
Ranchi. मदरसा शिक्षा आलिम और फाजिल की परीक्षा का मामला फंस गया है. जैक ने 2017-2020 के आलिम (बीए) औऱ 2018-20 की फाजिल (एमए) की परीक्षा लेने से हाथ खड़ा कर दिया है. यह तब है जब पिछली बार जैक ने ही 2019 में परीक्षा ली थी. इसमें दोनों क्लास से तकरीबन 10,000 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे. भविष्य की चिंताओं को लेकर रविवार को कई छात्र सड़कों पर उतरे.
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कैरियर से खिलवाड़
झारखंड छात्र संघ के अध्यक्ष शमीम अली के अनुसार आलिम एवं फाजिल की परीक्षा झारखंड अधिविध परिषद (जैक) लेता रहा है. इस बार उसने सरेंडर कर दिया है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. वर्ष 2000 में अलग राज्य बनने के बाद से 2019 तक आलिम व फाजिल की परीक्षा जैक ही लेता रहा है.
इस बार एकाएक सत्र 2017-2020 (आलिम) और सत्र 2018-2020 (फाजिल) की परीक्षा लेने से उसने इंकार कर दिया है. यह तब है जब जैक ने ही छात्रों का पंजीयन भी किया है. उसे परीक्षा नहीं लिये जाने सम्बंधी किसी तरह का कोई आदेश सरकार ने जारी भी नहीं किया है. इसके बावजूद वह तानाशाही रवैया अपना रहा है. इससे तकरीबन 8000 छात्रों के सामने भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गये हैं.
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अगले सत्र से रांची यूनिवर्सिटी की भूमिका
झारखंड छात्र संघ के अनुसार पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक अबू इमरान ने आलिम और फाजिल की परीक्षाएं लिये जाने के संबंध में रांची यूनिवर्सिटी को प्रस्ताव तैयार करने को कहा था. नवम्बर 2017 में उनके द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार रांची विश्वविद्यालय को आलिम (बीए) और फाजिल (एमए) का रेगुलेशन, पाठयक्रम संचालन, परीक्षा औऱ दूसरे कामों के लिए प्राधिकृत किया गया था. विश्वविद्यालय ने नियमावली तैयार भी कर ली थी.
पर उनके जाने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने 2019 में रांची विश्वविद्यालय से प्रस्ताव वापस ले लिया था. इसके बाद सरकार के निर्देश पर जैक को ही आलिम और फाजिल की परीक्षा लेनी पड़ी थी. अगले सत्र से भले रांची यूनिवर्सिटी परीक्षाएं ले पर इस बार जैक को ही आगे आना होगा. परीक्षा लिये जाने के मसले पर सीएम हेमंत सोरेन, मंत्री आलमगीर आलम और शिक्षा विभाग को इस दिशा में पहल करनी चाहिये.
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