
Ranchi: राज्य सरकार राज्य भर में सरकारी कार्यों में सहयोग देने वाले पंचायत स्वयंसेवकों से संतुष्ट नहीं है. पंचायती राज विभाग, झारखंड ने सदन में यह बात मानी है. विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने सरकार के स्तर से पंचायत स्वयंसेवकों को आवंटित किये जाने वाले कार्यों और इसके एवज में नियमित मानदेय दिए जाने के बारे में जानकारी मांगी थी. साथ ही मनरेगा, पीएमवाईजे, आईएवाई, पीएम आवास योजना को पूरा करने और समय समय पर सौंपे जाने वाले जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारे जाने में पूरी तन्मयता के साथ काम किये जाने के बारे में पूछा था. इस पर विभाग ने इसे अस्वीकारात्मक बताया है. मतलब वह स्वयंसेवकों को मानदेय दिये जाने के मूड में अभी नहीं है. साथ ही उनके द्वारा तन्मयता से किये जाने वाले कार्यों को अस्वीकारात्मक मान रही है. पंचायत सचिवालय स्वयंसेवकों के सेवा शर्त नियमावली के गठन और इसके जरिये उनके हितों के लिए कदम उठाए जाने पर कहा है कि 20 मई 2015 को विभागीय संकल्प संख्या 1503 के जरिये पंचायत सचिवालय के गठन, पंचायत स्वयंसेवकों के चयन और उनकी सेवाशर्तें पूर्व से संसूचित हैं.
दीपिका ने की सेवा स्थायीकरण की मांग
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में शून्यकाल में भी आज विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने पंचायत स्वयंसेवकों के लिए आवाज उठायी. पंचायत स्वयंसेवक संघ का नामकरण पंचायत सहायक किये जाने, प्रोत्साहन राशि की बजाये उन्हें उचित मानदेय दिये जाने और 60 वर्ष तक उनकी सेवा स्थायी किये जाने की मांग सरकार से की थी.
गौरतलब है कि राज्य में वर्तमान में 18,000 पंचायत स्वयंसेवक हैं. वे लगातार मानदेय दिये जाने और 60 वर्ष तक स्थायी सेवा की सुविधा दिए जाने की मांग करते रहे हैं.
स्वयंसेवकों ने जतायी आपत्ति
विधानसभा में स्वयं सेवकों के मामले पर सरकार के जवाब पर इससे जुड़े संघ ने आपत्ति जतायी है. कहा है कि पंचायत सचिवालय स्वयंसेवकों का चयन वर्ष 2016 में पूर्व की रघुवर दास की सरकार में पंचायत सचिवालय का चयन पंचायत सचिवालय के तर्ज पर चलाने, पंचायत को जवाबदेह बनाने एवं पंचायत सचिवालय के माध्यम से सरकार के विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने को लेकर किया था. फल स्वरूप ये लोग अपने चयन काल से अब तक उस उद्देश्य की पूर्ति हेतु काम कर रहे हैं.
मगर वर्तमान सरकार (हेमंत सोरेन) की सरकार ने एक साजिश के तहत हम लोगों को कार्य में शून्य साबित करने के लिए हमारे सेवा शर्तों के आधार पर जो काम लिया जाना था, ऑफिशियल रूप से उसकी उपेक्षा की जा रही है. फिर भी अपने स्तर से हम लोग अपनी सेवा देने का काम कर रहे हैं जिसके एवज में जो प्रोत्साहन राशि हमें मिलनी थी, वह मिल भी नहीं पा रही है.
विधानसभा सत्र में हेमंत सोरेन की सरकार ने यह जवाब देकर सदन को गुमराह किया है. हमारी सेवा शर्तों के आधार पर जो काम ली जानी थी, सरकार के द्वारा नहीं लिया गया है. तो इसकी जिम्मेवार सरकार है, इस सरकार के पूरे कार्यकाल का प्रोत्साहन राशि हम लोगों को दिया जाए.
सरकार अगर हम लोगों को मानदेय निर्धारित नहीं करती है तो 15 जनवरी से 2023 से मोरहाबादी मैदान में संघ अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर होगा.
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