
Ranchi: झारखंड के सीमावर्ती राज्य बिहार में खूनी खेल खेलने वाले नक्सली मुआवजे के लालच में दूसरे राज्यों में सरेंडर कर रहे हैं. हाल के दिनों में बिहार के कई नक्सलियों ने झारखंड में सरेंडर किया है. दरअसल, झारखंड में सरेंडर करने वाले नक्सली को बिहार की तुलना में बढ़िया मुआवजा मिलता है. झारखंड की पुनर्वास नीति ही नक्सलियों को सरेंडर करने के लिए लुभा रही है. 4 अप्रैल को बिहार-झारखंड के 145 कांडों में वांछित 15 लाख के इनामी कुख्यात इंदल गंझू उर्फ ललन गंझू उर्फ उमा उर्फ बढ़न ने रांची जोनल आईजी के कार्यालय में सरेंडर किया. इंदल मूल रूप से बिहार के गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र के असरैन गांव का रहने वाला है. इंदल गंझू का कौलेश्वरी सब जोन में आतंक था. बिहार के गया और औरंगाबाद में 91 मामले दर्ज है, जबकि झारखंड में 54 मामले दर्ज है. 8 अप्रैल को भाकपा माओवादी के जोनल कमांडर 10 लाख का इनामी अमरजीत यादव उर्फ लखन यादव बिहार के गया जिले के बाराचट्टी थाना क्षेत्र के गड़हातरी का रहने वाला है. सबजोनल कमांडर नीरु यादव उर्फ सलीम गया जिले के ही बाराचट्टी थाना क्षेत्र के झांझी का रहने वाला है. अफसरों के मुताबिक नक्सली आमतौर पर पैसों की तंगी और गिरफ्तारी के डर से सरेंडर करते हैं. उन्हें जब अपने परिवार का भविष्य अंधकारमय नजर आने लगता है तो वे हथियार डाल देते हैं.
हथियारों के हिसाब से अतिरिक्त भुगतान
एलएमजी के साथ 1 लाख
एके-47, एसएलआर, इंसास के साथ 75 हजार
.303 राइफल, कार्बाइन के साथ 25 हजार
.315 राइफल के साथ 15 हजार
रिमोट कंट्रोल डिवाइसेस के साथ 6 हजार
ग्रेनेड और हैंड ग्रेनेड के साथ 2 हजार
वायरलेस सेट रेंज के आधार पर 2 से 10 हजार
आईईडी के साथ 6 हजार
विस्फोटक सामग्री प्रति किलो 6 हजार
सरेंडर के दौरान दी जाती है, मुआवजे की राशि
सरेंडर करने वाले नक्सली को दो श्रेणी में रखा गया है. ‘A’ श्रेणी में जोनल कमांडर एवं इसके उपर के नक्सली को रखा गया है. इसमें पुनर्वास अनुदान 6 लाख रुपया रखा गया है. सरेंडर के समय दो लाख रुपये दिये जाते है. बांकि चार लाख का भुगतान सरेंडर के बाद दो किस्तों में दिया जाता है. पहला किस्त एक वर्ष के बाद दूसरा किस्त दूसरे साल के बाद दिया जाता है.
‘B’ श्रेणी के नक्सलियों को पुनर्वास अनुदान के लिये 3 लाख रुपये दिये जाते है. 1 लाख रुपये तत्काल सरेंडर के उपरांत दिया जाता है. जबकि शेष राशि दो बराबर किस्तो में एक वर्ष के बाद 1 लाख जबकि दो वर्ष के बाद 1 लाख रुपये दिये जाते है. इसके अलावे चार डिसमिल जमीन घर बनाने के लिये. अहर्ता पूरा करने वाले नक्सली को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाता है. सरेंडर करने वाले नक्सली के बच्चे को स्नातक तक की पढ़ाई के लिये 40 हजार रुपये वार्षिक भुगतान किया जाता है. इसके साथ सरेंडर करने वाले नक्सली को घोषित इनाम की राशि दी जाती है.
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