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पैसे के दबाव से परेशान अधिवक्ता के मित्र ने रची थी हत्या की साजिश, शूटर को दी गई थी पांच लाख की सुपारी, तीन गिरफ्तार

Ranchi: राजधानी रांची के सुखदेव नगर थाना पुलिस ने अधिवक्ता गोली कांड का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस घटना को सात लोगों ने मिलकर अंजाम दिया था, जिसमें चार आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं. अधिवक्ता पैसे के लिए दबाव बनाता था. इस वजह से परेशान होकर अधिवक्ता के मित्र ने ही शूटरों को 5 लाख में हत्या की सुपारी दी थी. गिरफ्तार आरोपी में सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के राजा हाता लेन निवासी ओर शिकायतकर्ता विक्रम अग्रवाल, कांके थाना क्षेत्र के बोड़ेया के रहने वाला संजय अग्रवाल ओर बिहार के पटना जिले मोकामा निवासी रामु कुमार का नाम शामिल है. आरोपी के निशानदेही पर एक खोखा ओर तीन मोबाइल पुलिस ने बरामद किया है.

पुलिस के अनुसार 11 फरवरी की रात सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के राजाहता लेन के पास अधिवक्ता रवि शंकर मिश्रा को अपने दोस्त विकम अग्रवाल से मिलकर लौटने के क्रम में अज्ञात अपराधियों ने गोली मार दिया था. मामले के उद्भेदन के लिए कोतवाली डीएसपी के नेतृत्व में एक SIT टीम का गठन किया गया. एसआईटी टीम सभी बिन्दुओं पर गहराई से अनुसंधान किया गया तो इस काण्ड के वादी विकम अग्रवाल जो इस घटना में घायल अधिवक्ता रवि शंकर मिश्रा के मित्र है. के द्वारा ही पैसा का लेन देन जो 10 लाख के बदले तीन माह में 30 लाख रूपया विकम अग्रवाल से लेने वाला था. विकम अग्रवाल 20 लाख रुपया तक लौटा भी दिया गया था. फिर भी अधिवक्ता रवि शंकर मिश्रा 30 लाख रुपया मांग रहा था. इसी बीच विक्रम अग्रवाल कलकता साल्ट लेक स्थित 63 कट्ठा जमीन बंधक रखकर प्राईवेट कम्पनी से 30 करोड़ रुपया लोन ले रहे थे. उसकी जानकारी अधिवक्ता रवि शंकर मिश्रा को हो गयी, तो वह 30 लाख के जगह 1 करोड़ मांगने लगे और पिछले 2-3 माह से पैसा के लिए ज्यादा ही दबाव देने लगा. इसपर विक्रम अग्रवाल परिचित संजय अग्रवाल से इन परेशानी के बारे में बताया और अधिवक्ता रवि शंकर मिश्रा को रास्ते से हटाने के लिए आदमी खोजने लगा. संजय अग्रवाल के द्वारा जो उनके साथ कबाड़ी का व्यापार करने वाले अरबिन्द महतो से सम्पर्क किया और अधिवक्ता रवि शंकर मिश्रा की हत्या के लिए 5 लाख रूपया में तय हुआ. एडवांस के रूप में विकम अग्रवाल ने 55 हजार रूपया संजय अग्रवाल के माध्यम से अपराधियों को भेजा गया. बाकी पैसा काम पूरा होने के बाद देने की बात तय हुआ था और घटना के दिन योजना के अनुसार अधिवक्ता रवि शंकर मिश्रा को विकम अग्रवाल के द्वारा पैसा हिसाब किताब कर लेने की बात को लेकर बुलाया गया. और उसके बाद अपराधियों को भी इसकी जानकारी दिया गया. इसके बाद जैसे ही अधिवक्ता रवि शंकर मिश्रा, विकम अग्रवाल के घर से निकले तो घात लगाये अपराधियों ने पीछे से फायरिंग किया. रवि शंकर मिश्रा को कमर के उपर गोली लगी और भाग कर पुनः अपना मित्र विक्रम अग्रवाल के घर घूस गये. उसके बाद अधिवक्ता को विकम अग्रवाल और उसके भाई के द्वारा पल्स अस्पताल ईलाज के लिए ले गया था.

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