
Nitesh Ojha
Ranchi : स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 से मिली सफलता के बाद फिर से शहर को स्वच्छ रखने का रांची नगर निगम का दावा फेल होते दिख रहा है. बरसात के मौसम में शहर में फैली गंदगी से हो रही परेशानी किसी से छिपी नहीं है. शहरवासियों की सुविधाओं के लिए मुख्य इलाकों में बने कम्युनिटी और पब्लिक टॉयलेट हाल बेहाल है. यह बात कहने में कोई परहेज नहीं कि स्वच्छता पर निगम के दावे पूरी तरह से खोखले साबित हो रहे हैं.
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यूरिन और मल से भरे पड़े हैं निगम के पब्लिक टॉयलेट
रांची के प्रमुख इलाके जैसे राजभवन परिसर, प्रेस क्लब के पास बने टॉयलटों की स्थिति बहुत ही दयनीय है. इन टॉयलेटों के अंदर और बाहर इतनी गंदगी फैली है कि इसके अंदर जाने से ही लोग बीमार हो जायें. संबंधित वार्डों में इन टॉयलेटों की सफाई को लेकर नगर निगम ने एक-एक सुपरवाइजर भी रखा है. इसके बावजूद न ही वार्ड सुपरवाइजर और न ही निगम के किसी अफसर को इसकी परवाह है कि इन टॉयलेटों में प्रतिदिन सफाई हो भी रही है कि नहीं.
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आउटलेट की नहीं है सुविधा
रांची नगरनिगम की टॉयलेटों की इस स्थिति पर जब निगम में कार्यरत एक सुपरवाइजर से बातचीत की गयी तो उन्होंने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट बनाये गये थे. यह एक अच्छी पहल थी, लेकिन गलत यह हुआ कि टॉयलेट के नीचे बनी टंकी में ऑउटलेट की सुविधा नहीं बनायी गयी है. जिसके कारण यहाँ यूरिन और मल भर जाता है.
नगर निगम को नहीं है शहरवासियों की परवाह
न्यूज विंग रिपोर्टर ने गुरुवार सुबह जब शहर में बने पब्लिक टॉयलेटों की जांच की तो कई टॉयलटों में स्थिति ऐसी मिली कि इसका बयां करना भी मुश्किल है.
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राजभवन के पास एक तरफ टॉयलट के बाहर तो गंदगी फैली हुई थी. दूसरी और जब इस के अंदर की स्थिति को देखा गया तो कहने में भी शर्म आती है कि निगम आखिर किस बात को लेकर रांची शहर को स्वच्छ रखने का दावा करता है. पुरुष टॉयलेट के अंदर पूरा यूरिन भरा हुआ था. आस-पास के लोगों से जब इसकी जानकारी ली गयी तो उनका कहना था कि सफाई को लेकर सुपरवाइजर कोई विशेष काम करता ही नहीं.
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करमटोली स्थित रांची प्रेस क्लब के पास बने पब्लिक टॉयलेट का भी हाल बेहाल है. यह इलाका शहर के व्यस्ततम मार्गों में से एक है. गुरुवार के दिन रिपोर्टर ने इस टॉयलेटों के अंदर की स्थिति की जांच की थी. उसी दिन राज्य के मुखिया रघुवर दास इसी मार्ग से रिम्स परिसर में कई योजनाओं का उद्घाटन करने गये थे. वीडियो से साफ पता चलता है कि एक तो इस टॉयलेट के बाहर गंदगी भरी हुई है. दूसरी और इस टॉयलेट के अंदर पूरा मल भरा हुआ था. ऐसे में निगम के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों को यह सोचना चाहिए कि जब किसी रिपोर्टर को केवल इस वीडियो को बनाने में काफी परेशानी हुई तो शहरवासी इसके अंदर कैसे जायेंगे.
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