
Ranchi: झारखंड जनाधिकार महासभा के संवादाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए देश के जाने-माने अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने कहा कि मोदी सरकार की नीति और सोच संविधान के खिलाफ है. मोदी सरकार का विकास बहुत ही संकीर्ण है. सामाजिक क्षेत्र में पिछले 5 सालों से किसी तरह का परिवर्तन नहीं दिख रहा है. सरकार के विकास का मतलब कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट से है और दुनिया में सर्वश्रेष्ठ दिखने से है. जबकि सामाजिक बदलाव के बिना देश आगे नहीं जा सकता जा सकता है.
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जनता के अधिकारों और सिद्धांतों पर हो रहे हैं हमले
संवादाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए महासभा की ओर से कहा गया कि जनता के अधिकार और सिद्धांतों पर राज्य में लगातार हमले हो रह हैं. राज्य में भूमि अधिग्रहण क़ानून में बदलाव, भूख से हो रही मौतें, भीड़ द्वारा लोगों की हत्या, आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक और महिलाओं पर बढ़ती हिंसा, सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रताड़ना, सरकार द्वारा प्रायोजित संप्रदायिकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला, आदिवासियों के पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पर हमला एवं दमन बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे हालात में 2019 का चुनाव लोकतंत्र और संविधान के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. वही महासभा की ओर से कहा गया कि राज्य में सत्तापक्ष लोकतंत्र को कमज़ोर करने में तुला हुआ है, तो विपक्षी राजनैतिक दलों में भी जन मुद्दों पर प्रतिबद्धता नहीं दिख रही है.
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क्या हैं राजनीतिक दलो से महासभा का मांगें
महासभा की ओर से सभी राजनीतिक दलो के समक्ष ग्रामसभा और प्राकृतिक संसाधन, नागरिक अधिकार, स्थानीयता और आरक्षण, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा, कृषि, धर्म, संस्कृति और भाषा पारदर्शी और जवाबदेह शाशन एवं चुनावी सुधार को लेकर प्रतिबद्धता दर्शाते हुए पूरा करने की मांग की गयी.
- भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून 2018 (झारखंड) व लैंड बैंक नीति को रद्द किया जाये. इन नीतियों के तहत ली गयी अथवा चिन्हित की गयी ज़मीन को तुरंत ज़मीन मालिक / ग्राम सभा को लौटाई जाये.
- ईचा-खरकाई बाँध, गोड्डा अडाणी प्रोजेक्ट, पलामू हाथी कारीडोर, मंडल डैम एवं ऐसी सभी परियोजनाओं को रद्द किया जाये .
- समता जजमेंट, पांचवीं अनुसूची के प्रावधान और पेसा कानून, वनाधिकार कानून को पूर्ण रूप से लागू किया जाये. निजी व सामुदायिक पट्टों के सभी दावों को स्वीकार किया जाये. पेसा की नियमावली बनायी जाये.
- ऐसे कानून जिन्हें सरकार द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन और सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रतारित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उन्हें तुरंत निरस्त किया जाये. उदहारण के लिए – भारतीय दंड संहिता की धारा 124 क (राजद्रोह) एवं धारा 499 (मानहानि), विधिविरुद्ध क्रिया – कलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) एवं राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA). झारखंड में कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए दर्ज सारे मामलों को वापस लिये जायें.
- लम्बे समय से जेल में बन्द विचाराधीन कैदियों की तुरंत रिहाई की जाये. राज्य के 3000 से भी अधिक आदिवासी जिन्हें माओवाद के फर्ज़ी मुकदमे के अंतर्गत जेल में विचारधीन कैदी के रूप में सालों से रखा गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाये.
- खूंटी में पत्थलगड़ी को संविधान विरोधी करार कर उसके नाम पर प्रशासनिक और सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे अत्याचार को तत्काल रोका जाये, सारे मुकदमों की वापसी, पुलिस कैंपों की वापसी, पीड़ितों को मुआवजा एवं दमन के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये.
- राज्य की वर्तमान स्थानीयता नीति रद्द की जाये एवं झारखंड में जिनका मूल गांव है, केवल ऐसे लोगों को बुनियादी स्थानीय मानने की नीति बनायी जाये. सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति में दलित, आदिवासी व पिछड़े वर्ग को कम-से-कम 50% आरक्षण सुनिश्चित किया जाये. महिलाओं के लिए हर क्षेत्र में कम-से-कम 33% आरक्षण लागू किया जाये.
- आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लिए 10% आरक्षण (जो कि मुख्यत: सवर्णों के लिए आरक्षण व्यवस्था है) की व्यवस्था समाप्त की जाये क्योंकि यह आरक्षण व सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है.
- सभी नागरिकों के लिए सार्वजानिक बुनियादी सुविधाएं एवं सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाये. भोजन, पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं मातृत्व लाभ. सभी जन कल्याणकारी योजनाओं एवं सरकारी सुविधाओं के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली की अनिवार्यता समाप्त की जाये.
- वर्तमान रोज़गार के अधिकार (नरेगा के माध्यम से) का विस्तार शहरी क्षेत्रों में किया जाये और कुशल मज़दूरी को भी इसके दायरे में लाया जाये और मजदूरी बढाई जाये.
- शिक्षा के अधिकार का दायरा बढ़ाकर बच्चों के लिए 12वीं कक्षा तक की शिक्षा समान तथा नि:शुल्क की जाये, झारखंड में विद्यालयों के विलय के फैसले को वापस लिया जाये.
- कूषि क्षेत्र में स्वामीनाथन समिति की सभी सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू किया जाये एवं कृषि उत्पादों की लागत से कम-से-कम 50% अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाये. एक बार में पूर्ण कर्ज़ माफ किया जाये.
- वर्षा जल व नदियों, नालों व वर्तमान डैमों पर आधारित सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये.
- झारखंड के गोवंश अधिनियम को रद्द किया जाये और मवेशियों के व्यापार पर प्रतिबन्ध हटाए जाये.
- झारखंड धर्म स्वातंर्त्य कानून को रद्द किया जाये एवं सरना या अन्य किसी नाम के स्वतंत्र आदिवासी धर्म को स्वतंत्र मान्यता दी जाये.
- झारखंड की अपनी आदिवासी एवं आंचलिक भाषाओं को सरकारी कामकाज की भाषा एवं सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का अतिरिक्त माध्यम बनाया जाये.
- सच्चर कमेटी की अनुशंसाओं के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय के चहुमुखी विकास के लिए विशेष नीति बनायी जाये.
- राजनीतिक दलों के चंदों की पूर्ण पारदर्शिता हो, नागरिकों द्वारा सरकारी कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों पर मुकदमा दर्ज कराने पर लगाए गए सारे प्रतिबंध समाप्त हो. सूचना का अधिकार क़ानून में किसी प्रकार की छेड़-छाड़ न हो.
प्रेस वार्ता को भारत भूषण चौधरी, मंथन,ज्याँ द्रेज़, स्टेन स्वामी व तारामणि साहू से संबोधित किया.




