
Ranchi: पलामू जिला के कठौतिया कोल माइंस के लिये जमीन खरीद की प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी पर सुप्रीम कोर्ट जुलाई माह में सुनवाई करेगी. इस मामले को लेकर दायर स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. पलामू निवासी राजीव कुमार ने एसएलपी दायर किया था. जिस पर 25 जनवरी को सुनवाई हुई. कोर्ट ने एसएलपी को स्वीकार कर लिया है. साथ ही पांच माह बाद जुलाई माह में सुनवाई करने की बात कही है.
रॉयल्टी की चोरी करने का भी आरोप
राजीव कुमार ने हिंडाल्को, उषा मार्टिन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी व पलामू के तत्कालीन डीसी पूजा सिंघल समेत 13 लोगों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) (WP(PIL) No-4133/2016 दाखिल किया था. जिसमें कंपनी और तत्कालीन डीसी पूजा सिंघल पर अरबों रुपये के सरकारी राजस्व का नुकसान पहुंचाने, छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 कानून का उल्लंघन कर रैयतों से जबरन जमीन लेने, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने, नाजायज तरीके से खनन करने और रॉयल्टी की चोरी करने का आरोप लगाया गया है.
उल्लेखनीय है कि पलामू जिला के कठौतिया कोल माइंस के लिए सरकार ने 165 एकड़ गैर मजरुआ जमीन कंपनी को दी थी. इसमें से 82 एकड़ जमीन फॉरेस्ट लैंड था. जिसे गैर मजरुआ बताकर कंपनी को दी गयी. इसे लेकर राजीव कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने याचिका को अस्वीकृत कर दिया था. साथ ही राजीव कुमार पर 50 हजार रुपया का जुर्माना लगाया था. हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राजीव कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया था. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया था और हाईकोर्ट के 50 हजार रुपये वाले आदेश को निरस्त कर दिया था.
याचिका में जिन्हें आरोपी बनाया गया हैः-
मुख्य सचिव
राजस्व सचिव
कार्मिक सचिव
पूजा सिंघल (व्यक्तिगत)
उदय कुमार पाठक (तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी)
आलोक कुमार (तत्कालीन पड़वा सीओ)
राजीव सिन्हा
कंपनी और प्रशासन पर जो आरोप लगाये गये हैं:-
– जिला प्रशासन ने कठौतिया कोल माइंस लेने वाली कंपनी के पक्ष में काम किया.
– गैरकानूनी तरीके से गरीबों की जमीन ली.
– रैयतों से करीब 500 एकड़ जमीन ली गयी.
– सरकार ने करीब 165 एकड़ जमीन कंपनी को 30 वर्ष के लिए लीज पर दी, जिसमें 82 एकड़ जमीन वन विभाग की थी.
– जिस जमीन पर कोल माइनिंग हुई, उसे कृषि कार्य दिखाकर राजस्व की चोरी की गयी.
– खेती योग्य जमीन को भी टांड़ जमीन दिखाकर अधिग्रहण किया गया.
– सारा गलत काम पलामू की तत्कालीन डीसी पूजा सिंघल व उनके अधीनस्थ अधिकारियों के सहयोग से हुआ.
– कंपनी ने 105 करोड़ रुपया जमीन अधिग्रहण के लिये जमा किया था, उसे वापस पाने के लिए सरकार को आवेदन दिया है. जबकि कंपनी पर अब भी सरकार का 400 करोड़ रुपया बकाया है.
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