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सरकार ने सालाना जीएसटी रिटर्न भरने के लिए ऑनलाइन फैसिलिटी ऐक्टिवेट की

NewDelhi :  सरकार ने फॉर्म GSTR-9 ऑनलाइन कर दिया गया है, जिसका ट्रेड-इंडस्ट्री को बेसब्री से इंतजार था. यानी सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 का सालाना जीएसटी रिटर्न भरने के लिए ऑनलाइन फैसिलिटी ऐक्टिवेट कर दी है. बता दें कि जीएसटी लागू होने के बाद के इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने के लिए भरा जाने वाला यह सबसे जरूरी फॉर्म है. इसे भरने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2018 थी, लेकिन आखिरी दिनों तक यह फसिलिटी ऑनलाइन नहीं होने के चलते इसकी डेट छह महीने आगे बढ़ानी पड़ी थी.  जीएसटीएन के एक अधिकारी के अनुसार   फॉर्म जीएसटीआर-9 बुधवार से ऐक्टिवेट कर दिया गया है और यह कॉमन पोर्टल पर फाइलिंग के लिए उपलब्ध है. इसके तहत जुलाई 2017 से 31 मार्च 2018 की डिटेल्स भरी जा सकती हैं. GSTR-9, GSTR-9A और ऑडिट फॉर्म GSTR-9C भरने की आखिरी तारीख 30 जून 2019 है, लेकिन ये फॉर्म वही टैक्सपेयर भर पायेंगे, जिन्होंने इस अवधि के सभी महीनों या तिमाहियों के GSTR-1 और GSTR-3B भर दिये हों.

एनुअल रिटर्न के तहत 31 मार्च 2018 तक के इनपुट टैक्स क्रेडिट का आकलन संबंधित महीनों के भरे गये GSTR-1 और ऑटोपॉपुलेटेट GSTR-2A के आधार पर किया जायेगा. जिन लोगों ने 29 जनवरी 2019 तक संबंधित महीने का GSTR-1 भर दिया है, उनका GSTR-2A अपडेशन 1 मार्च 2019 तक हो गया है. अगर किसी सप्लायर को उसके क्रेडिट मिसिंग दिख रहे हैं तो उसे अगले अपडेशन तक इंतजार करना होगा.

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एनुअल रिटर्न रिवाइज नहीं किया जा सकता है…

जानकारों का कहना है कि एनुअल रिटर्न रिवाइज नहीं किया जा सकता है, ऐसे में ज्यादातर डीलर आखिरी समय तक इंतजार करेंगे. हालांकि अभी ऑनलाइन फसिलिटी शुरू कर की गयी है, लेकिन सरकार टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए GSTR-9 का एक ऑफलाइन टूल भी लेकर आयेगी, जिसे ऑफलाइन भर कर बाद में ऑनलाइन किया जा सकता है. जहां एनुअल रिटर्न सभी व्यापारियों को भरना है, चाहे उनका टर्नओवर कितना भी हो, वहीं जिन ट्रेडर्स का टर्नओवर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उन्हें अपने बिजनस का सीए से ऑडिट कराकर ऑडिट रिपोर्ट भी फाइल करनी होगी, जो GSTR-9C के रूप में जाएगी. एनुअल रिटर्न फाइलिंग के बाद संबंधित महीनों की सप्लाई में कोई मिसिंग इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं लिया जा सकेगा. हाल तक लाखों कारोबारियों ने पहले वित्त वर्ष के किसी महीने का रिटर्न ही नहीं भरा था, ऐसे में उनकी ओर से सालाना रिटर्न भरे जाने की संभावना भी खत्म हो गयी थी. इससे उनके सप्लायर्स और रिसीवर्स के क्रेडिट में भी दिक्कतें आने की संभावना थी. दिसंबर में लेटफीस माफ होने के बाद से रिटर्न फाइलिंग में तेजी आयी है और उम्मीद की जा रही है कि अब ज्यादा संख्या में लोग इसका फायदा उठा सकेंगे.

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