
Ranchi: कृषि उपज और विपणन विधेयक को लेकर व्यापारियों ने आंदोलन की रणनीति तय कर ली है. पंद्रह फरवरी तक अगर राज्य सरकार विधेयक वापस नहीं लेती है तो व्यापारी खाद्यान्न बाजार बंद कर देंगे. वहीं, विधेयक में खाद्यान्न व्यापारियों के आंदोलन के साथ ही महंगाई बढ़ने की चिंता भी आम लोगों को सता रही है. इस पर पंडरा बाजार समिति के संजय माहुरी ने कहा कि पंद्रह फरवरी तक किसी भी खाद्यान्न के दाम में वृद्धि नहीं होगी. व्यापारी इसे लेकर एकजुट हैं. क्योंकि पंद्रह फरवरी से राज्य में बाहर से आने वाले अनाज आयात किये जा रहे हैं. अनाज आयात होने पर बाजार में अनाज की कमी नहीं होगी. ऐसे में दाम नहीं बढ़ेगा. लेकिन पंद्रह फरवरी तक अगर राज्य सरकार मांगें नहीं मानती है तो महंगाई और अनाज की कमी दोनों ही स्थिति में लोगों को परेषानी का सामना करना पड़ सकता है.
खुदरा दुकानदारों और मिलरों का भी समर्थन: माहुरी ने बताया कि कृषि बिल के विरोध में शुरू आंदोलन में खाद्यान्न व्यापारियों का समर्थन है. जिसमें बड़े व्यापारी तो विरोध कर ही रहे हैं. खुदरा राशन दुकानदार, राइस मिल और आटा चक्की एसोसिएशन का भी समर्थन है. पंद्रह फरवरी से खाद्यान्न सेवा बंद किया जायेगा. इस दौरान राइस मिल संचालक समेत अन्य खाद्यान्न सेवाएं भी प्रभावित रहेंगे.
ऑर्डर किया जा रहा है: पंद्रह फरवरी तक राज्य में खाद्यान्न आयात जारी रहेगा. व्यापारी फिलहाल जो भी ऑर्डर कर रहे हैं, वो तारीख को ध्यान में रख कर किया जा रहा है. संजय माहुरी की मानें तो पंद्रह फरवरी से खाद्यान्न लोड और ढुलाई दोनों बंद कर दी जायेगी. आने वाले कुछ दिनों में अगर सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करती है तो ऑर्डर देना भी बंद कर दिया जायेगा. अब दुकानें बंद करने में सिर्फ छह दिन रह गया है. जानकारी हो कि राज्य में प्रमुख अनाज अन्य राज्यों से मंगाये जाते है. आवाक बंद होने से राज्य की स्थिति गंभीर होगी.
विधेयक लागू होने से मंहगे होगें खाद्यान्न: व्यापारियों की मानें तो चावल को छोड़कर किसी भी फसल पर राज्य में पूर्ण निर्भरता नहीं है. ऐसे में प्रमुख अनाज बाहर से मंगाये जाते है. यहां सरकार की ओर से अलग से शुल्क लगाने से खाद्यान्न महंगे होंगे.क्योंकि जिन राज्यों से अनाज आता है, उन व्यापारियों को दो राज्यों में शुल्क देना होगा. राज्य में चावल 25 फीसदी बाहर से मंगायी जाती है. इसके साथ ही गेंहू, दलहन, तिलहन, आलू, प्याज भी बाहर से मंगाये जाते है. राज्य में हरियाणा, पंजाब, एमपी, यूपी, पश्चिम बंगाल से खाद्यान्न मंगाये जाते हैं. राज्य में प्रतिदिन चावल 3500 टन, गेंहू 2500 टन, आलू 1500 टन, प्याज 800 से 1000 टन, दालें 700 से 800 टन, खाद्य तेल की खपत है. इसी अनुपात में व्यापारी प्रतिदिन अनाज के लिये ऑर्डर देते है.




