
Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास की ओर से डुमरी (गिरिडीह) के अंचल अधिकारी के खिलाफ एसीबी द्वारा कार्रवाई किये जाने के बयान के बाद मामला और गरमा गया है. इसपर राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की ओर से 14 जनवरी के बाद आंदोलन करने का निर्णय भी लिया गया है. डुमरी के जामताड़ा की जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ है, उसके लिए जिला प्रशासन द्वारा किये गये भुगतान की वसूली का आदेश 7.5.2018 को उपायुक्त की तरफ से दिया गया था. उपायुक्त ने प्लॉट नंबर 2486, 2489 और 2490 की भूमि को लेकर भुगतान किये गये मुआवजे की वसूली का आदेश जिला भू अर्जन पदाधिकारी को दिया था. उपायुक्त ने 20 मई तक जिला भू अर्जन पदाधिकारी को समय भी दिया. पर प्रशांत जायसवाल और उनके सहयोगियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी. इसपर भी कार्रवाई नहीं होने पर डुमरी सीओ ने 28.12.2018 को डीसी को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था.
जिला परिषद की 11.26 एकड़ भूमि पर कब्जा की हो रही है कोशिश
अंचल अधिकारी ने अपने पत्र में लिखा है कि जिला परिषद सदस्य प्रशांत जायसवाल ने इस जमीन को हड़पना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने एड़ी-चोटी का जोर भी लगाया और कई तरह के हथकंडे भी अपनाते रहे हैं. इनके द्वारा जिला परिषद की जमीन पर विवाह मंडप बनवाने की कोशिश की गयी. इसमें प्रशांत जायसवाल ने सुरेंद्र साव नाम के व्यक्ति और पंचायत समिति की सदस्य सुनीता देवी की मदद भी ली थी. इतना ही नहीं झारखंड हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर बड़ी इमारत बनाने की कोशिश की जा रही है. इसमें भू माफियाओं का साथ लिया जा रहा है. पहले से इस भूमि पर विद्यालय और रेफरल अस्पताल बने हुए हैं. रेफरल अस्पताल के जिर्णोद्धार के संबंध में जब भी कोशिश की जाती है. हाईकोर्ट पर हस्तक्षेप याचिका दायर कर उसे रुकवा दिया जाता है. प्लॉट के एक हिस्से में बन रहे भवन का निर्माण कार्य जब रुकवा दिया गया, तो हाईकोर्ट में अधिवक्ता अतनु बनर्जी की तरफ से इंटरलोकेटरी एप्लीकेशन दाखिल करा दिया गया है.
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