
Ranchi : बीते शुक्रवार को राजधानी रांची में हुई घटना के बाद पुलिस प्रशासन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में लगी हुई है. वहीं, इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति गरमायी हुई है. खासकर राज्यपाल के आदेश के बाद राजधानी में लगाये गये पोस्टर और कुछ मिनटों में उस पोस्टर को हटाने के मामले पर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने है. इसी कड़ी में बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मेन रोड स्थित हनुमान मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की और वहां के पुरोहितों से घटना की पूरी जानकारी ली.
मीडिया से बात करते हुए रघुवर दास ने साफ कहा कि वर्तमान सरकार सांप्रदायिक शक्तियों के आगे नतमस्तक है. कहा कि सत्ता में बैठे लोग सांप्रदायिक वोट लेने की साजिश कर रहे हैं. उन्होंने राजधानी में हुए दंगा में पीएफआई का हाथ होने की आशंका जतायी और पूरे मामले की जांच NIA से कराने की मांग की.
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रघुवर दास ने कहा कि यह एक तरह से टेरर फंडिंग का भी मामला है और इसकी जांच SIT गठित कर कराना सिर्फ आंख में धूल झोंकने जैसा है. जबतक इस पूरे मामले की सेंट्रल एजेंसी से जांच नहीं होगी तब तक मामले की तह तक नहीं पहुंचा जा सकता.
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन सरकार के दबाव में काम कर रही है.
राज्यपाल ने पुलिस प्रशासन को दोषियों का पोस्टर शहर के चौक-चौराहे पर चिपकाने का आदेश दिया. पुलिस प्रशासन ने पोस्टर चिपकाया भी लेकिन पांच मिनट के भीतर पोस्टर को हटा दिया गया.
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कहा कि यह पुलिस मैनुअल में भी है कि इसी बड़े घटना में शामिल अपराधियों का पोस्टर शहर के चौक-चौराहे पर चिपकाये जायें. आखिर किसके आदेश पर पोस्टर को हटाया गया ये जांच का विषय है.
दुर्भाग्य यह है कि पूरे मामले में राज्य के मुख्यमंत्री हल्की बातों का प्रयोग कर रहे हैं. हल्की बातों का प्रयोग कर मुख्यमंत्री सांप्रदायिक शक्ति को बढ़ावा दे रहे हैं. ढाई वर्षों के सरकार की कारगुजारी से राज्य में राष्ट्रविरोधी शक्तियों का मनोबल बढ़ गया है.
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राज्य में राष्ट्रपति शासन नहीं कि महामहिम के आदेश पर तुरंत अमल होः राजेश ठाकुर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि रांची हिंसा दुःखद रहा. लेकिन हमारा प्रयास सबसे पहले शांति व्यवस्था बरकरार रखना है. उन्होंने कहा कि राज्यपाल के सुझाव पर तत्काल एक्शन ठीक नहीं था. यहां कोई राष्ट्रपति शासन नहीं है जो राज्यपाल के आदेश का तुरंत पालन किया जाये. यहां चुनी हुई सरकार है.
सरकार ने पूरे घटनाक्रम के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. रिपोर्ट आने का इंतजार तो कर लें. वो भी तो राज्य सरकार की ही कमेटी है.
इधर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि जहां तक भीड़ पर गोली चलाने का मामला है तो कभी-कभी पुलिस वक्त के परिस्थिति और हालात को देखने के बाद ही ऐसा कदम उठाती है.
ये पुलिस मैनुअल और किताबों में लिखी नहीं होती है. उपद्रवियों के पोस्टर लगाए जाने के सवाल पर रामेश्वर उरांव ने कहा कि यह मामला राइट टू प्राइवेसी एक्ट का बनता है.
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