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बिजली संसाधनों के विकास के लिये केंद्र ने जेबीवीएनएल को 4200 करोड़ रूपये देने की स्वीकृति दी

बिजली घाटा, संसाधनों के विकास, प्रबंधन और स्मार्ट मीटर पर होगा काम

Ranchi: राज्य में बिजली आपूर्ति बेहतर करने के लिये राज्य ऊर्जा विभाग और झारखंड बिजली वितरण निगम प्रयासरत है. वहीं, केंद्र सरकार की ओर से भी ग्रामीण विद्युतिकरण को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है. विशेषकर 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिये संसाधनों के विकास और प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है. जहां ग्रामीण इलाकों में संसाधनों के विकास और प्रबंधन पर विशेष बल दिया जा रहा है. केंद्र सरकार ने इसके लिये 4200 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है. जो झारखंड बिजली वितरण निगम के लिये है. इस राशि का इस्तेमाल आरडीएसएस रिवैम्प डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम योजना के तहत वितरण निगम करेगा. बिजली वितरण निगम योजना को धरातल पर लाने के लिये कार्यरत है.

बिजली घाटा कम करने के लिये 3200 करोड़: आरडीएसएस के तहत राज्य में संसाधनों के विकास, बिजली घाटा कम करने, प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने पर काम किया जायेगा. केंद्र सरकार से स्वीकृत राशि के अनुसार बिजली घाटा कम करने के लिए संसाधनों के विकास पर 3200 करोड़ और प्री-पेड मीटर पर 800 करोड़ रुपये खर्च किया जाना है. स्कीम के तहत सभी 24 जिलों में बिजली के संसाधनों का विकास किया जाएगा. स्वीकृति 4200 करोड़ रूपये से घाटा कम करने में सहायता मिलेगी. ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरी क्षेत्रों में बिजली का बेहतर नेटवर्क स्थापित किया जायेगा. जानकारी हो कि जेबीवीएनएल की ओर से इसक लिये टेंडर प्रक्रिया की जा रही है.

 

13.41 लाख स्मार्ट मीटर लगेंगे: केंद्र सरकार के आदेश की मानें तो आने वाले कुछ सालों में राज्य में 13.41 लाख स्मार्ट मीटर लगाये जाने है. जो प्रीपेड मोड पर होंगे. फिलहाल राजधानी रांची में स्मार्ट मीटर लगाया जा रहा है. वहीं, जमशेदपुर, धनबाद में भी स्मार्ट मीटर लगाये जाने की प्रक्रिया चल रही है. वहीं, राजधानी रांची में स्मार्ट मीटर रिप्लेस किया जा रहा है. यहां जिन उपभोक्ताओं को नया कनेक्शन में ही स्मार्ट मीटर दिया गया है. उनका मीटर प्रीपेड मोड पर काम कर रहा है.

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