
New Delhi: अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा बढ़ता जा रहा है. इस बीच अफगानिस्तान ने भारत से गुहार लगाई है कि वह उसे तालिबान से बचा ले. मंगलवार को अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ अतमार ने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से बात की. इस दौरान उन्होंने युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में तालिबान और विदेशी आतंकवादी समूहों के हमलों से तेजी से बिगड़ रही स्थिति हवाला दिया. इसके बाद हालात को बेहतर बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी मीटिंग बुलाने का आह्वान किया.
इसे भी पढ़ें : Tokyo Olympics : नीरज चोपड़ा का कमाल, जेवलिन थ्रो के क्वालीफिकेशन राउंड में टॉप पर, जानें- आज भारत के लिये कौन से मुकाबले हैं अहम
Called Indian FM HE @DrSJaishankar to discuss convening an emergency UN Security Council Session on AFG. UN & int’l community must play a greater role to stop the unfolding tragedy in🇦🇫 due to Taliban violence & atrocities. Appreciate the lead role of🇮🇳 as current UNSC President. pic.twitter.com/SLaRlUKHxC
— Mohammed Haneef Atmar محمد حنیف اتمر (@MHaneefAtmar) August 3, 2021
इधर भारत ने विश्व के मुल्कों को आगाह किया कि अफगानिस्तान के संकट का असर ना केवल पड़ोस पर बल्कि उससे भी बाहर तक होगा. तालिबान की तरफ साफ इशारा करते हुए उन्होंने साथ में यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर हिंसा, डराने-धमकाने या छिपे हुए अजेंडे के जरिए 21वीं सदी में वैधता प्राप्त नहीं की जा सकती है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के शैक्षणिक मंच के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अफगानिस्तान की जंग ने आतंकवाद की चुनौती बढ़ा दी है और सभी हितधारकों को इससे निपटने के लिए ‘‘स्पष्ट, समन्वित और एक समान’’ रुख अपनाना होगा.
जयशंकर ने कहा, ‘आज अफगानिस्तान में हम संक्रमण काल देख रहे हैं और इस जंग ने फिर से उसके लोगों के लिए चुनौतियां पैदा कर दी है. अगर इसे ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो ना केवल अफगानिस्तान के पड़ोस में बल्कि उससे बाहर भी इसके गंभीर असर होंगे.’ जयशंकर ने कहा कि सभी पक्षों को इन चुनौतियों से निपटने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
विदेश मंत्री ने कहा, ‘21 वीं सदी में बड़े पैमाने पर हिंसा, डराने-धमकाने या छिपे हुए अजेंडा के जरिए वैधता प्राप्त नहीं की जा सकती है. प्रतिनिधित्व, समावेश, शांति और स्थिरता का अटूट संबंध है.’
अमेरिकी सैनिकों की वापसी शुरू होने के बाद से अफगानिस्तान में तालिबान की हिंसा बढ़ गई है. भारत अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता में बड़ा हितधारक है. देश में सहायता और अन्य कार्यक्रमों में भारत तीन अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश कर चुका है. भारत एक राष्ट्रीय शांति और सुलह प्रक्रिया का समर्थन करता रहा है जो अफगान-नेतृत्व वाली, अफगान-स्वामित्व वाली और अफगान-नियंत्रित हो.
जयशंकर ने बहुपक्षीय निकायों में सुधार का भी आह्वान करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार को आगे नहीं टाला जा सकता है.
अफगानिस्तान में हिंसा खत्म करने की कही बात
अफगान विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि अतमार ने विदेशी लड़ाकों और आतंकवादी समूहों के साथ मिलीभगत से किए जा रहे तालिबान के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और क्षेत्र की स्थिरता एवं सुरक्षा पर उनके संभावित परिणामों के बारे में बात की. बयान में कहा गया है कि अतमार ने जयशंकर से तालिबान और विदेशी आतंकवादी समूहों की ओर से बढ़ती हिंसा एवं मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन पर बात की. उन्होंने प्रस्ताव दिया कि अफगानिस्तान में हिंसा की तत्काल समाप्ति पर ध्यान देने के साथ सुरक्षा परिषद की बैठक आयोजित की जाए.
As we take over UNSC Presidency for August, look forward to working productively with other members.
India will always be a voice of moderation, an advocate of dialogue and a proponent of international law. pic.twitter.com/kPRGnFOz87
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) August 1, 2021
उल्लेखनीय है कि भारत अगस्त महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है. अफगान विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर ने अफगानिस्तान में हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन के बढ़ते मामलों पर भारत की ओर से चिंता व्यक्त की और देश में शांति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया




