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CBI जांच शुरू होते ही बकोरिया से कांड से जुड़े कई अधिकारियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Ranchi:  8 जून 2015 को सतबरवा थाना क्षेत्र में बकोरिया के भेलवाघाटी में हुई कथित पुलिस नक्सली-मुठभेड़ की जांच शुरू कर दी गयी है. इसी क्रम में गुरुवार को सीबीआइ सेंट्रल फोरेंसिक लैब के डायरेक्टर एनबी वर्धन और सीबीआई के बड़े अधिकारी की ओर से घटनास्थल पर पूरी घटना का नाट्य रूपांतरण भी किया गया.

बताया जा रहा है कि इस पूरी जांच के दौरान जो बातें सामने आ रही हैं, उनके अनुसार बकोरिया कांड से जुड़े कई अधिकारियों और पूर्व अधिकारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

बता दें कि सीबीआई ने झारखंड हाइकोर्ट के आदेश के बाद 19 नवंबर 2018 को दिल्ली में मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी. इस मामले में केस नंबर RC SI 2018 S 2018 दर्ज किया गया है.

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बयान से पलटे तत्कालीन सतबरवा थानेदार

तत्कालीन सतबरवा थानेदार मोहम्मद रुस्तम सीबीआई टीम के द्वारा की गयी पूछताछ में अपने बयान से पलट गये हैं. हालांकि तत्कालीन थानेदार के बयान से पलटने की सीबीआई ने पुष्टि नहीं की है. सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान बकोरिया कांड में प्राथमिकी दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी मोहम्मद रुस्तम अपने बयान से पलट गये हैं.

इस घटना की प्राथमिकी दर्ज कर शिकायतकर्ता बने मो. रुस्तम ने सीबीआई की पूछताछ में पलामू सदर थाना के तत्कालीन प्रभारी हरीश पाठक के बयान का समर्थन किया था. यही नहीं, मो. रुस्तम ने सीबीआई के समक्ष ये भी कहा है कि मैंने खुद एफआइआर नहीं लिखी है. मुझे अफसरों ने लिखित एफआइआर लिखने का दबाव डालकर हस्ताक्षर कराया है.

हस्ताक्षर के बाद मैं शिकायतकर्ता बन गया. उल्लेखनीय है कि पलामू सदर के तत्कालीन थानेदार ने इस मुठभेड़ की एफआइआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद एजेंसी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है.

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मृतक के परिजनों ने की थी सीबीआई जांच की मांग

बता दें कि मृतकों के परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए हाइकोर्ट में राज्य की जांच एजेंसी सीआइडी की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी. सीबीआई ने पलामू के सदर थाना कांड संख्या 349/2015, दिनांक 09 जून 2015 के केस को टेकओवर करते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी.

इस केस के शिकायतकर्ता तत्कालीन सतबरवा ओपी प्रभारी मो. रुस्तम हैं.उन्होंने लातेहार के मनिका थाना क्षेत्र के उदय यादव, चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के निमाकातू निवासी एजाज अहमद, चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के मझिगांव निवासी योगेश यादव व नौ अज्ञात मृतक तथा एक अज्ञात नक्सली के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

मृतक के भाई ने दायर की थी याचिका

पुलिस मुठभेड़ में मारे गये उदय यादव के रिश्तेदार जवाहर यादव ने हाइकोर्ट में क्रिमिनल याचिका दाखिल की थी. जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने 22 मार्च 2018 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिसके बाद 22 अक्टूबर को हाइकोर्ट ने बकोरिया कांड में अपना फैसला सुनाया था.

शिकायतकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता आरएस मजूमदार ने कोर्ट को बताया था कि आठ जून 2015 को सतबरवा में पुलिस ने फर्जी नक्सली मुठभेड़ दिखा कर 12 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी. जिसमें पांच नाबालिग हैं. सुनवाई के दौरान उनकी ओर से कुल 22 बिंदुओं को कोर्ट के समक्ष रखा गया था.

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जवाबी कार्रवाई में 12 नक्सली मारे गये थेः पुलिस  

बकोरिया मुठभेड़ को लेकर पुलिस का कहना था कि 8 जून 2015 की देर रात पुलिस सतबरवा के बकोरिया गांव के पास सर्च अभियान चला रही थी. इस दौरान पुलिस पर नक्सलियों ने गोलीबारी प्रारंभ कर दी. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 12 नक्सली मारे गये थे.

पुलिस ने जानकारी दी थी कि करीब तीन घंटे तक मुठभेड़ चली और घटनास्थल से पुलिस ने एक वाहन, 8 रायफल, 250 कारतूस आदि जब्त किये थे.

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