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गोमिया प्रखंड भवन निर्माण में उप प्रमुख मीना देवी ने लगाया अनियमितता का आरोप

Gomia : गोमिया ब्लॉक कैंपस में लगभग 4 करोड़ की लागत से बन रहे प्रखंड सह अंचल कार्यालय के भवन निर्माण कार्य में विभागीय नियमों की अनदेखी करने का मामला सामने आया है. प्रखंड सह अंचल कार्यालय 3 करोड़ 63 लाख की लागत से नया भवन का निर्माण होना है. निर्माण कार्य में प्राक्कलन की अनदेखी करने का आरोप गोमिया के उप प्रमुख मीना देवी ने लगाया है. उप प्रमुख का आरोप है कि करोड़ों के भवन निर्माण में विभागीय मानकों के अनुरुप कार्य नहीं किया जा रहा है.

जाली के मेन पॉइंट पर एक भी पीलर खड़ा नहीं

इस आशय का एक पत्र क्रमश: झारखंड भवन निर्माण विभाग रांची, अनुमंडल पदाधिकारी बेरमो एवं अंचलाधिकारी गोमिया को पत्र भेजकर कहा है कि गोमिया के नये प्रखंड भवन निर्माण में बुनियादी गड़बड़ियां की जा रही है. बुनियाद का जाली 4″×4″, 5″×5″ एवं 6″×6″ फीट का सही है, परंतु जाली के मेन पॉइंट पर एक भी पीलर खड़ा नहीं है. साथ ही दीवार जोड़ने व टाइबीम को रोकने के लिए उसके बगल में छोटे-छोटे पिलर भी फॉल्स है. वहीं जाली के पॉइंट पर अवैध बुनियाद का पिलर खड़ा करवाया है. परिणामस्वरूप जाली के बीचो-बीच पॉइंट पर भवन का पिलर नहीं होने से बनने वाला उक्त भवन कमजोर होगा. जिससे भविष्य में वह प्रखंड भवन कभी भी क्षतिग्रस्त होकर गिर सकता है जो प्रथम दृष्टया ही भवन निर्माण की गुणवत्ता से अंदाजा लगाया जा सकता है.

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निर्धारित मजदूरी से कम का भुगतान

आलम यह है कि करोड़ों की लागत से होने वाले भवन निर्माण में जंग लगे छड़ों को उपयोग में लाया जा रहा है. उक्त भवन निर्माण शिकायत पत्र में यह भी कहा है कि यहां संवेदक के द्वारा कार्यरत भवन निर्माण मजदूरों को राज्य सरकार के श्रम विभाग द्वारा निर्धारित मजदूरी से कम का भुगतान किया जा रहा है. इसके अलावा संवेदक के रिश्तेदार एवं उनके पड़ोस के ही राज मिस्त्रियों द्वारा निम्न गुणवत्ता के ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है. उप प्रमुख ने प्रखंड विकास पदाधिकारी गोमिया से शिकायत करने पर कनीय अभियंता के नाम जांच पत्र निर्गत किया परंतु अब तक ठंढे बस्ते पर ही धरा है.

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प्रशासनिक अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई की मांग

पत्र में यह भी है उल्लेख है कि निर्माण स्थल पर योजना का बोर्ड तो लगाया गया है, परंतु आधुनिक गुण नियंत्रण उपकरण प्रयोगशाला होना जो आवश्यक नहीं है. निर्माण स्थल पर कभी कभार ही कनीय अभियंता व सहायक अभियंता दिखाई पड़ते हैं. बावजूद इसके इस ओर ध्यान देने की जरुरत न तो विभागीय पदाधिकारी महसूस करते हैं और न ही संबंधित विभाग के इंजीनियर. उप प्रमुख मीना देवी ने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई की मांग की है.

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