
Ranchi: छोटानागपुर राज, रांची की गद्दी लंबे समय से खाली है. फिलहाल इसका कोई उत्तराधिकारी नहीं है. ऐसे में इस पर अब पड़हा कानून के हिसाब से नियंत्रण किये जाने का दावा किया जाने लगा है. साधु लाल मुंडा, सुतियाम्बेगढ (महामंत्री, वर्तमान पता- रातु गढ़, रांची) की ओर से अखबारों में एक सूचना जारी की गयी है. इसमें अब छोटानागपुर राज की गद्दी और व्यवस्था को पड़हा कानून से नियंत्रित किये जाने दी गयी है. कहा गया है कि छोटानागपुर राज उत्तराधिकार विहीन हो चुका है. छोटानागपुर महाराजा मदरा कान्तदेव सिंह मुंडा के दो बेटे थे- बड़े बेटे मणी मुकुट राय और दूसरा फणीमुकुट राय (दत्तक). महाराजा ने योग्यता के आधार पर फणीमुकुट को गद्दी सौंप दी थी. साधु के मुताबिक, आज स्थिति यह हो गयी है कि इस वंश का कोई उत्तराधिकारी (पुरुष सदस्य) शेष नहीं है. ऐसे में महाराजा मदरा कान्तदेव सिंह के वंशज महाराजा मदरा मुंडा केंद्रीय पड़हा समिति, सुतियाम्बेगढ के अंतर्गत संपूर्ण राज को वाजियाफ्त करने की घोषणा करते हैं.
यूपी, मध्यप्रदेश निकल रही महिलाएं
महामंत्री साधु लाल के अनुसार, छोटानागपुर राज की गद्दी केंद्रीय पड़हा समिति, सुतियाम्बेगढ की गढ़ है. इसकी अंतिम राजधानी रातु गढ़ रही है. अब हालात इतने बदतर हो गये हैं कि सभी महिलाएं आपस में ही द्वन्द युद्ध कर रही हैं. वे किसी तरह सारी संपत्ति बेचकर यूपी, मध्यप्रदेश इत्यादि जगहों पर निकल जाना चाहती हैं जिसे वे होने नहीं देंगे. रातु गढ़ के सामने की जमीन सार्वजनिक है. जीएम लैंड प्रकृति की हैं और इसे भी कई लोग बेच रहे हैं. यह मेला और पूजा इत्यादि के लिए सुरक्षित है. साधु लाल ने तत्काल प्रभाव से जमीन की खरीद बिक्री जैसी गतिविधियों को रोके जाने की अपील की है. साथ ही कहा है कि पारंपरिक राज व्यवस्था कए पड़हा कानून के अनुसार सब कुछ खाली कर के हमारा मुंडा राज हमें सौंप कर अपने घर चले जाएं. यह जमीन और गद्दी तभी तक दी गयी थी, जबतक राजवंश में पुरुष उत्तराधिकारी मौजूद रहे. अब हम अपना मुंडा राज वापस चाहिए. इसमें किसी तरह की आपत्ति, विपत्ति नहीं होनी चाहिए.




