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फरार अपराधी अमन साव ने फेसबुक पर जारी किया वीडियो, कहा, विकास तिवारी गैंग से मिलकर मुझे फंसा रहे हजारीबाग पुलिस के अफसर, देखें पूरा वीडियो

Ranchi: फरार अपराधी अमन साहू का फेसबुक पर एक वीडियो वायरल हुआ है. जिसमें वह हजारीबाग पुलिस की करतूत को बता रहे हैं. फेसबुक पर वायरल हुए वीडियो में अपराधी अमन साहू हजारीबाग एसपी पर आरोप लगाया है कि गैंगस्टर विकास तिवारी के कहने पर उनको फर्जी मुकदमा में फंसाया जा रहा है.

हजारीबाग पुलिस मेरे मेरे पीछे मेरा फर्जी एनकाउंटर के लिए पड़ी हुई है. इसके लिए मेरे विरोधी गुट से पुलिस ने पैसा भी ली है और मेरा एनकाउंटर करने के लिए पुलिस प्रयासरत भी है. जानिए फेसबुक पर वायरल हुए अपराधी अमन साहू के द्वारा वीडियो में क्या कहा गया है.

कोई भी केस में वांटेड नहीं होने के बाद भी पुलिस जेल गेट के पास से मुझे उठा ले गयी

अमन के फेसबुक पर वायरल वीडियो में अमन साहू कर रहे हैं कि मैं इस वीडियो के माध्यम से हजारीबाग जिला की पुलिस की करतूत बताना चाहता हूं.

पिछले महीने 24 सितंबर को मैं रामगढ़ जेल से विभिन्न मुकदमों में हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर जैसे ही जेल से बाहर निकला पुलिस की टीम जेल गेट के पास से मुझे उठा ले गयी और गुप्त रूप से हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाने में पूछताछ के नाम पर रखा गया.

जबकि मैं सभी मुकदमों में अदालत से जमानत लेकर बाहर निकला था और किसी भी केस में वांटेड नहीं था और ना ही मेरे ऊपर कोई मुकदमा लंबित है. वहां जाने के बाद मुझसे जबरन स्टेटमेंट लिया जा रहा था कि उरीमारी में जो मजदूर नेता गहन टुडू की हत्या हुई थी उसमें मैं साजिशकर्ता था.

अमन साहू ने वीडियो में कहा है कि समाचार पत्र के माध्यम से पता चला कि डीआइजी हजारीबाग के द्वारा कहा जा रहा है कि 2 महीने पहले भी अमन साहू के द्वारा एनटीपीसी के अधिकारियों से रंगदारी की मांग की गयी थी. यह सब बात फर्जी है. पुलिस के कुछ बड़े अधिकारियों द्वारा मेरे विरोधी गुट विकास तिवारी और निशी पांडे गिरोह को मदद किया जा रहा है और उसके बदले पैसे लिये जा रहे हैं.

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हम जैसे लोगों को अपराधी बना रही है पुलिस

अपराधी अमन साहू ने बताया कि 20 मई 2019 को भी दुमका जेल से सभी मामले में जमानत मिलने के बाद जैसे ही वह बाहर निकला उसे पुलिस पकड़कर पतरातू थाना लेकर गयी. उसे पतरातू थाना लाकर फर्जी आर्म्स के मुकदमे में जेल भेज दिया गया था.

जेल भेजने के तीन दिन बाद फिर से एक और आर्म्स केस प्रोडक्शन वारंट का केस मुझपर कर दिया गया और बताया गया कि मेरे जेल आने के बाद मेरे गुर्गे बरकाकाना साइडिंग में किसी घटना का अंजाम देने की योजना बना रहे थे.

इनसभी को लेकर मुझपर फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया. जिसके बाद मैं लगभग चार महीने तक जेल में रहा और फिर इन सभी मामलों में कोर्ट से मुझे जमानत मिल गयी. लेकिन जैसे ही जेल से बाहर निकला दोबारा पुलिस के द्वारा मुझे पकड़ लिया गया.

इस तरह से मैं पिछले 4 सालों से रामगढ़ पुलिस, हजारीबाग पुलिस से त्रस्त हूं. जेल में रहने के दौरान मेरे ऊपर क्राइम कंट्रोल एक्ट (सीसीए) लगाया गया. उसके बाद मुझे बताया गया कि रामगढ़ जिले के व्यवसाई मेरे डर से पलायन कर रहे हैं. यह सब फर्जी बात है.

जिले में कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारी हैं जिनको पैसे कमाने की आदत हो गयी है, वह लोग छोटे अधिकारियों पर दबाव बनाकर जबरन मेरे खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करवाते हैं. ज्यादा से ज्यादा दिन जेल में रखकर हम जैसे लोगों को अपराधी बना देती है पुलिस.

मुख्यधारा में लौटना चाहता हूं: अमन साहू

वीडियो में अमन साहू ने कहा है कि मैं मुख्यधारा में आना चाहता हूं. पिछली बार भी जेल से निकला और फिर से मुझे जेल भेज दिया गया. मैंने जेल से कई बार अधिकारियों को बंदी आवेदन लिखा लेकिन इसकी कोई सुनवाई नहीं हुई.

इसके बाद जब मैं जेल से जमानत पर बाहर निकला तो फिर से 24 सितंबर को जेल गेट के पास से ही पुलिस ने मुझे उठा लिया और बड़कागांव थाना में मुझे चार दिन रखा गया लेकिन इसकी जानकारी मेरे परिजनों को नहीं दी गयी.

नियम कहता है कि जब किसी अपराधी को पुलिस गिरफ्तार करती है तो 24 घंटे के अंदर उसे कोर्ट में उपस्थित करना होता है, लेकिन मुझे 24 सितंबर को उठाया गया और 28 सितंबर को मैं थाना से भागा तो इससे पहले चार दिनों तक पुलिस क्या कर रही थी. यह सोचने का विषय है. मुझे कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया.

जब पूछताछ करना था तो गहन टुडू की हत्या 15 सितंबर को हुई थी और मैं 24 सितंबर को जेल से बाहर निकला. अगर मैं उसकी हत्या में शामिल था तो फिर हजारीबाग एसपी, डीआइजी, बड़कागांव थाना प्रभारी और उरीमारी थाना प्रभारी ने मुझे रिमांड में लेकर क्यों पूछताछ नहीं किया.

उससे भी दो महीने पहले की घटना है एनटीपीसी के अधिकारियों से रंगदारी मांगने की. रंगदारी जेजेएमपी संगठन के नाम से मांगी गयी है. क्या सच है क्या झूठ है मैं नहीं जानता, लेकिन इसमें मुझे आरोपित बनाया जा रहा है. और मुझपर इल्जाम लगाया जा रहा है कि मैने अपने आदमियों से बोलकर रंगदारी की मांग करायी है.

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मुझे जबरन अपराध करने के लिए मजबूर कर रही है पुलिस 

अमन का कहना है कि पुलिस कहती है कि मैं फरार हूं. बहुत सारे मामले मेरे ऊपर लंबित हैं. जब यह सब था तो मैं कैसे जेल से बाहर निकल गया सीसीए के तहत क्यों नहीं कार्रवाई की गयी.

पुलिस मुझे जबरन अपराध करने के लिए मजबूर कर रही है. पुलिस कभी हमें गैंगस्टर का तलवा देती है तो कभी सुशील श्रीवास्तव गिरोह का शूटर बताती है और कभी जेजेएमपी संगठन का सदस्य बताती है. पुलिस यह डिसाइड कर ले कि मैं किस गिरोह का सदस्य हूं मैं क्या करता हूं मेरा काम क्या है.

पुलिस प्रशासन एक खास गिरोह को कर रही है मदद

रामगढ़, हजारीबाग और रांची जिले के कोई भी व्यवसायी को मुझसे परेशानी है तो मुझे बताएं. प्रशासन के वरीय अधिकारी डीजीपी, गृह सचिव और मुख्यमंत्री हैं उन तक क्यों नहीं मेरी शिकायत पहुंचती है.

पुलिस प्रशासन एक खास गिरोह को मदद कर रही है. उनको लाभ पहुंचाने के लिए उनके भी जितने विरोधी हैं सबको कुछ न कुछ मामले में फंसाकर जेल भेज देती है और बदले में हर माह मोटा पैसा उनसे लेती है.

मेरे थाना से भागने के बाद बड़कागांव थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया. थाना प्रभारी भी जानते होंगे कि गहन टुडू की हत्या में मेरा कोई हाथ नहीं है. सरकार चाहे तो किसी भी स्वतंत्र एजेंसी से इस मामले की जांच करा सकती है.

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हजारीबाग एसपी, डीआइजी जबरन फर्जी मुकदमा में जेल भेजना चाहते हैं

अमन साहू ने बताया कि इससे पहले हजारीबाग जिले में मेरा कोई मुकदमा लंबित नहीं है. रामगढ़ जिला प्रशासन ने भी हमें क्लीन चिट दे दिया था. जेल से मैं निकलकर मुख्यधारा जुड़ना चाहता था, लेकिन हजारीबाग एसपी और डीआइजी जबरन मुझे फर्जी मुकदमा में जेल भेजना चाहते हैं.

मैं थाना से भाग गया, अगर नहीं भागता तो मेरी हत्या भी कर दी जाती. मैं कोई अपराध नहीं कर रहा हूं फिर भी जमानत से छूटने के बाद भी भागा-भागा फिर रहा हूं. ना कोर्ट जा पा रहा हूं और ना ही अपने मुकदमे की पैरवी कर पा रहा हूं. इस डर से कि जब कोर्ट जाऊंगा तो पुलिस मुझे कहीं फिर से गिरफ्तार कर फर्जी मुकदमे में जेल न भेज दे.

पुलिस की कारगुजारी नहीं होती है उजागर

आम लोगों को पुलिस केस लगाकर जेल भेजती है बाद में कोर्ट से जमानत होती है और मामले की जांच होती है. लेकिन पुलिस के ऊपर जांच पुलिस ही करती है. इसलिए पुलिस की कारगुजारी उजागर नहीं हो पाती है.

मुझे कोर्ट पर भरोसा है इसलिए अबतक बर्दाश्त कर रहा हूं, जब बर्दाश्त से बाहर हो जाएगा तो मैं भी कुछ करूंगा बैठकर नहीं रहूंगा. जब पुलिस हमें गैंगस्टर ही बनाना चाहती है तो फिर बनूंगा.

मैं अपनी सफाई मुख्यमंत्री, डीजीपी, गृह सचिव, और सुप्रीम कोर्ट को भिजवा रहा हूं. मैं अपने वकील से सलाह मशविरा ले रहा हूं. जब मुझे विश्वास दिलाया जाएगा कि मेरे ऊपर जितने फर्जी मुकदमे दर्ज हैं, सबकी जांच होगी और मैं उन सभी मुकदमों से बरी हो जाऊंगा तभी मैं कोर्ट में सिलेंडर करूंगा, नहीं तो नहीं करूंगा.

पुलिस मेरे पीछे पड़ी हुई है. फर्जी एनकाउंटर के लिए मेरे विरोधी गुट से पैसे भी लिये गये हैं.

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