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बोकारो: दो सालों में भी नहीं बना सामुदायिक शौचालय, ONGC ने उठाया था बीड़ा

Bokaro: देश की महारत्न कंपनियों में शामिल ओएनजीसी ने झारखंड के मंत्री अमर कुमार बाउरी के नाम का उनके ही विधानसभा इलाके में मजाक बनाकर रख दिया है. उनके नाम का एक शिलापट्ट चंदनकियारी के पडुवा गांव में ओएनजीसी के अर्धनिर्मित सामुदायिक शौचालय के पास लगा हुआ है.

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लेकिन दो साल के बाद भी, अब तक शौचालय का चालीस फीसदी ही काम हो सका है. यहां सिर्फ मंत्री की बात नहीं है, यह कंपनी देश की बड़ी कंपनियों में से है, जब इन कंपनियों का हाल ऐसा रहेगा. तो देश के पीएम के स्वच्छ भारत का सपना कैसे पूरा होगा.

12 लाख की लागत से बनना था शौचालय

जिले के सिलफोर पंचायत के पडुवा गांव में ओएनजीसी के सीएसआर योजना से जनवरी 2017 में सामुदायिक शौचालय करीब 12 लाख रुपये से बनना था. जिस काम को 3 माह में ही पूर्ण हो जाना था. लेकिन अब डेढ़ वर्ष होने को है. अभी तक शौचालय अधूरा पड़ा है. इस शौचालय का शिलान्यास के वक्त ओएनजीसी के अधिकारियों ने कहा था कि स्वच्छ भारत अभियान को गति देने के उद्देश्य से ऐसे सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया जा रहा है. ताकि ग्रामीण खुले में शौच नहीं जाए. लेकिन इस योजना के अधूरा रहने से ओएनजीसी की साख पर सवाल उठने लगे हैं.

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ओएनजीसी ने एनजीओ को दिया था काम

ओएनजीसी अपने सीएसआर मद की राशि, बिहार के एक एनजीओ संगम चेरिटेबल ट्रस्ट को दिया था. एनजीओ ने शौचालय के लिये कमरा का निर्माण कराकर पानी के लिये बोरिग भी करवायी. लेकिन उसके बाद काम अधूरा ही छोड़ दिया. शौचालय की टंकी नहीं बन सकी. अब डेढ़ वर्षो में कमरा भी जर्जर हो चला है. इसे अब ओएनजीसी के अधिकारी भी देखने नहीं आते हैं. वही एनजीओ का भी काम को पूरा करने पर ध्यान नहीं है.

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