
- सरकारी वाहन का नहीं कर सकेंगे उपयोग, चेक काटने व योजना पारित करने पर लगी रोक
- राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी किया आदेश, विभागों को अनुपालन का दिया निर्देश
Nikhil Kumar
Ranchi : राज्य में पंचायत चुनाव लड़ रहे मुखिया, उप मुखिया, पंचायत समिति के प्रमुख, उप प्रमुख, जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष का पावर सीज कर लिया गया है. उनको मिली सरकारी सुविधाएं वापस ले ली गयी हैं. वे अब सरकारी वाहनों का भी उपयोग नहीं कर सकेंगे. इसके साथ ही वे मनरेगा सहित अन्य योजनाओं के लिए भुगतान के लिए चेक नहीं काट सकेंगे, न ही योजना पारित कर सकेंगे. राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है. आयोग के सचिव राधे श्याम प्रसाद ने इस संबंध में ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव, पंचायती राज विभाग के सचिव, निदेशक पंचायती राज विभाग, झारखंड के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपयुक्तों को पत्र लिखा है. आयोग के अनुसार राज्य में पंचायत चुनाव 2022 की घोषणा की जा चुकी है. ऐसे में आदर्श आचार संहिता भी लागू कर दी गयी है और यह राज्य की सभी पंचायतों में प्रभावी है.
ऐसे में निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान ग्राम पंचायत के मुखिया, उप मुखिया, पंचायत समिति के प्रमुख, उपप्रमुख एवं जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर आसीन वैसे सभी पदधारकों यदि स्वयं पंचायत निर्वाचन 2022 में उम्मीदवार हैं तो वैसी परिस्थिति में उन पर आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के बाद वे सरकारी सुविधा का उपयोग नहीं कर पायेंगे और न ही कोई सरकारी कार्य कर सकेंगे.
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आयोग ने उदाहरण के तौर पर कहा है कि यदि मुखिया जो इस चुनाव में उम्मीदवार हैं, वे किसी योजना के तहत अब किसी तरह का चेक निर्गत नहीं करेंगे तथा सरकारी वाहनों का उपयोग नहीं करेंगे. किसी तरह की बैठक भी नहीं करेंगे और न ही किसी तरह की कार्ययोजना को पारित करेंगे.
यही स्थिति पंचायत समिति के प्रमुख, उपप्रमुख, जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पर भी लागू कर दी गयी है. आकस्मिकता की स्थिति में राज्य सरकार, उपायुक्त वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करके काम करायेंगे. आयोग ने सारे मसले को आदर्श आचार संहिता के अंतर्गत मानते हुए इसका पालन तत्काल प्रभाव से कराने का आदेश दिया है.
बता दें कि झारखंड में 2015 में पंचायत चुनाव हुए थे जिसका पांच साल का कार्यकाल 2020 में ही हो गया जिसके बाद पंचायती राज संस्थाएं विघटित हो गयी थीं. कोरोना महामारी के कारण चुनाव नहीं हो सका.
ऐसे में कार्यकारी समिति गठित कर ग्राम पंचायतों में कार्य हो रहा था. चूंकि अब राज्य में चुनाव कराने की घोषणा हो गयी तो चुनाव लड़नेवाले वैसे सभी मुखिया, उपमुखिया व अन्य जनप्रतिनिधि की सुविधा वापस ली गयी है.
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