

गोमिया के चेलिया गांव के रहने वाले बिनोद रविदास ने बच्ची को चोट लगने के बाद रानी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में 5 सितंबर को एडमिट कराया था. उसके बाद से बच्ची का इलाज शुरू होने पर कई तरह के टेस्ट कराए गए. इसके लिए परिजन पैसे हॉस्पिटल में जमा कराते रहे.

बच्ची का आधार कार्ड बना हुआ था. इसके बाद भी आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए बच्ची के परिजनों से कुछ और पेपर की मांग की गई. पिता ने 15 सितंबर को कागजात हॉस्पिटल प्रबंधन को दिये. इसके बाद भी इतने दिनों तक बच्ची का आय़ुष्मान कार्ड नहीं बनाया गया. और इलाज के नाम पर बिल बढ़ता चला गया.

सोमवार को बच्ची के पिता ने हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करने को कहा तो प्रबंधन ने कहा कि शाम तक उसका आयुष्मान कार्ड बना दिया जाएगा. जब परिजन डिस्चार्ज कराने पर अड़ गए तो तब हॉस्पिटल प्रबंधन ने एक लाख 43,750 रुपये का बिल दिया. जिसमें 37 हजार रुपए बकाया दिखाया गया. वहीं बिल चुकाने तक बच्चों को नहीं छोड़ने की बात कही है.

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