
Ranchi: घुसपैठ से जुड़े मामले में गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक रोनी मंडल की ओर से पीएमएलए कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट में हुई। मामले में हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने ईडी का पक्ष सुनने के बाद रोनी मंडल की याचिका खारिज कर दी। ईडी की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि आरोप पत्र दाखिल करने के बाद कोर्ट के संज्ञान आदेश के सुनवाई के दौरान रोनी मंडल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट से जुड़े थे। इसलिए उनकी याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। मामले में ईडी के अधिवक्ता अमित कुमार दास एवं अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा।
दरअसल, प्रार्थी ने पीएमएलए की विशेष अदालत द्वारा मामले में लिए गए संज्ञान को चुनौती दी थी। प्रार्थी की ओर से कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हवाला देते हुए बताया गया था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 (1) के तहत पीएमएलए की विशेष अदालत किसी आरोपी का पक्ष सुने बिना मामले में संज्ञान नहीं ले सकती है। इसलिए पीएमएलए की विशेष अदालत द्वारा दिए गए संज्ञान आदेश अवैध है।
क्या है मामला
बांग्लादेशी घुसपैठ मामले में एक महिला समेत 4 आरोपी को ईडी ने 12 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया। इनमें दो बांग्लादेशी नागरिक रोनी मंडल, समीर चौधरी है जबकि दो भारतीय नागरिक पिंटू हलधर और पिंकी बसु मुखर्जी है. आरोप है कि बांग्लादेशी नागरिक रोनी मंडल ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर पासपोर्ट बनाया था .जिसको लेकर पासपोर्ट ऑफिस ने रोनी मंडल को नोटिस जारी किया था.वही बांग्लादेशी नागरिक संदीप चौधरी करीब 4 साल से पिंकी बासु मुखर्जी के घर पर रह रहा था।
बांग्लादेशी घुसपैठ मामले को लेकर 11 नवंबर 2024 को झारखंड और पश्चिम बंगाल के 17 ठिकानों पर ईडी ने छापेमारीकी थी.उस छापेमारी के बाद ये सभी चारों को ईडी ने पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था.छापेमारी में फर्जी आधार,फर्जी पासपोर्ट ,अवैध हथियार समेत कई अचल संपत्ति के दस्तावेज,नकदी और गहने ईडी ने बरामद किया था .इन सभी पर मानव तस्करी का आरोप है.बरियातू थाना में दर्ज कांड संख्या 188 /2024 को ईडी ने टेकओवर किया है.




