
Dhanbad: राज्य भर के 10 स्कूलों के युवा इनोवेटर्स आईआईटी आईएसएम में झारखंड स्कूल इनोवेशन चैलेंज के ग्रैंड फिनाले सप्ताह में भाग लेने के लिए नए उपकरण विकसित किए. जिसमें किसानों के लिए ऑल-इन-वन कृषि सहायता के अलावा मोक्ष छड़ी और खेतरक्षक जैसे अन्य उपकरण शामिल हैं. जो टिड्डियों के झुंड से खेतों की रक्षा करते हैं.
यह जानकारी शुक्रवार को नरेश वशिष्ठ सेंटर फॉर टिंकरिंग एंड इनोवेशन (एनवीसीटीआई) में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी.
इस दौरान कार्यवाहक डीन प्रोफेसर पंकज मिश्रा ने कहा कि 9 सितंबर से शुरू हुए कार्यक्रम के अंतिम दौर में भाग लेने वाले डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल एनटीएस बरकाकाना और एसडीएसएम स्कूल फॉर एक्सीलेंस पूर्वी सिंहभूम ने आईआईटी (आईएसएम) के विशेषज्ञों की मदद से अपनी अवधारणा के आधार पर नई परियोजनाएं विकसित की हैं.
एनवीसीटीआई के कार्यकारी अधिकारी राजेन दासगुप्ता ने कहा कि ग्रैंड फिनाले के लिए चुनी गई सभी भाग लेने वाली टीमों ने बेहतर मॉडल विकसित किए हैं.
उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता में प्रथम आने वाली टीम को 50 हजार रुपए, दूसरे स्थान पर आने वाले टीम को 30 हजार रूपए, तीसरे स्थान पर आने वाली टीम को 20 हजार रूपए दिया जायेगा. जबकि चौथे और पांचवें स्थान पर रहने वालों को सांत्वना पुरस्कार के रूप में 10 हजार रुपये का सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा.
वहीं डीएवी पब्लिक स्कूल कोयलांगर की तीन सदस्यीय टीम द्वारा विकसित कृषि बॉट नामक किसान सहायता मॉडल के बारे में बताते हुए, टीम के एक सदस्य ने कहा कि हमारी परियोजना उत्पादकता बढ़ाने, संसाधन प्रबंधन में सुधार और किसानों के लिए वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है. भारत का लक्ष्य किसानों को अपने खेतों में बुआई, सिंचाई, समतलीकरण और नमी की जांच के मैनुअल और अकुशल तरीकों से जूझने से राहत दिलाना है. इसके साथ ही मिट्टी को समतल करने के अलावा मिट्टी की सिंचाई भी की जाएगी




