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खोरठा के बदले सिलेबस को लेकर विवाद शुरू, जानिए क्या है वजह

Ranchi : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से चल रही झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का आवेदन शुरू होते ही विवादों में आ गया है. उम्र सीमा विवाद के बाद ताजा विवाद खोरठा भाषा का दूसरी बार संशोधित सिलेबस जारी करने को लेकर हुआ है.

झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के दूसरे पेपर में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा के तहत खोरठा भाषा है. जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल अन्य भाषाओं में खोरठा एकमात्र ऐसी भाषा है जिसका परीक्षा होने से पहले दो बार सिलेबस बदला जा चुका है. इसे लेकर उम्मीदवार आक्रोशित हो रहे हैं.

बताते चलें कि खोरठा के संशोधित सिलेबस को लेकर उम्मीदवारों के एक समूह ने रांची विवि के खोरठा विभाग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा. उम्मीदवारों का कहना है कि अन्य भाषा के मुकाबले खोरठा का सिलेबस काफी बड़ा है. उन्होंने इसमें संशोधन करने की बात कही है.

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…इसलिए बड़ा और कठिन हो गया सिलेबस

उम्मीदवारों के मुताबिक खोरठा का पहला संशोधित सिलेबस लिमिटेड था. इसमें गद्य, पद्य सहित अन्य सेलेक्टेड टॉपिक से सवाल पूछे जाने थे. पर दूसरी बार जो संशोधित सिलेबस जारी किया गया है वो काफी बड़ा है.
उम्मीदवारों ने खोरठा का सिलेबस बड़ा होने के पीछे जो कारण बताया है उसके अनुसार खोरठा के गद्य भाग के छांइहर कहानी संग्रह में 10 कहानी, सोंध माटी कहानी संग्रह से 10 कहानी, खोरठा निबंध में 12 टॉपिक से सवाल होंगे. पद्य खंड में 31 कविता पढ़ना है. नाटक खंड के चार नाटक में तीन खंड और 16 दृश्य हैं.

साहित्य की अन्य विधा खंड की बात करें तो इसमें सिलेबस ही क्लियर नहीं है. ऐसे में उम्मीदवारों का कहना है कि दूसरी बार संशोधित कर जो सिलेबस जारी किया गया है उसमें आधा सिलेबस आधारहीन में है.

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