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खाद्य आपूर्ति विभाग में हुए तबादलों में पैरवी और पावर हावी होने के लग रहे आरोप

Akshay Kumar Jha

Ranchi: मंगलवार को सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग में 22 लोगों को तबादला हुआ. इसमें प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और मार्केटिंग अफसर शामिल हैं. तबादले के बाद से ही विभाग में कई तरह की बातें हो रही हैं.

कुछ लोगों का कहना है कि इस बार की स्थापना की बैठक के बाद हुए तबादलों में पैरवी और पहुंच का जमकर इस्तेमाल हुआ है. आरोप लग रहे हैं कि जिन लोगों के तबादले का पर्याप्त आधार था, वैसे लोगों की अनदेखी कर पैरवी और पावर वालों का मनचाही जगह पर स्थानांतरण-पदस्थापन किया गया है.

इन 22 लोगों में से कुछ ऐसे नाम भी हैं, जो महज तीन महीने में अपनी मनचाही जगह तबादला कराने में सफल रहे. वहीं वैसे लोग जो रिमोट एरिया में सालों से ड्यूटी कर रहे हैं, उन्हें फिर से सुदूर इलाकों में धकेल दिया गया.

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बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने तबादले के लिए पैरवी और पावर का इस्तेमाल किया, तो कुछ लोगों ने तबादला रुकवाने के लिए और भी तिकड़म आजमाये. तबादले के कुछ केस स्टडी न्यूज विंग के हाथ लगे हैं.

धनबाद मापतौल निरीक्षक पर मेहरबानी का राज क्या?

धनबाद में करीब छह साल से जमे माप-तौल विभाग के इंस्पैक्टर सुनील कुमार मांझी इस बार भी वहीं जमे रहने में सफल हो गये, जबकि उनका नाम अन्यत्र स्थानांतरण के लिए प्रस्तावित किया गया था, किंतु मांझी बाबू विभागीय सचिव से भी भारी निकले.

पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुनील कुमार मांझी पांच वर्ष से ज्यादा समय से एक ही पोस्ट और जगह पर जमे हुए हैं. पिछले वर्ष भी वह धनबाद में बने रहने में सफल हो गये थे.

इस बार भी विभाग की तरफ से सुनील कुमार मांझी के तबादले की फाइल मंजूरी के लिए विभाग के मंत्री सरयू राय के पास भेजी गयी.

लेकिन मंत्री ने इस तबादले को मंजूरी नहीं दी. ऐसा होने से अब सुनील कुमार मांझी इस सरकार के कार्यकाल तक धनबाद में ही जमे रह सकते हैं.

हालांकि झारखंड में साल के अंत तक चुनाव होने हैं और चुनाव आयोग की नज़र उनपर पड़ी तो मांझी का टिकना मुश्किल होगा. लेकिन सुनील कुमार मांझी पर इतनी मेहरबानी को लेकर विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं.

तीन महीने में हुआ निर्मल कुमार सिंह का तबादला

तबादलों में दूसरा नाम मार्केटिंग अफसर निर्मल कुमार सिंह का आ रहा है. विभाग में चर्चा है कि इनके भी तबादले में पैरवी और पहुंच का खेल हुआ है.

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निर्मल कुमार सिंह कई वर्षों से बोकारो में जमे हुए थे. लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के निर्देश पर इनका तबादला रांची कर दिया गया था.

लेकिन लोकसभा चुनाव के महज तीन महीने के बाद ही उन्हें दोबारा से रांची से धनबाद भेज दिया गया. बताते चलें कि वह बोकारो में कई सालों से जमे थे. धनबाद भी वह अपनी इच्छा से गये हैं. और उनका दावा है कि वह जब चाहें मनचाही जगह पर पदस्थापन करा सकते हैं.

शंभू नाथ विद्यार्थी एक साल में दोबारा से रांची पहुंच गए

तबादले में तीसरा नाम शंभूनाथ विद्यार्थी का आ रहा है. पिछली स्थापना की बैठक के बाद उनका तबादला रांची से लोहरदगा कर दिया गया था. लेकिन महज एक साल में ही उन्हें लोहरदगा से दोबारा रांची बुला लिया गया.

हालांकि उन्होंने तबादले के लिए अपनी पत्नी की बीमारी वजह बतायी थी. लेकिन विभाग में यह चर्चा है कि ऐसे कई आवेदन थे, जिसमें परिवार वालों की बीमारी को तबादले के लिए वजह बनाया गया था.

लेकिन दूसरे किसी की नहीं चली और शंभूनाथ विद्यार्थी जो विभाग में काफी चर्चित हैं, उनका तबादला एक साल में ही दोबारा हो गया और उन्हें मनचाही जगह मिल गयी.

राकेश वर्मा ने पिछला तबादला रुकवा लिया था, इस बार पायी मनचाही पोस्ट

तबादले में चौथा नाम मार्केटिंग अफसर राकेश वर्मा का नाम है. विभाग के लोगों का कहना है कि पिछली स्थापना की बैठक के बाद राकेश वर्मा का तबादला कहीं और हो गया था.

लेकिन बाद में लिस्ट से उनका नाम हटा दिया गया. लेकिन इस बार वो फिर से एक बार रांची आने में कामयाब हो गए. विभाग में इस बात की चर्चा है कि आखिर खूंटी से रांची इतनी कम दूरी वाले जगह पर तबादला करने के पीछे क्या मंशा हो सकती है.

दूसरी तरफ सुदूर इलाकों में तीन साल मन लगाकर नौकरी करनेवाले अफसरों को फिर से सुदूर इलाकों में भेज दिया गया है. इससे उनमें मायूसी देखी जा रही है. इस तबादले की चर्चा सचिवालय के गलियारों से लेकर जिलों तक हो रही है.

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