Opinion

भारत में स्मार्ट और सस्टेनेबल सिटीज के लिए युवाओं की योग्यता में निवेश ही एक बेहतर नीति है

Rajesh Das

स्मार्ट सिटी मिशन के लिए बजट वर्ष 2018-19 में कर्णाकित 6,169 करोड़ रुपये की राशि की तुलना में सरकार के द्वारा मात्र 30 युवा छात्रों को भारत की शहरी चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु, एकवर्षीय फ़ेलोशिप की योजना एक अच्छी सोच के बावजूद बहुत ही ज्यादा छोटी है, और इसे नीचे दिए संदर्भों और कारणों की वजह से रिव्यू कर बदलने की जरूरत है-

 1. भारत की शहरी आबादी 32% है और यह बहुत तेज गति से बढ़ रही है, विश्व जनसंख्या रिपोर्ट 2007 के अनुसार 2030 तक भारत की 40.76% आबादी शहरों में निवास करने लगेगी. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार की अनुपलब्धता और कृषि का मुनाफे के पैमाने पर अनुपयोगी होने के कारण भारत की ग्रामीण आबादी लगातार शहरी क्षेत्रों की ओर ही पलायन करेगी, जो वर्तमान स्थिति को और भी ज्यादा विकट बना देगा.

 लगातार शहरीकरण और जनसंख्या के दबाव के कारण अर्बन मोबिलिटी, वेस्ट मैनेजमेंट, अर्बन प्लानिंग, अर्बन पब्लिक स्पेस मैनेजमेंट, पर्यावरण संरक्षण, भूजल प्रबंधन, आरोग्यता और स्वास्थ्य, सामाजिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास आदि से जुड़ी अनेकों चुनौतियां देश के समक्ष पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण ढंग से खड़ी होंगी, जिनका हल पेशेवर तरीके से खोजा जाना बेहद आवश्यक है.

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भारत में स्मार्ट और सस्टेनेबल सिटीज के लिए युवाओं की योग्यता में निवेश ही एक बेहतर नीति है

 2. सरकार के ट्रैक रिकॉर्ड और पूरी ताकत लगाने के बाद भी औसत उपलब्धियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि सरकार के पुराने कर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और वर्तमान की नगरीय व्यवस्था की टीम भविष्य की चुनौतियों को झेलने में तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हैं. जिसकी वजह से वर्तमान में भविष्य के पर्यावरण को लेकर कई समस्याएं भी उठ खड़ी हुई हैं. कहीं भूजल का स्तर काफी नीचे चला गया है, कहीं एम्बिएंट एयर क्वालिटी इंडेक्स अपने निचले स्तर पर है, कहीं प्रदूषित पेयजल से जुड़ी समस्याएं उठ खड़ी हुई हैं, कहीं फ़्लाईओवर निर्माण के क्रम में ही गिर जा रहे हैं तो कहीं मामूली बारिश से ही शहरों में बाढ़ आ जा रही है. वर्तमान में झारखंड की राजधानी समेत भारत के अनेक शहरों में वेस्ट मैनेजमेंट की प्रक्रिया मूलतः अवैज्ञानिक तरीके से संचालित की जा रही है, जो भविष्य के पर्यावरण के लिए बहुत ही ज्यादा नुकसानदायक है.

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अब अगर हम सरकारी फ्लैगशिप योजनाओं के कुछ विभागों या मिशन निदेशालय में अलग से रखे गए कर्मियों की योग्यता पर गौर करें तो भविष्य की चुनौतियों और इन कर्मियों की वर्तमान योग्यता में भारी गैप नजर आता हैं. अगर कोई 3rd पार्टी इनकी योग्यता की जांच करे तो इनकी नियुक्ति प्रक्रिया पर ही प्रश्न चिन्ह खड़े हो जाएंगे, क्योंकि इनकी नियुक्ति में तकनीकी मापदंडों का मूल्यांकन सही लोगों द्वारा नहीं किया गया है. यानी देश को अच्छे, पेशेवर और तकनीकी रूप से सक्षम  युवा लोगों की जरूरत है, जिन्हें इन फ़ेलोशिप के द्वारा और भी अच्छे ढंग से तराशा जा सकता है.

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3. भविष्य में भारत के उच्च योग्यताधारी युवाओं को रोजगार देने के लिए भी यह एक काफी अच्छा क्षेत्र है, जिसे वे इनोवेशन और चुनौतियों की वजह से काफी पसंद भी करेंगे. बताते चलें कि भारत में उच्च तकनीकी योग्यताधारी युवा वर्ग में अनएम्प्लॉयमेंट रेट लगभग 16% की दर पर है और यह लगातार उपर की ओर ही बढ़ रहा है. अगर हम यहां पर युवा लोगों को साध लें तो वर्तमान की कई नगरीय चुनौतियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी और न्यू इंडिया की परिकल्पना समय पूर्व ही पूरी हो सकेगी.

 4. भारत का विश्व शिक्षा इंडेक्स में स्थान काफी नीचे है और भारत को शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही ज्यादा ताकत लगाने की जरूरत है और यह ताकत सिर्फ आधारभूत ढांचा के लिए बजटीय उपबंध और उसके खर्च के द्वारा संभव नहीं है. अगर भारत को वास्तव में विश्वगुरु के पुराने गौरव को हासिल करना है तो देश को ठेकेदार-राजनीतिक-प्रशासनिक गठजोड़ से बाहर का विकास मॉडल तलाशना होगा.

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असर की हालिया रिपोर्ट भारत की शिक्षा व्यवस्था पर बड़े प्रश्न खड़े करती है, जहां ऊंची कक्षाओं के बच्चे काफी छोटी कक्षाओं के प्रश्न तक हल नहीं कर पा रहे हैं, और वे जैसे-तैसे डिग्री लेकर रोजगार पाने के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं. भारत को इन प्रश्नों के हल भी ढूंढने हैं, औसत योग्यता के लोग भारत का भला से ज्यादा दीर्घकाल में बुरा ही करेंगे, अतः इन्हें योग्य और सुपात्र बनाये जाने की सबसे ज्यादा जरूरत है.

 शोध एक अच्छा क्षेत्र हैं, अमेरिका की सर्वांगीण तरक्की में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों का बड़ा योगदान है. भारत में भी इस परंपरा को इमानदारी से आगे बढ़ाने की जरूरत है, और अगर ऐसा हो सके तो अच्छे शहर और वहां का बढ़िया जीवन युवाओं को भारत में भी रहने के लिए आकर्षित करेगी और ब्रेन ड्रेन जैसी विषयों का भी दीर्घकाल में हल ढूंढा जा सकेगा.

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अतः सरकार को चाहिए कि बजटीय निधि को बेतरतीब तरीके से सिर्फ कंक्रीट के निर्माण में खर्च करने के बजाय वे इस बजट के एक महत्वपूर्ण अंश को भविष्य के युवाओं में ईमानदारी से निवेश करें, सिर्फ एक अच्छी उपलब्धि, और भारत के युवा देश की तकदीर बदलकर रख देंगे.

( यह लेखक के निजी विचार हैं)

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