Opinion

स्वतंत्रता दिवसः आजादी के मायने और भारतीय मुसलमानों का सस्पेंस

Dr Mafooz Alam

15 अगस्त 2019 को भारत आजादी का 73 वां जश्न मनाने जा रहा है. यह हम भारतवासियों के लिए गर्व और  स्वाभिमान की बात है. भारत दुनिया में अनेकता में एकता का प्रतीक है. सहिष्णुता और प्रेम इसके रोम-रोम में समाये हुए हैं. मगर पता नहीं भारत को किसकी बुरी नज़र लग गयी है.

इधर कुछ दिनों से सब कुछ उलटा- पलटा हो रहा है. एक ओर देश के 49 कलाकार- बुद्धिजीवी देश की वर्तमान परिस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हैं तो दूसरी ओर उन्हीं की  बिरादरी  के अर्थात 62 कलाकार-बुद्धिजीवी  आपत्ति करने वालों की ही आलोचना करते  हैं. दूसरी ओर भीड़ का आतंक भी कायम है. सांसद का बहुमूल्य समय माफी-माफी के खेल में बर्बाद हो रहा है.

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परिवर्तन प्रकृति का नियम है और यह  प्रक्रिया नियमित रूप से चलती  रहती है. मगर यह बदलाव इतना तेज़ न हो कि समाज में असंतुलन और असंतोष पैदा हो जाये. वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, मगर सच्चाई से इनकार करना एक पलायन जैसा है. शायद इन्हीं बदलते हालात के कारण जाने-माने बुद्धिजीवी हर्ष मंदर ने कहा कि देश का मुस्लिम समाज बहुत कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि यह मात्र देश के मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि हम सभी के लिए मुश्किल समय है जो भारत को मजहब  की ऐनक से नहीं देखते.  यह बातें उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पुस्तक  “ विजिबल मुस्लिम इनविजिबल सिटीजन: अंडरस्टैंडिंग इस्लाम इन इंडियन डेमोक्रेसी   “ के विमोचन के अवसर पर कही. यह पुस्तक  भारत के आज के मुस्लिम समाज की समस्याओं पर ही आधारित करके लिखी गयी है.

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तेजी से बदलते भारत का एक प्रमाण यह है कि संसद के चालू सत्र में लोक सभा से तीन  महत्वपूर्ण बिल पारित किये गये हैं. तीन तलाक़ बिल तीसरी बार लोकसभा से पारित होकर राज्यसभा से भी कर दिया गया है. अब यह बिल कानून बनने की प्रक्रिया में आ गया है. इसका सीधा सम्बन्ध मुस्लिम समाज से है. मगर एक नजरिया ये है कि इस बिल के मौजूदा प्रावधान से न तो मुस्लिम महिलाओं को कोई फायदा होने जा रहा है और न मुस्लिम समाज को. अगर मुस्लिम महिलाओं की इतनी चिंता होती तो सांप- सीढी का खेल न खेल कर सीधे-सीधे तीन तलाक़ पर पाबंदी लगा दी जाती और तीन तलाक़ को अवैध घोषित कर दिया जाता.

बहरहाल, दूसरा बिल सूचना का अधिकार 2005 संशोधन बिल है. सूचना कार्यकर्ता और विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सूचना का अधिकार कमजोर हुआ है और इसका जो उद्देश्य था, उसे आघात  पहुंचा  है. इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा.

तीसरा महत्वपूर्ण बिल गैर कानूनी गतिविधियां  (निषेध) संशोधन बिल 2019 है. इससे एजेंसियों को यह अधिकार मिल जायेगा कि  किसी व्यक्ति विशेष को भी बिना पर्याप्त प्रमाण के आतंकवादी घोषित किया जा सकता है. इसके दायरे में वह व्यक्ति भी  आ जायेगा  जो आतंकवादी साहित्य और आतंकवादी प्रचार में संलग्न हो. इस बिल के सम्बंध में लोगों का मानना है कि जिस तरह पहले टाडा और पोटा का गलत इस्तेमाल हुआ था,  जिसका दंश कई मासूम और निर्दोष लोग अबतक झेल रहे हैं, वो फिर से होने लगेगा.

इस संशोधन से ऐसे ही खतरे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि यह संशोधन  संविधान में दिये गये मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12 से 35 ) को भी  प्रभावित करेगा. मगर इसमें आतंकवादी साहित्य और आतंकवादी प्रचार को परिभाषित नहीं किया गया है. तेज़ी से बदलते भारत में मुस्लिम समाज को भी  अपने आप में बदलाव लाने की जरूरत है. वे अपने  क्रिया-कलाप में पारदर्शिता लायें, देश के कानून के दायरे में रह कर अपने कर्तव्यों का निर्वाहन करें. शिक्षा, हुनर और रोज़गार के हर क्षेत्र में बढिया प्रदर्शन करें, आपसी सौहार्द्र बनायें. समाज से कटकर और अलग-थलग नहीं रहें.

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