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1900 करोड़ का MOU करनेवाले आधुनिक पावर के अग्रवाल बंधु झारखंड को लगा चुके हैं 500 करोड़ का चूना

वर्ष OMM कंपनी द्वारा अनुमति से 12.30 लाख टन अधिक लौह अयस्क खनन को अफसरों को सेट कर कराया एडजस्ट, सरयू राय कई बार उठा चुके हैं मामला

Jamshedpur :  बीते शनिवार को झारखंड सरकार के साथ नयी दिल्ली के होटल ताज में 1900 करोड़ का एमओयू करनेवाले आधुनिक पावर के प्रमोटर झारखंड सरकार को करोड़ों का चूना लगा चुके हैं. दीवालिया होकर बिकने के पहले आधुनिक ग्रुप के प्रमोटर्स अग्रवाल बंधुओं के पास झारखंड में उड़ीसा मैंगनीज एंड मिनरल्स नाम की एक लौह अयस्क खदान थी. यह एक निजी खदान थी, जिसे अग्रवाल बंधुओं ने ओडिशा के एक लीजधारक से खरीदा था. इस खान को अगर गड़बड़ियों की खदान कहा जाये, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. स्वीकृति से अधिक खनन करने, वन भूमि और सेल के क्षेत्र में जाकर अवैध खनन करने, अच्छे ग्रेड के अयस्क को कम ग्रेड का बताकर सरकारी राजस्व को चूना लगाने की अनेक शिकायतें  चाईबासा के डीएफओ और डीएमओ दफ्तरों की फाइलों में दबी पड़ी हैं. बहरहाल, आधुनिक के हाथ से निकलकर अब यह खदान अमलगम स्टील एंड पावर लि. के पास है. इसी ओएमएम ने वर्ष 2011-12 और 2012-13 के दौरान झारखंड सरकार को 500 करोड़ का चूना लगाया. अग्रवाल बंधुओं ने सरकारी अफसरों को सेट करके यह काम किया.

खान विभाग ने उड़ीसा मैंगनीज एंड मिनरल्स लि. को 2009-10 और 2010-11 में अनुमति से 12.30 लाख टन अधिक लौह अयस्क खनन का दोषी पाया था. इस अवैध खनन के लिए विभाग ने ओएमएम पर करीब 500 करोड़ रुपये का फाइन ठोका. कंपनी ने इस भारी-भरकम जुर्माने से बचने के लिए सरकारी अधिकारियों के साथ सेटिंग की. चाईबासा में पदस्थापित प्रशासन और खान विभाग के अफसरों को उपकृत किया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि इन अधिकारियों ने 12.30 लाख टन के अवैध खनन को 2011-12 और 2012-13 में किये गये खनन के साथ एडजस्ट कर दिया. नतीजा ओएमएम फाइन देने से बच गया और झारखंड सरकार को अयस्क और राजस्व दोनों से हाथ धोना पड़ा.

इस मसले को राज्य सरकार के पूर्व मंत्री और वर्तमान में झारखंड विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति के अध्यक्ष सरयू राय ने भी कई बार उठाया है. किछ दिन पहले मुख्यमंत्री को संबंधित एक ट्वीट में उन्होंने लिखा – “पश्चिम सिंहभूम ज़िला के उपायुक्त ने पत्रांक 1496 गो०,18 मई 2012 द्वारा ज़िला खनन पदाधिकारी को निर्देश दिया कि खननकर्ता ओएमएम द्वारा 2009-10 और 2010-11 में अनुमति से 12.30 लाख टन अधिक लौह अयस्क के अवैध खनन को इसके द्वारा 2011-12 और 2012-13 में किये गये खनन के साथ एडजस्ट करें.  डीएमओ ने ऐसा कर दिया. इस कारण ओएमएम 500 करोड़ रु फाइन देने से बच गया और सरकार को इतने राजस्व का नुकसान हुआ. उपायुक्त को ऐसा करने का अधिकार नहीं था. इस प्रकार उपायुक्त ने जानबूझकर एक निजी व्यवसायी को लाभ पहुंचाया जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 के तहत दंडनीय अपराध है. श्री हेमंत सोरेन कारवाई करें.

ओएमएम जैसी कंपनी के जरिए लाखों टन लौह अयस्क का अवैध खनन करने और राज्य को 500 करोड़ का चूना लगानेवाली आधुनिक कंपनी और इसके मालिक झारखंड में 1900 करोड़ का इंडस्ट्रियल पार्क बनाकर झारखंड का क्या भला करना चाहते हैं, यह तो वक्त ही बतायेगा.

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