
Ranchi : झारखंड को बिहार से अलग हुए 18 साल होने को हैं, लेकिन टीवीएनएल का मामला दोनों राज्यों के बीच नहीं सुलझा है. मामला हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट गया. बिहार और झारखंड के करोड़ों रुपये मुकदमे की वजह से खर्च हुए, लेकिन नतीजा अभी तक कुछ नहीं निकल पाया है. अब बिहार सरकार की तरफ से नया शिगूफा छोड़ा गया है. बिहार सरकार के ऊर्जा विभाग ने बाकायदा एक लेटर झारखंड सरकार को भेजा है. चिट्ठी में कहा गया है कि अगर झारखंड को टीवीएनएल चाहिए, तो वह आधी बिजली बिहार सरकार को दे. हालांकि, इस मामले पर झारखंड के ऊर्जा विभाग की तरफ से बिहार को कोई जवाब नहीं दिया गया है. विभाग जवाब तैयार करने में लगा हुआ है. जल्द ही झारखंड सरकार के ऊर्जा विभाग की तरफ से कुछ जवाब दिया जा सकता है.
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क्या है पूरा मामला
बिहार के राज्यपाल के नाम पर 99.99 फीसदी शेयर वाले बिजली कारखाने की नींव 1989 में बोकारो के ललपनिया में रखी गयी थी. 1996-97 में यहां 400 मेगावाट बिजली उत्पादन होने लगी. 2000 में बिहार विभाजन के बाद इस परियोजना पर झारखंड ने दावा ठोक दिया. दावेदारी का मूल कारण उसका झारखंड में होना बताया गया. 27 फरवरी 2001 को झारखंड ने बिजली कारखाने का अधिग्रहण कर लिया. इसके बाद मामला पटना हाई कोर्ट पहुंचा. हाई कोर्ट ने बिहार सरकार के पक्ष में फैसला दिया. तब झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी. बीते कई वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में केस की सुनवाई चल रही है. सुनवाई में झारखंड सरकार मुकदमा लड़ने में 15 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है. लंबे समय के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मुख्य सचिव को कहा कि बिहार झारखंड सरकार के साथ मिल-बैठकर समाधान निकालें. इसके बाद बिहार ने समाधान का रास्ता तैयार किया है.
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ज्वॉइंट वेंचर की अर्जी खारिज कर चुका है सुप्रीम कोर्ट
टीवीएनएल के मामले में बिहार और झारखंड के बीच विवाद की वजह से जब टीवीएनएल ने सुप्रीम कोर्ट से ज्वॉइंट वेंचर की अनुमति मांगी थी, तब बिहार ने इस पर आपत्ति जतायी थी और कहा था कि झारखंड सरकार चाहे, तो बिहार सरकार के साथ ज्वॉइंट वेंचर करे. लेकिन, उस समय निगम निजी कंपनी के साथ ज्वॉइंट वेंचर करने को इच्छुक था. सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर मौखिक रूप से कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और अर्जी को खारिज कर दिया था.
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टीवीएनएल एक नजर में
तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड की स्थापना 26 नवंबर 1987 में की गयी थी. तेनुघाट विद्युत निगम 2047 करोड़ रुपये का उपक्रम है. निगम के हिस्से की पूंजी लगभग 105 करोड़ है. कंपनी के इकरारनामा के समय बिहार सरकार ने 100 करोड़ रुपये का शेयर कैपिटल निर्धारित किया था. 1550 मेगावाट क्षमता वाले टीवीएनएल को तीन चरण में यूनिटों को पूरा करना था. पहले चरण में 210 मेगावाट की दो यूनिट, द्वितीय चरण में 210 मेगावाट की तीन यूनिट, तीसरे चरण में 250 मेगावाट की दो यूनिट का निर्माण होना था. लेकिन, यह काम पूरा नहीं हुआ. दूसरे चरण का काम भी शुरू नहीं हुआ है.




